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खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू

Tue, 31 Aug 2021 10:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 10:20 PM IST
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saryu river water level increase
बनकटी विकास खंड के बाढ़ प्रभावित गांव गोविंदपुर, धुसवा गांवों में फैला बाढ़ का पानी। संवाद - फोटो : BASTI
खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू
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- दुबौलिया के गौरा-सैफाबाद तटबंध पर टकटकवा गांव के पास पानी का दबाव बढ़ा
- विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र के चार गांव पानी से घिरे
- दो दर्जन से अधिक गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
दुबौलिया/ विक्रमजोत/ बस्ती। जिले में सरयू और अन्य छोटी नदियां उफान पर हैं। सरयू नदी खतरे के निशान 92.730 से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बीते साल नदी में खतरे के निशान से 78 सेंटीमीटर 92.570 मीटर तक पहुंच गई थी। नदी के रुख को देख दुबौलिया, विक्रमजोत के तटीय इलाकों के ग्रामीण सहमें हुए हैं।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर अब अपने उच्चतम जलस्तर की ओर बढ़ने लगा है। हालांकि नदी अभी हाइएस्ट फ्लड लेवल 94.010 मीटर से 74 सेंटीमीटर नीच बह रही है। बीते साल की बात करें तो अगस्त महीने में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 78 सेंटीमीटर ऊपर रहा था। इधर नदी का जलस्तर बढ़ने से विक्रमजोत विकास खंड के चार गांव कल्याणपुर, भरथापुर, पड़ाव व चानपुर गांव के चारो ओर पानी भर गया है। वहीं, दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
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भरथापुर व कल्यानपुर के मुख्य मार्ग पर करीब तीन फिट ऊपर पानी बह रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों को दैनिक प्रयोग की वस्तुओं को लाने के लिए गांव से निकलने में परेशानी हो रही है। क्षेत्र के कवलपुर, चानपुर, संदलपुर, छतौना, कन्हईपुर, नरसिंहपुर, खेमराजपुर, अइलिया जुग्गाराय, माझाकिता अव्वल, हाईवे पार परशुरामपुर के माचा, रिधौरा, परवरपारा, जोगापुर सहित दर्जन भर गांव के सिवान में पानी भर गया है और फसलें जलमग्न हैं। बाढ़ आपदा ग्रस्त गांवों के लोग सामान व अपने पशुओं को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में लगे हैं। एसडीएम हर्रैया सुखबीर सिंह ने कहा कि बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी पूरी है। बाढ़ चौकियों पर कर्मी तैनात हैं जो लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार में सरयू नदी की बाढ़ ने नदी व तटबंध के बीच बसे गांव के ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में करीब आधा दर्जन मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। पानी से चौतरफा घिरे गांव सुविखा व आंशिक टेढ़वा गांव के ग्रामीणों की दिनचर्या अभी भी नाव के सहारे पूरी हो हो रही है। अशोकपुर ग्राम पंचायत के सतहा, बलुईया व खजांचीपुर गांव का एक पुरवा, भुवरिया भी बाढ़ के पानी से घिर रहे हैं। यहां के संपर्क मार्ग पर घुटने भर पानी भर गया है। विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, टकटकवा गांव की तरफ अब पानी तेजी से फैल रहा है। किशुनपुर -मोजपुर रिंगबाध पर भी पानी का दबाव बढ़ने लगा है। कटरिया-चांदपुर तटबंध व गौरा-सैफाबाद तटबंध पर टकटकवा गांव के सामने से लेकर दलपतपुर गांव तक तेज दबाव बना हुआ है। जबकि पारा गांव के पास बैठे ठोकर पर मरम्मत कार्य जारी है। माझा क्षेत्र व तटवर्ती गांवों में पशुओं के हरे चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। टकटकवा गांव का रिंगबाध पर भी दबाव बना हुआ है। बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। अधिशाषी अभियंता बाढ़ खंड़ दिनेश कुमार ने बताया तटबंध पर लगातार नजर रखी जा रही है। पारा गांव के पास बैठे ठोकर पर मरम्मत कार्य जारी है। तटबंध पर कहीं कोई खतरे जैसी बात नहीं है।
प्रमुख प्रतिनिधि ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा
