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Basti News: पांच करोड़ के भुगतान मामले में फिर उठे सवाल, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

Fri, 07 Aug 2026 12:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:45 AM IST
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Questions raised again in the matter of payment of Rs 5 crore, panic in the health department
बस्ती। स्वास्थ्य विभाग में उपकरण, दवा, स्टेशनरी और अन्य कार्यों में हुए करीब पांच करोड़ रुपये के भुगतान का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। शासन स्तर पर हुई नई शिकायत के बाद विभाग में खलबली मची हुई है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर कई मदों में भुगतान किया गया। मामले में एक वरिष्ठ लिपिक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
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बताया जा रहा है कि सिविल कार्यों, विद्युत अनुरक्षण और अन्य मदों में बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए भुगतान किए जाने के आरोप हैं। इसको लेकर पहले भी तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरएस दुबे ने पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब दोबारा शिकायत के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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जानकारी के अनुसार 100 बेड हर्रैया महिला अस्पताल के संचालन के लिए चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद बजट जारी हुआ और खरीदारी कर भुगतान भी कर दिया गया। आरोप है कि बाद में उसी प्रस्ताव के आधार पर दोबारा बजट की मांग की गई।
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इसी मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ लिपिक के कार्यों पर सवाल उठाते हुए आयुक्त को शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की है। शासन स्तर से सीएमओ को भी नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद वरिष्ठ सहायक को वित्तीय वर्ष 2021-22 से वर्तमान तक वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में अनियमितता, शासनादेशों के उल्लंघन और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर नोटिस दिया गया था। अब शिकायत के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।
विद्युत अनुरक्षण में भी जांच के घेरे में भुगतान : विभागीय सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक विद्युत अनुरक्षण कार्यों में भी बिना एमबी (मेजरमेंट बुक) और टेंडर प्रक्रिया के करीब पांच करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप है।
इस संबंध में तत्कालीन सीएमओ की ओर से जारी पत्र में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। वर्ष 2021-22 में बिना तकनीकी स्वीकृति और कोटेशन के आधार पर 20 लाख रुपये के भुगतान की शिकायत डीएम से की गई थी।

जांच में प्रक्रिया संबंधी कमियां मिलने की बात सामने आई थी। इसके अलावा जेम पोर्टल पर कम कीमत में उपलब्ध सामग्री को भी कोटेशन के माध्यम से खरीदने, अर्जित अवकाश नकदीकरण और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के एरियर भुगतान से जुड़े मामलों में भी वरिष्ठ लिपिक की भूमिका की जांच की जा रही है।
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