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ओपेक अस्पताल में मरीजों पर दोहरी मार
basti
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:06 AM IST
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खराब पड़ी मशीन।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। मिनी पीजीआई कहा जाने वाला ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीजों को दोहरी मार पड़ रही है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जहां मेडिसिन विभाग में ताला लटक गया है, वहीं, सर्जरी विभाग भी करीब-करीब बंदी के कगार पर पहुंच गया है। तीन की जगह यहां केवल एक सर्जन की तैनाती है, जिससे मरीजों को रेफर से काम चलाया जा रहा है। इन स्थितियों के चलते बेशकीमती अत्याधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। शहर के ओपेक कैली अस्पताल की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। यहां मानक के अनुसार न तो डाक्टर हैं और न मशीनों का रख-रखाव हो पा रहा है। जो डॉक्टर हैं भी वे दलालों के दबाव में बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, जिससे मरीजों की कमर टूट जा रही है।
नहीं खुला हृदयरोग विभाग का ताला
ओपेक चिकित्सालय कैली की स्थापना दो दशक पूर्व हुई थी। शुरुआती दौर में यह चिकित्सालय लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा था। तब यहां हर विभाग में एक-एक विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती थी, मगर हृदय रोग विभाग डॉक्टर की कमी के चलते नहीं खुल सका। यह कमी आज भी बरकरार है। नतीजतन, इस विभाग पर ताला लटक रहा है। हृदय रोग विभाग का अत्याधुनिक संसाधनों से लैस वार्ड अंधेरे में ही डूबा रहता है।
बंद हो गया मेडिसिन विभाग
ओपेक चिकित्सालय कैली में किडनी रोग के लिए अत्याधुनिक डायलसिस मशीन स्थापित कराई गई है। शुरुआती दौर में डॉ. एमके सिन्हा ने इसका संचालन शुरू किया, मगर वर्ष 2001 में इनका स्थानांतरण हो गया। तब से लेकर वर्ष 2016 तक यह बंद रहा। बीच में कुछ दिनों तक इसके संचालन की कवायद भी शुरू हुई और डायलसिस शुरू भी हुई लेकिन फिर से स्थानांतरण के गाज ने डायलसिस विभाग बंद हो गया है। मेडिसिन विभाग पर ताला लग गया।
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ओवरलोड में सर्जरी विभाग
चिकित्सालय में सर्जन के तीन पद हैं। यहां तैनाती भी दो की हुई थी, मगर पिछले दिनों डॉ. जीएम शुक्ल का स्थानांतरण हो गया तो केवल एक सर्जन रह गए। यहां एक चिकित्सक पर काम बढ़ गया, जिससे सर्जरी की संख्या घट गई और अब इस पर भी बंदी का संकट गहराने लगा है।
चार महीने से सिटी स्कैन भी बंद
अस्पताल में सरकार ने अत्याधुनिक सिटी स्कैन मशीन भी है। यहां तीन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी है, मगर पिछले चार माह से सिटी स्कैन विभाग बंद है। क्योंकि मशीन अचानक खराब हो गई और अब इसे ठीक कराने की जहमत उठाने वाला कोई नहीं है।
इनकी सुनें
इससे अच्छा तो प्राइवेट इलाज करा लेते
सिद्धार्थनगर से बेटी का इलाज कराने आए अनवर अली कहते हैं कि अस्पताल में सभी दवाएं बाहर से ही लिखी जाती हैं। सिटी स्कैन मशीन खराब है। ऐसे में इसकी भी व्यवस्था तीमारदार को प्राइवेट में मोटी रकम अदा कर करानी पड़ती है। धन की कमी के चलते यहां आए थे, मगर यहां तो सब पैसे का ही खेल है। इससे अच्छा था कि निजी अस्पताल में इलाज करा लेते।
अव्यवस्था बनी पहचान
रामपुर से इलाज कराने आईं आयशा गोस्वामी कहती हैं कि यहां अव्यवस्था चारों ओर फैली है। आठ दिन से भर्ती हैं और ड्रिप चढ़ाने के लिए दीवार पर उसे टांगा जाता है। सात दिन से बिना स्टैंड के चढ़ाई जा रही थी ड्रिप।
रामपुर की आई मरीज आयशा गोस्वामी कहती है कि पीलिया और टायफाइड के वजह से पिदले आठ दिन से मै यहां भर्ती हूँ पर मुझे बिना स्टैंड के ही ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। मैंने कई बार नर्सो और डॉक्टरों से कहा पर किसी ने नहीं सुना।
इनका हुआ स्थानांतरण
ओपेक चिकित्सालय कैली के निदेशक डॉ. अतुल कुमार, डॉ. एके राय, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. शंकर लाल व डॉ. आलोक कुमार का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया है।
