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बाढ़ की आशंका से सहमे कई गांवों के लोग
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बाढ़ की आशंका से सहमे कई गांवों के लोग
दुबौलिया। गौरा-सैफाबाद तटबंध के निकट बसे गांवों पर एक फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। टकटकवा, दलपतपुर और कैथौलिया समेत कई गांवों के लोग मानसून से पहले हो रही बारिश को देखकर ही सहम गए हैं। दरअसल, गांवों के निकट करोड़ों की लागत से बन रहे ठोकर तथा स्पर का काम अभी भी आधा-अधूरा ही है।
गौरा-सैफाबाद तटबंध पर मौजूदा समय में तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें से टकटकवा गांव के निकट लगभग 12 करोड़ की लागत से दो ठोकरों और स्परों का निर्माण अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। बता दें विगत वर्ष गौरा सैफाबाद तटबंध और सरयू नदी के बीच बसे टकटकवा गांव के निकट भीषण कटान हुई थी, जिससे नदी गांव व तटबंध के निकट आ गई। इस दौरान गांव किसी तरह बच गया। इसके बाद ही ठोकर निर्माण आदि के लिए परियोजना स्वीकृति हो गई। इस पर तीन माह से काम चल रहा है, लेकिन अभी भी दोनों ठोकरों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
रीवरमेंट का ही काम भी पूरा नहीं हो सका है। वहीं नदी के जलस्तर व बारिश से एक सप्ताह से काम ठप रहा। रविवार से फिर जलस्तर कम होने पर काम शुरू कर दिया गया है। गौरा-सैफाबाद तटबंध के एसडीओ हरिश्चंद्र का कहना कि इस तटबंध पर कुल तीन परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। बाढ़ आने से पहले सभी को पूरा कर लिया जाएगा व तटबंध को मजबूत कर लिया जाएगा।
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दो दर्जन घरों का पुरवा टकटकवा कटान के मुहाने पर खड़ा है। हालांकि बाढ़ खंड दावा कर रहा है की गांव को बचा लिया जाएगा। यहां के ग्रामीण रज्जू, राम जियावन, प्रहलाद, शिवकुमार आदि का कहना है कि अब वे सरयू के सहारे हैं। ठोकर बनाने के लिए बाढ़ खंड ने जमीन ले ली है। अब तो सरयू मैय्या ही जानें।
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दुबौलिया। गौरा-सैफाबाद तटबंध के निकट बसे गांवों पर एक फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। टकटकवा, दलपतपुर और कैथौलिया समेत कई गांवों के लोग मानसून से पहले हो रही बारिश को देखकर ही सहम गए हैं। दरअसल, गांवों के निकट करोड़ों की लागत से बन रहे ठोकर तथा स्पर का काम अभी भी आधा-अधूरा ही है।
गौरा-सैफाबाद तटबंध पर मौजूदा समय में तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें से टकटकवा गांव के निकट लगभग 12 करोड़ की लागत से दो ठोकरों और स्परों का निर्माण अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। बता दें विगत वर्ष गौरा सैफाबाद तटबंध और सरयू नदी के बीच बसे टकटकवा गांव के निकट भीषण कटान हुई थी, जिससे नदी गांव व तटबंध के निकट आ गई। इस दौरान गांव किसी तरह बच गया। इसके बाद ही ठोकर निर्माण आदि के लिए परियोजना स्वीकृति हो गई। इस पर तीन माह से काम चल रहा है, लेकिन अभी भी दोनों ठोकरों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
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रीवरमेंट का ही काम भी पूरा नहीं हो सका है। वहीं नदी के जलस्तर व बारिश से एक सप्ताह से काम ठप रहा। रविवार से फिर जलस्तर कम होने पर काम शुरू कर दिया गया है। गौरा-सैफाबाद तटबंध के एसडीओ हरिश्चंद्र का कहना कि इस तटबंध पर कुल तीन परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। बाढ़ आने से पहले सभी को पूरा कर लिया जाएगा व तटबंध को मजबूत कर लिया जाएगा।
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दो दर्जन घरों का पुरवा टकटकवा कटान के मुहाने पर खड़ा है। हालांकि बाढ़ खंड दावा कर रहा है की गांव को बचा लिया जाएगा। यहां के ग्रामीण रज्जू, राम जियावन, प्रहलाद, शिवकुमार आदि का कहना है कि अब वे सरयू के सहारे हैं। ठोकर बनाने के लिए बाढ़ खंड ने जमीन ले ली है। अब तो सरयू मैय्या ही जानें।