बभनान। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि गौर जटाशंकर शुक्ल ने मंगलवार को नाव से बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। अपनी टीम के साथ वह बाढ़ से प्रभावित गौर ब्लॉक के माझा मानपुर, अइला कला, धंधरिया, कंचनपुर गांवों में गए और लोगों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराया। जिसके बाद उन्होंने समस्याओं के त्वरित निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। इस मौके पर अमरदीप शुक्ला, ग्राम प्रधान धंधरिया बालमुकुंद यादव, सुभाष चौधरी, सरवन चौधरी आदि लोग मौजूद रहे।
कुआनों नदी की बाढ़ में फसल जलमग्न
बनकटी। कठिनईया, कुआनो नदी के बाढ़ का कहर जारी है। नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांव सिकरा खुर्द के राजस्व गांव चकमुबारकपुर, धुसवा, पगार, देवखर, गोविंदपुर व कमोखर, धुसवा आंशिक सहित कई गांवों में सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबने से बर्बाद हो रही है। वहीं, पशुओं के लिए चारे के लिए किसानों को दिक्कत हो रही है। धुसवा गांव में संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। पैदल चलना मुश्किल हो गया है। धुसवा निवासी अमरजीत यादव, अशोक कुमार, रामदुलारे, चंद्रभान ने बताया कि गांव के तीन तरफ बाढ़ का पानी है। गांव से निकलना मुश्किल हो गया है। देवकुंडा निवासी गंगाराम, राममूर्त ने बताया कि बाढ़ के पानी में आ रहे सांप-बिच्छू से भी भय बढ़ गए हैं। फसल भी बर्बाद हो रही है। जगन्नाथ, मनोज गयासुद्दीन, रामराज, रामजी, राम अचल ने बताया कि फसल डूबने से लगाई गई पूंजी बर्बाद हो गई है। गायत्री, इसरावती, विनोद ने बताया उनके पास मात्र 10 बिस्वा जमीन है जो बाढ़ में डूब गई है। मनीराम, प्रेम सागर, परशुराम, संतबली, रामकृपाल,रामरेखा आदि ने मुआवजे की मांग की है। उप जिलाधिकारी सदर पवन जायसवाल ने बताया तहसील की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने पर सहायता दी जाएगी। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
मुआवजे के लिए किसानों ने किया प्रदर्शन
सल्टौवा। सल्टौआ ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेतौहा गांव के दो राजस्व गांव की पूरी फसल बाढ़ में डूब गई है। मंगलवार को किसानों ने प्रदर्शन कर नदी के किनारे बांध बनाने व मुआवजे की मांग की। सल्टौआ ब्लॉक के प्रमुख पति अशोक कुमार उर्फ सिकंदर की अगुवाई में ग्रामीणों ने बेतौहा गांव के बगल बाढ़ के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया। कहा हर साल कुआनों नदी की बाढ़ के कारण धान की फसल बर्बाद हो जाती है। इस बार सुवरियहवा, भभरगणा राजस्व गांव के धान की फसल पूरी तरह से डूब गई है। बेतौहा गांव की आधे से अधिक फसल डूब गई है। परंतु राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी सुधि लेने नहीं आया। गांव के चिरैता, कुशलावती, शांति, भिखना, रामसुभग, शंभूनाथ, शिवदास, बहरैची, राम अवतार, राम मिलन, परमेश्वर, श्रीराम, चिनकू सहित अन्य कई किसानों मुआवजे की मांग की। भानपुर तहसीलदार केशरी नंदन तिवारी ने बताया की प्रकरण की जानकारी हो गई है। जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी। मौके पर सूर्यमणि पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, शिवपूजन, राम अदालती, अजय गुप्ता, बृजेश, महेश, चिनकू, हीरामती देवी, अखिलेश, राम सुरेश आदि मौजूद रहे।

सड़क डूबी, 40 किलोमीटर चक्कर काटना मजबूरी
सोनहा। सल्टौआ गोपालपुर क्षेत्र के न्याय पंचायत आमाके सैकड़ों लोगों को प्रतिदिन तहसील भानपुर मुख्यालय आने जाने के लिए बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। सूर्य मणि पांडेय, विनय कुमार पांडेय, दस्तावेज लेखक सुखराम पांडेय आदि लोगों ने बताया कि कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से आमा-चौराघाट से रामनगर, शिवाघाट मार्ग से तहसील भानपुर तक जाने वाली सड़क पानी से डूब गई है। जिससे चालीस किलोमीटर का चक्कर लगाते हुए गौर-शिवाघाट मार्ग से होते हुए तहसील मुख्यालय भानपुर जाना पड़ रहा है।
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