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Basti News: मौसम की मार, वायरल संक्रमण से लोग बीमार
Wed, 17 Jan 2024 01:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 17 Jan 2024 01:33 AM IST
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बस्ती। मौसम में वायरस के साथ बैक्टीरिया का प्रकोप भी बढ़ गया है। वायरस सर्दी जुकाम, बुखार व खांसी फैला रहा है, तो बैक्टीरिया से लोग टायफाइड जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। दोनों के हमले एक साथ होने से बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
हर दिन जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों कि संख्या लगभग एक हजार तक पहुंच रही है। साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों में 60 फीसदी मरीज सिर्फ बुखार से पीड़ित मिल रहे हैं। वहीं, ओपीडी में आ रहे मरीजों में अलग-अलग लक्षण दिख रहे हैं। पहले गला चोक हो रहा है, गले में दर्द के साथ गला बैठ रहा है। उसके दो दिन बाद बुखार हो रहा है। शरीर में अकड़न की शिकायत से लोग परेशान हैं।
जिला अस्पताल में सामान्य दिनों में हफ्ते की शुरुआत में सोमवार व मंगलवार को लगभग 1000 हजार नए मरीज पर्चा बनवाते हैं, लेकिन शनिवार आने तक नए मरीजों की संख्या 500 के नीचे चली जाती है। लेकिन जब से मौसम बदला है, तब से सोमवार से शनिवार तक नए मरीजों की संख्या 1000 के आसपास चल रही है। ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में अधिकतर मरीज वायरल बुखार, खांसी, जुकाम व टायफाइड के आ रहे हैं।
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वायरस संक्रमण के कारण पीड़ितों में कमी नहीं आ रही है। कुछ मरीजों को खांसी, छींक और नाक से पानी आने की शिकायत हो रही है। वहीं, अधिकतर मरीजों को तेज बुखार हो रहा है। 103 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार रिकार्ड किया जा रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में लगभग 876 मरीज आए।
जिला अस्पताल के फिजिशयन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि जुकाम से जुड़ी कुछ पेचीदगियों में शरीर में पानी की कमी, बैक्टीरिया से होने वाला न्यूमोनिया शामिल हैं। इनसे भी गंभीर स्थिति में सीने में रुकावट, मधुमेह और अस्थमा के मरीज एंटीबायोटिक का अनाप-शनाप प्रयोग न करें। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. सुरेश चंद्र कौशल का कहना है कि अस्पताल में सभी तरह के एंटीबायोटिक मौजूद हैं। वैसे भी वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक बिल्कुल नहीं खानी चाहिए, उसका कोई रोल नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक ही तय करेंगे कि एंटीबायोटिक लेनी है या नहीं।
कमजोर इम्युनिटी वाले अधिक परेशान
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रजत पांडेय के मुताबिक जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है, उन्हें हर मौसम में बार-बार सर्दी जुकाम होता रहता है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डाइट में विटामिन वाली चीजों को शामिल करें। बहुत से लोगों को धूल से एलर्जी होती है। धूल से बार-बार छींक आ सकती है।
ये अधिक रहें अलर्ट
-65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति
-छोटे और नवजात बच्चे
-दिल की बीमारियों से ग्रस्त मरीज
-ब्रॉन्काइटिस और अस्थमा जैसी बीमारियों के मरीज
-किडनी की बीमारी के मरीज
- मधुमेह से पीड़ित मरीज
-स्टेरॉयड लेनेवाले मरीज
-कैंसर का इलाज करा रहे मरीज
-घुटनों और जोड़ों में दर्द
-तेज बुखार
-थकान, हरारत
-कंपकंपी, पसीना आना
मौसम में बदलाव से जिन लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम सामंजस्य नहीं बिठा पा रहा है, वे वायरल के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन के शिकार हो रहे हैं। इससे लोगों को घबराने की बजाय संक्रमण से बचने व सफाई का ध्यान रखते हुए मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
-डॉ. पीके श्रीवास्तव, सीएमएस महिला अस्पताल
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हर दिन जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों कि संख्या लगभग एक हजार तक पहुंच रही है। साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों में 60 फीसदी मरीज सिर्फ बुखार से पीड़ित मिल रहे हैं। वहीं, ओपीडी में आ रहे मरीजों में अलग-अलग लक्षण दिख रहे हैं। पहले गला चोक हो रहा है, गले में दर्द के साथ गला बैठ रहा है। उसके दो दिन बाद बुखार हो रहा है। शरीर में अकड़न की शिकायत से लोग परेशान हैं।
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जिला अस्पताल में सामान्य दिनों में हफ्ते की शुरुआत में सोमवार व मंगलवार को लगभग 1000 हजार नए मरीज पर्चा बनवाते हैं, लेकिन शनिवार आने तक नए मरीजों की संख्या 500 के नीचे चली जाती है। लेकिन जब से मौसम बदला है, तब से सोमवार से शनिवार तक नए मरीजों की संख्या 1000 के आसपास चल रही है। ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में अधिकतर मरीज वायरल बुखार, खांसी, जुकाम व टायफाइड के आ रहे हैं।
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वायरस संक्रमण के कारण पीड़ितों में कमी नहीं आ रही है। कुछ मरीजों को खांसी, छींक और नाक से पानी आने की शिकायत हो रही है। वहीं, अधिकतर मरीजों को तेज बुखार हो रहा है। 103 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार रिकार्ड किया जा रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में लगभग 876 मरीज आए।
जिला अस्पताल के फिजिशयन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि जुकाम से जुड़ी कुछ पेचीदगियों में शरीर में पानी की कमी, बैक्टीरिया से होने वाला न्यूमोनिया शामिल हैं। इनसे भी गंभीर स्थिति में सीने में रुकावट, मधुमेह और अस्थमा के मरीज एंटीबायोटिक का अनाप-शनाप प्रयोग न करें। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. सुरेश चंद्र कौशल का कहना है कि अस्पताल में सभी तरह के एंटीबायोटिक मौजूद हैं। वैसे भी वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक बिल्कुल नहीं खानी चाहिए, उसका कोई रोल नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक ही तय करेंगे कि एंटीबायोटिक लेनी है या नहीं।
कमजोर इम्युनिटी वाले अधिक परेशान
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रजत पांडेय के मुताबिक जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है, उन्हें हर मौसम में बार-बार सर्दी जुकाम होता रहता है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डाइट में विटामिन वाली चीजों को शामिल करें। बहुत से लोगों को धूल से एलर्जी होती है। धूल से बार-बार छींक आ सकती है।
ये अधिक रहें अलर्ट
-65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति
-छोटे और नवजात बच्चे
-दिल की बीमारियों से ग्रस्त मरीज
-ब्रॉन्काइटिस और अस्थमा जैसी बीमारियों के मरीज
-किडनी की बीमारी के मरीज
- मधुमेह से पीड़ित मरीज
-स्टेरॉयड लेनेवाले मरीज
-कैंसर का इलाज करा रहे मरीज
-घुटनों और जोड़ों में दर्द
-तेज बुखार
-थकान, हरारत
-कंपकंपी, पसीना आना
मौसम में बदलाव से जिन लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम सामंजस्य नहीं बिठा पा रहा है, वे वायरल के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन के शिकार हो रहे हैं। इससे लोगों को घबराने की बजाय संक्रमण से बचने व सफाई का ध्यान रखते हुए मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
-डॉ. पीके श्रीवास्तव, सीएमएस महिला अस्पताल