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Basti News: पहेलियों में उलझ़ी पुलिस...अनसुलझे रहे कई मामले
Tue, 04 Feb 2025 11:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 04 Feb 2025 11:09 PM IST
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अक्सर शुरुआती तेजी के बाद ठिठक जा रहे पुलिस के पांव
हरिकांत और अधिवक्ता हत्याकांड सबसे ताजा उदाहरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बदमाशों की गोली सीने पर झेलने का दावा करने वाली पुलिस उलझे मामलों की गुत्थी सुलझाने में खुद उलझती जा रही है। शुरुआत में काफी तेजी दिखाने के बाद उसके पांव अचानक ठिठक जाते हैं। हाल में हुए अधिवक्ता चंद्रशेखर यादव हत्याकांड, वाल्टरगंज क्षेत्र के धौरहरा गांव का जामवंत कांड और मुंडेरवा थाने के रामपुर रेवटी गांव के हरिकांत गुप्ता हत्याकांड पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है।
कप्तानगंज क्षेत्र के सेंठा गांव की मां-बेटी हत्याकांड में मुख्य आरोपी ने पुलिस को जमकर छकाया। 50-50 हजार रुपये के दो इनामी आरोपी अब भी चकमा देने में कामयाब हैं। इतना बड़ा तंत्र और अत्याधुनिक संसाधनों से लैस पुलिस के सवालों से घिरा होने को लेकर लोगों में गुस्सा है। एएसपी ओपी सिंह के मुताबिक, पुलिस सभी मामलों की गहनता से छानबीन कर रही है। कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जो बचे हैं, उनके पीछे पुलिस टीमें लगी हैं।
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पुलिस की तफ्तीश से अधिवक्ता का परिवार असंतुष्ट
पत्नी ने एसपी से मिलकर की विवेचक बदलने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज (बस्ती)। बैदोलिया अजायब गांव के रहने वाले अधिवक्ता चंद्रशेखर यादव हत्याकांड के 10 दिन बाद भी मुख्यआरोपी संदीप यादव उर्फ मोनू और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी न होने से परिवार के लोग आहत हैं।
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हर्रैया पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट अधिवक्ता की पत्नी उमा देवी और भतीजे अभिषेक यादव, पंकज यादव ने मंगलवार की दोपहर 12 बजे एसपी से मुलाकात की। केस की तफ्तीश हर्रैया थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच से कराने की मांग की। उमा देवी ने एसपी से कहा कि वारदात के दिन समाधान दिवस पर उनके पति से पुलिस के सामने ही संदीप यादव उर्फ मोनू से विवाद हुआ था।
संदीप यादव ने जान से मारने की धमकी दी थी। मगर, हर्रैया पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते पति की सरेराह अपहरण क हत्या कर दी गई। वारदात के 10 दिन बाद भी मुख्य आरोपी संदीप यादव और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे आशंका है कि उनके परिवार के साथ अनहोनी हो सकती है। एसपी अभिनंदन ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाते हुए जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।
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हरिकांत का गला रेतने वालों का पुलिस नहीं लगा पाई पता
मुंडेरवा थाना क्षेत्र के रामपुर रेवटी गांव के हरिकांत गुप्ता फेरी लगाकर शृंगार प्रसाधन का सामान बेचता था। तीन मई की रात पिता भाष्कर गुप्ता के पास बिस्तर लगाकर सोया था। रात करीब 11 बजे मोबाइल पर किसी का फोन आने के बाद उससे मिलने चल दिया। करीब एक बजे वह लहूलुहान स्थिति में घर पहुंचा। पिता ने बताया कि हरिकांत के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और दोनों हाथ बंधे हुए थे। हरिकांत की हालत देख परिजन घबरा गए। परिजनों के मुताबिक, हरिकांत ने इशारा कर बताया कि उसे तीन लोग घर से 500 मीटर दूर बनकटी मार्ग पर ले गए और हाथ बांध दिए। मुंह में कपड़ा ठूंस कर गला रेतकर फरार हो गए। परिवार के लोग घायल को लेकर जिला अस्पताल गए, जहां उसकी मौत हो गई। यह गुत्थी भी पुलिस सुलझा नहीं पाई है।
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रहस्य...जिंदा है या मर गया जामवंत
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के धौरहरा निवासी जामवंत शर्मा गांव में स्कूल चलाते थे, जो इन दिनों बंद है। उनकी पत्नी महिमा के मुताबिक नौ जनवरी की सुबह करीब पांच बजे पति घर से निकले थे। सुबह करीब 7:30 बजे तक घर न लौटने पर बेटी उन्हें बुलाने बंद पड़े विद्यालय पर पहुंची। गेट के अंदर वह आवाज लगाने लगी। कोई जवाब न मिलने पर उसकी नजर एक कमरे में जल रहीं लकड़ियों पर पड़ी तो वह आग पर पानी डालकर बुझाने लगी।
कुछ दूरी पर उसने पापा का चप्पल पड़ा देखा तो चिल्लाते हुए घर पहुंची और मां महिमा शर्मा और बड़ी बहन को इसकी जानकारी दी थी। लोगों की भीड़ जुट गई। मौके पर जामवंत का चप्पल और स्कूल की चाभी मिली। इससे अनुमान लगाया गया कि जामवंत की हत्या कर शव जला दिया गया। मगर, कोई अन्य सबूत नहीं मिला कि मौके पर जो जला हुआ मांस का लोथड़ा मिला है, वह जामवंत का है। पुलिस अब तक तय नहीं कर पाई कि मामला क्या है।
