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Basti News: राेडवेज के पास चालक नहीं... कौन दौड़ाए बस
Wed, 19 Jun 2024 04:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 19 Jun 2024 04:11 AM IST
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डिपो को अखर रही 37 चालकों की कमी, संविदा पर भर्ती का इंतजार
छुट्टी न मिलने पर अक्सर होता संविदा चालकों से डिपो का विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रोडवेज डिपो के पास पर्याप्त चालक नहीं है। बसों को रूट वार सड़कों पर दौड़ाने में कठिनाई आ रही है। कुल 123 बसों के सापेक्ष 184 चालकों की जरूरत है। वर्तमान में 147 चालक ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 चालकों की कमी डिपो काे अखर रही है।
मानक के मुताबिक एक बस पर औसतन डेढ़ चालक की आवश्यकता होती है। तभी बसों का नियमित संचलन सुचारू रूप से संभव है। मगर, लंबे समय से डिपो के पास पर्याप्त चालक नहीं है। संविदा पर चालक भर्ती का इंतजार किया जा रहा है। मानदेय कम होने के कारण संविदा चालक की नौकरी के प्रति रुचि लोगों में कम रहती है। नियुक्ति के बाद भी लोग दो-चार महीने की नौकरी के बाद डिपो से तौबा कर लेते हैं।
लांग रूट की बसों का संचलन तो जैसे- तैसे हो जा रहा है, लेकिन लोकल रूट की बसों को अमूमन एक चक्कर ही चलाया जा रहा है। कुछ चालक ऐसे भी हैं कि दिन भर की ड्यूटी पूरी करने के बाद शाम को बस लेकर बांसी, महुली, बढ़नी आदि रूटों पर जाने के बाद रात्रि विश्राम करते हैं। सुबह फिर वह लौट पाते हैं। चालकों की कमी की वजह से शाम 6 बजे के बाद डिपो से लोकल रूटों पर गाड़ियां नहीं मिल रही हैं।
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विवश होकर यात्रियों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बाबत एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि संविदा चालकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही चालकों की कमी दूर हो जाएगी।
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छुट्टी न मिलने पर अक्सर होता संविदा चालकों से डिपो का विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रोडवेज डिपो के पास पर्याप्त चालक नहीं है। बसों को रूट वार सड़कों पर दौड़ाने में कठिनाई आ रही है। कुल 123 बसों के सापेक्ष 184 चालकों की जरूरत है। वर्तमान में 147 चालक ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 चालकों की कमी डिपो काे अखर रही है।
मानक के मुताबिक एक बस पर औसतन डेढ़ चालक की आवश्यकता होती है। तभी बसों का नियमित संचलन सुचारू रूप से संभव है। मगर, लंबे समय से डिपो के पास पर्याप्त चालक नहीं है। संविदा पर चालक भर्ती का इंतजार किया जा रहा है। मानदेय कम होने के कारण संविदा चालक की नौकरी के प्रति रुचि लोगों में कम रहती है। नियुक्ति के बाद भी लोग दो-चार महीने की नौकरी के बाद डिपो से तौबा कर लेते हैं।
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लांग रूट की बसों का संचलन तो जैसे- तैसे हो जा रहा है, लेकिन लोकल रूट की बसों को अमूमन एक चक्कर ही चलाया जा रहा है। कुछ चालक ऐसे भी हैं कि दिन भर की ड्यूटी पूरी करने के बाद शाम को बस लेकर बांसी, महुली, बढ़नी आदि रूटों पर जाने के बाद रात्रि विश्राम करते हैं। सुबह फिर वह लौट पाते हैं। चालकों की कमी की वजह से शाम 6 बजे के बाद डिपो से लोकल रूटों पर गाड़ियां नहीं मिल रही हैं।
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विवश होकर यात्रियों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बाबत एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि संविदा चालकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही चालकों की कमी दूर हो जाएगी।