जल्द ही पटरी पर आएगी व्यवस्था
अस्पताल के सीएमएस डॉ. सोमेशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि पिछले छह माह में अस्पताल की हालत जिम्मेदारों के उपेक्षा की भेंट चढ़ गई। इसको पटरी पर लाने का प्रयास शुरू हो गया है। ज्वाइन करने के बाद शासन से लेकर स्थानीय स्तर तक व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन किया गया है। जल्द ही व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
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नहीं खुला हृदयरोग विभाग का ताला
ओपेक चिकित्सालय कैली की स्थापना दो दशक पूर्व हुई थी। शुरुआती दौर में यह चिकित्सालय लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा था। तब यहां हर विभाग में एक-एक विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती थी, मगर हृदय रोग विभाग डॉक्टर की कमी के चलते नहीं खुल सका। यह कमी आज भी बरकरार है। नतीजतन, इस विभाग पर ताला लटक रहा है। हृदय रोग विभाग का अत्याधुनिक संसाधनों से लैस वार्ड अंधेरे में ही डूबा रहता है।
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बंद हो गया मेडिसिन विभाग
ओपेक चिकित्सालय कैली में किडनी रोग के लिए अत्याधुनिक डायलसिस मशीन स्थापित कराई गई है। शुरुआती दौर में डॉ. एमके सिन्हा ने इसका संचालन शुरू किया, मगर वर्ष 2001 में इनका स्थानांतरण हो गया। तब से लेकर वर्ष 2016 तक यह बंद रहा। बीच में कुछ दिनों तक इसके संचालन की कवायद भी शुरू हुई और डायलसिस शुरू भी हुई लेकिन फिर से स्थानांतरण के गाज ने डायलसिस विभाग बंद हो गया है। मेडिसिन विभाग पर ताला लग गया।
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ओवरलोड में सर्जरी विभाग
चिकित्सालय में सर्जन के तीन पद हैं। यहां तैनाती भी दो की हुई थी, मगर पिछले दिनों डॉ. जीएम शुक्ल का स्थानांतरण हो गया तो केवल एक सर्जन रह गए। यहां एक चिकित्सक पर काम बढ़ गया, जिससे सर्जरी की संख्या घट गई और अब इस पर भी बंदी का संकट गहराने लगा है।
चार महीने से सिटी स्कैन भी बंद
अस्पताल में सरकार ने अत्याधुनिक सिटी स्कैन मशीन भी है। यहां तीन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी है, मगर पिछले चार माह से सिटी स्कैन विभाग बंद है। क्योंकि मशीन अचानक खराब हो गई और अब इसे ठीक कराने की जहमत उठाने वाला कोई नहीं है।
इनकी सुनें
इससे अच्छा तो प्राइवेट इलाज करा लेते
सिद्धार्थनगर से बेटी का इलाज कराने आए अनवर अली कहते हैं कि अस्पताल में सभी दवाएं बाहर से ही लिखी जाती हैं। सिटी स्कैन मशीन खराब है। ऐसे में इसकी भी व्यवस्था तीमारदार को प्राइवेट में मोटी रकम अदा कर करानी पड़ती है। धन की कमी के चलते यहां आए थे, मगर यहां तो सब पैसे का ही खेल है। इससे अच्छा था कि निजी अस्पताल में इलाज करा लेते।
अव्यवस्था बनी पहचान
रामपुर से इलाज कराने आईं आयशा गोस्वामी कहती हैं कि यहां अव्यवस्था चारों ओर फैली है। आठ दिन से भर्ती हैं और ड्रिप चढ़ाने के लिए दीवार पर उसे टांगा जाता है। सात दिन से बिना स्टैंड के चढ़ाई जा रही थी ड्रिप।
रामपुर की आई मरीज आयशा गोस्वामी कहती है कि पीलिया और टायफाइड के वजह से पिदले आठ दिन से मै यहां भर्ती हूँ पर मुझे बिना स्टैंड के ही ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। मैंने कई बार नर्सो और डॉक्टरों से कहा पर किसी ने नहीं सुना।
इनका हुआ स्थानांतरण
ओपेक चिकित्सालय कैली के निदेशक डॉ. अतुल कुमार, डॉ. एके राय, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. शंकर लाल व डॉ. आलोक कुमार का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया है।
जल्द ही पटरी पर आएगी व्यवस्था
अस्पताल के सीएमएस डॉ. सोमेशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि पिछले छह माह में अस्पताल की हालत जिम्मेदारों के उपेक्षा की भेंट चढ़ गई। इसको पटरी पर लाने का प्रयास शुरू हो गया है। ज्वाइन करने के बाद शासन से लेकर स्थानीय स्तर तक व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन किया गया है। जल्द ही व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।