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हरिकांत और अधिवक्ता हत्याकांड सबसे ताजा उदाहरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बदमाशों की गोली सीने पर झेलने का दावा करने वाली पुलिस उलझे मामलों की गुत्थी सुलझाने में खुद उलझती जा रही है। शुरुआत में काफी तेजी दिखाने के बाद उसके पांव अचानक ठिठक जाते हैं। हाल में हुए अधिवक्ता चंद्रशेखर यादव हत्याकांड, वाल्टरगंज क्षेत्र के धौरहरा गांव का जामवंत कांड और मुंडेरवा थाने के रामपुर रेवटी गांव के हरिकांत गुप्ता हत्याकांड पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है।
कप्तानगंज क्षेत्र के सेंठा गांव की मां-बेटी हत्याकांड में मुख्य आरोपी ने पुलिस को जमकर छकाया। 50-50 हजार रुपये के दो इनामी आरोपी अब भी चकमा देने में कामयाब हैं। इतना बड़ा तंत्र और अत्याधुनिक संसाधनों से लैस पुलिस के सवालों से घिरा होने को लेकर लोगों में गुस्सा है। एएसपी ओपी सिंह के मुताबिक, पुलिस सभी मामलों की गहनता से छानबीन कर रही है। कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जो बचे हैं, उनके पीछे पुलिस टीमें लगी हैं।
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पुलिस की तफ्तीश से अधिवक्ता का परिवार असंतुष्ट
पत्नी ने एसपी से मिलकर की विवेचक बदलने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज (बस्ती)। बैदोलिया अजायब गांव के रहने वाले अधिवक्ता चंद्रशेखर यादव हत्याकांड के 10 दिन बाद भी मुख्यआरोपी संदीप यादव उर्फ मोनू और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी न होने से परिवार के लोग आहत हैं।
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हर्रैया पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट अधिवक्ता की पत्नी उमा देवी और भतीजे अभिषेक यादव, पंकज यादव ने मंगलवार की दोपहर 12 बजे एसपी से मुलाकात की। केस की तफ्तीश हर्रैया थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच से कराने की मांग की। उमा देवी ने एसपी से कहा कि वारदात के दिन समाधान दिवस पर उनके पति से पुलिस के सामने ही संदीप यादव उर्फ मोनू से विवाद हुआ था।
संदीप यादव ने जान से मारने की धमकी दी थी। मगर, हर्रैया पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते पति की सरेराह अपहरण क हत्या कर दी गई। वारदात के 10 दिन बाद भी मुख्य आरोपी संदीप यादव और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे आशंका है कि उनके परिवार के साथ अनहोनी हो सकती है। एसपी अभिनंदन ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाते हुए जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।
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हरिकांत का गला रेतने वालों का पुलिस नहीं लगा पाई पता
मुंडेरवा थाना क्षेत्र के रामपुर रेवटी गांव के हरिकांत गुप्ता फेरी लगाकर शृंगार प्रसाधन का सामान बेचता था। तीन मई की रात पिता भाष्कर गुप्ता के पास बिस्तर लगाकर सोया था। रात करीब 11 बजे मोबाइल पर किसी का फोन आने के बाद उससे मिलने चल दिया। करीब एक बजे वह लहूलुहान स्थिति में घर पहुंचा। पिता ने बताया कि हरिकांत के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और दोनों हाथ बंधे हुए थे। हरिकांत की हालत देख परिजन घबरा गए। परिजनों के मुताबिक, हरिकांत ने इशारा कर बताया कि उसे तीन लोग घर से 500 मीटर दूर बनकटी मार्ग पर ले गए और हाथ बांध दिए। मुंह में कपड़ा ठूंस कर गला रेतकर फरार हो गए। परिवार के लोग घायल को लेकर जिला अस्पताल गए, जहां उसकी मौत हो गई। यह गुत्थी भी पुलिस सुलझा नहीं पाई है।
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रहस्य...जिंदा है या मर गया जामवंत
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के धौरहरा निवासी जामवंत शर्मा गांव में स्कूल चलाते थे, जो इन दिनों बंद है। उनकी पत्नी महिमा के मुताबिक नौ जनवरी की सुबह करीब पांच बजे पति घर से निकले थे। सुबह करीब 7:30 बजे तक घर न लौटने पर बेटी उन्हें बुलाने बंद पड़े विद्यालय पर पहुंची। गेट के अंदर वह आवाज लगाने लगी। कोई जवाब न मिलने पर उसकी नजर एक कमरे में जल रहीं लकड़ियों पर पड़ी तो वह आग पर पानी डालकर बुझाने लगी।
कुछ दूरी पर उसने पापा का चप्पल पड़ा देखा तो चिल्लाते हुए घर पहुंची और मां महिमा शर्मा और बड़ी बहन को इसकी जानकारी दी थी। लोगों की भीड़ जुट गई। मौके पर जामवंत का चप्पल और स्कूल की चाभी मिली। इससे अनुमान लगाया गया कि जामवंत की हत्या कर शव जला दिया गया। मगर, कोई अन्य सबूत नहीं मिला कि मौके पर जो जला हुआ मांस का लोथड़ा मिला है, वह जामवंत का है। पुलिस अब तक तय नहीं कर पाई कि मामला क्या है।