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Basti News: घटने लगा सरयू का जलस्तर... ग्रामीणों को अब राहत की उम्मीद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार की देर रात से घटने लगा है। इससे तटवर्ती गांवों के नागरिकों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि फसलों की बर्बादी और बाढ़ की तबाही आंखों के सामने से अभी हटी नहीं है। इसलिए ग्रामीणों में चिंता बरकरार है।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार बुधवार की शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 93.100 पर रिकार्ड हुआ है। यह खतरे के निशान से अब केवल 37 सेंटीमीटर ऊपर है। 24 घंटे पहले नदी का जलस्तर लाल निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर था। दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार नदी का तेज बहाव अभी तटबंध के कुछ हिस्सों पर बना हुआ है। बाढ़ के पानी से मैरूंड हुए पांच गांव में अभी राहत मिलती नही दिखाई दे रही है। जलभराव से गांव सुबिका बाबू, टेढवा, दो धाराओं की बीच बसा देवारागंगबरार का एक पुरवा, कुर्मियाना, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती में दुश्वारियां अभी बरकरार हैं। नदी का फैला हुआ पानी धीरे धीरे उतर रहा है। विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती के नागरिक बुधवार को भी तटबंध पर आश्रय लिए रहे। जलस्तर घटने से कटान होने की चिंता ग्रामीणों को सता रही है। प्रभावित गांवों में पशु चारे का संकट बना हुआ है।
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बाढ़ प्रभावित गांव का किया निरीक्षण
विक्रमजोत। पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य अरविंद सिंह बौद्ध बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांव संदलपुर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की दुश्वारियां देखीं। इस दौरान बाढ़ खंड के अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देशित किया कटान रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाए। वहीं नदी का जलस्तर घटने से बाढ़ का पानी गांवों से खिसकने लगा है। तटीय गांवों में अब कटान का खतरा मंडराने लगा है।
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क्षेत्र के भरथापुर, कल्यानपुर, संदलपुर, छतौना माझा आदि गांवों के किसानों का कहना है कि बाढ़ के चलते किनारे की मिट्टी दलदल हो जाती है। इस वजह से कटान होने लगता है।
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मदरहवा में रुक गई कटान
गायघाट। नदी का जलस्तर लगातार घटने से कुदरहा ब्लाॅक के महुआपार कला के मदरहवा में कटान थम गई है। पानी हटने से ग्रामीणों ने काफी राहत महसूस की है। रविवार से ही यहां कटान रुकी हुई है। केवल मंगलवार की रात में राम अवध के घर के पास थोड़ी सी कटान हुई थी। कन्हैयालाल अपने घर को तोड़कर ईंट एवं अन्य मलबा कलवारी-रामपुर तटबंध के उत्तर शिफ्ट कर रहे हैं। बुधवार की सुबह बाढ़ खंड की टीम ने श्रमिकों की मदद से कटान स्थल पर मिट्टी भरी बोरियां रखवाकर पिचिंग का कार्य कराया है। अन्य कटान स्थालों पर भी तेजी के साथ पिचिंग कराया जा रहा है।
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बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार की देर रात से घटने लगा है। इससे तटवर्ती गांवों के नागरिकों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि फसलों की बर्बादी और बाढ़ की तबाही आंखों के सामने से अभी हटी नहीं है। इसलिए ग्रामीणों में चिंता बरकरार है।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार बुधवार की शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 93.100 पर रिकार्ड हुआ है। यह खतरे के निशान से अब केवल 37 सेंटीमीटर ऊपर है। 24 घंटे पहले नदी का जलस्तर लाल निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर था। दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार नदी का तेज बहाव अभी तटबंध के कुछ हिस्सों पर बना हुआ है। बाढ़ के पानी से मैरूंड हुए पांच गांव में अभी राहत मिलती नही दिखाई दे रही है। जलभराव से गांव सुबिका बाबू, टेढवा, दो धाराओं की बीच बसा देवारागंगबरार का एक पुरवा, कुर्मियाना, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती में दुश्वारियां अभी बरकरार हैं। नदी का फैला हुआ पानी धीरे धीरे उतर रहा है। विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती के नागरिक बुधवार को भी तटबंध पर आश्रय लिए रहे। जलस्तर घटने से कटान होने की चिंता ग्रामीणों को सता रही है। प्रभावित गांवों में पशु चारे का संकट बना हुआ है।
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बाढ़ प्रभावित गांव का किया निरीक्षण
विक्रमजोत। पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य अरविंद सिंह बौद्ध बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांव संदलपुर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की दुश्वारियां देखीं। इस दौरान बाढ़ खंड के अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देशित किया कटान रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाए। वहीं नदी का जलस्तर घटने से बाढ़ का पानी गांवों से खिसकने लगा है। तटीय गांवों में अब कटान का खतरा मंडराने लगा है।
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क्षेत्र के भरथापुर, कल्यानपुर, संदलपुर, छतौना माझा आदि गांवों के किसानों का कहना है कि बाढ़ के चलते किनारे की मिट्टी दलदल हो जाती है। इस वजह से कटान होने लगता है।
मदरहवा में रुक गई कटान
गायघाट। नदी का जलस्तर लगातार घटने से कुदरहा ब्लाॅक के महुआपार कला के मदरहवा में कटान थम गई है। पानी हटने से ग्रामीणों ने काफी राहत महसूस की है। रविवार से ही यहां कटान रुकी हुई है। केवल मंगलवार की रात में राम अवध के घर के पास थोड़ी सी कटान हुई थी। कन्हैयालाल अपने घर को तोड़कर ईंट एवं अन्य मलबा कलवारी-रामपुर तटबंध के उत्तर शिफ्ट कर रहे हैं। बुधवार की सुबह बाढ़ खंड की टीम ने श्रमिकों की मदद से कटान स्थल पर मिट्टी भरी बोरियां रखवाकर पिचिंग का कार्य कराया है। अन्य कटान स्थालों पर भी तेजी के साथ पिचिंग कराया जा रहा है।