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Basti News: मौसम में उतार-चढ़ाव से डायरिया, उल्टी-दस्त व बुखार के मरीज बढ़े
Thu, 11 May 2023 01:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 11 May 2023 01:35 AM IST
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे।
बस्ती। कभी बारिश तो कभी तेज धूप स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो रहा है। इस मौसम में डायरिया, उल्टी-दस्त व बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव से बच्चे सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। सबसे अधिक मामले डायरिया और बुखार के आ रहे हैं। डॉक्टर इस मौसम में खान-पान और सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। टिफिन का खाना 4 घंटे के अंदर खा लेने और बच्चों के पानी की बोतल व टिफिन की सफाई पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दे रहे हैं। सफर में बच्चों को बोतल का दूध पिलाने से परहेज करने की बात कह रहे है।
इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में भीढ़ बढ़ गई है। सामान्यतया जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन एक हजार मरीज आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हाल के दिनों में मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बुधवार को ओपीडी में करीब 1300 मरीजों का इलाज हुआ। बाल रोग विभाग में रोगियों की संख्या में अचानक से इजाफा हुआ है। जिला चिकित्सालय की ओपीडी खुलते ही बच्चों को दिखाने के लिए अभिभावकों की भीड़ लग गई। ओपीडी का समय समाप्त होने तक मरीजों के आने का सिलसिला चलता रहा। 50-60 रोगी तक रहने वाली संख्या अब 100 से 110 प्रतिदिन जा पहुंची है। बाल रोग विभाग में 70 मरीज देखे गए। डायरिया, उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित बच्चों को भर्ती करना पड़ा। चिल्ड्रेन वार्ड में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। यही हाल महिला अस्पताल के शिशु रोग विभाग का रहा।
चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तैयब अंसारी ने बताया कि बढ़ती गर्मी में बच्चों का खास ध्यान रखना जरूरी है। बड़ों की अपेक्षा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में डायरिया, लू, स्किन इंफेक्शन और वायरल फीवर जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। तेज गर्मी, धूप, धूल, धुआं के संपर्क में आने से बीमारियां होती हैं।
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ये बरतें सावधानी
-शिशुओं के मामले में प्लास्टिक की बोतल-निप्पल से बचें। जरूरी है तो हर प्रयोग से पहले अच्छी तरह से उबाल लें।
-बच्चों को सीधे धूप के संपर्क में न आने दें। घर से बाहर निकलने पर उन्हें तौलिया आदि से ढक लें।
-धूल-मिट्टी में खेलने से रोकें। गंदगी के कारण संक्रमण से पेट की गड़बड़ी और चर्म रोगों का खतरा रहता है।
-उल्टी या दस्त होने की स्थिति में बच्चे को ओआरएस का घोल जरूर दें और चिकित्सक से संपर्क करें।
-लगातार बुखार रहने पर डॉक्टर से राय लेकर बच्चे का रक्त परीक्षण कराएं।
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इस मौसम में आर्द्रता बढ़ जाती है। जब तेज धूप होती है। इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इस मौसम में उबाल कर पानी पीएं। खाना भी ताजा ही खाना चाहिए। घर में रखा खाना तो कभी भी खा लें, मगर बाजार या टिफिन का खाना चार घंटे के भीतर जरूर खा लें। - डॉ. अंकित चतुर्वेदी, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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इस मौसम में टायफाइड, हेपेटाइटिस, पीलिया, उल्टी-दस्त, डायरिया व हीट स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए धूप में आवश्यक हो तभी निकलें, वह भी सिर ढक कर। पानी पीकर ही घर से निकलें, जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए। - डॉ. पीके श्रीवास्तव, बाल रोग विशेषज्ञ
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इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में भीढ़ बढ़ गई है। सामान्यतया जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन एक हजार मरीज आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हाल के दिनों में मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बुधवार को ओपीडी में करीब 1300 मरीजों का इलाज हुआ। बाल रोग विभाग में रोगियों की संख्या में अचानक से इजाफा हुआ है। जिला चिकित्सालय की ओपीडी खुलते ही बच्चों को दिखाने के लिए अभिभावकों की भीड़ लग गई। ओपीडी का समय समाप्त होने तक मरीजों के आने का सिलसिला चलता रहा। 50-60 रोगी तक रहने वाली संख्या अब 100 से 110 प्रतिदिन जा पहुंची है। बाल रोग विभाग में 70 मरीज देखे गए। डायरिया, उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित बच्चों को भर्ती करना पड़ा। चिल्ड्रेन वार्ड में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। यही हाल महिला अस्पताल के शिशु रोग विभाग का रहा।
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चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तैयब अंसारी ने बताया कि बढ़ती गर्मी में बच्चों का खास ध्यान रखना जरूरी है। बड़ों की अपेक्षा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में डायरिया, लू, स्किन इंफेक्शन और वायरल फीवर जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। तेज गर्मी, धूप, धूल, धुआं के संपर्क में आने से बीमारियां होती हैं।
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ये बरतें सावधानी
-शिशुओं के मामले में प्लास्टिक की बोतल-निप्पल से बचें। जरूरी है तो हर प्रयोग से पहले अच्छी तरह से उबाल लें।
-बच्चों को सीधे धूप के संपर्क में न आने दें। घर से बाहर निकलने पर उन्हें तौलिया आदि से ढक लें।
-धूल-मिट्टी में खेलने से रोकें। गंदगी के कारण संक्रमण से पेट की गड़बड़ी और चर्म रोगों का खतरा रहता है।
-उल्टी या दस्त होने की स्थिति में बच्चे को ओआरएस का घोल जरूर दें और चिकित्सक से संपर्क करें।
-लगातार बुखार रहने पर डॉक्टर से राय लेकर बच्चे का रक्त परीक्षण कराएं।
इस मौसम में आर्द्रता बढ़ जाती है। जब तेज धूप होती है। इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इस मौसम में उबाल कर पानी पीएं। खाना भी ताजा ही खाना चाहिए। घर में रखा खाना तो कभी भी खा लें, मगर बाजार या टिफिन का खाना चार घंटे के भीतर जरूर खा लें। - डॉ. अंकित चतुर्वेदी, फिजीशियन, जिला अस्पताल
इस मौसम में टायफाइड, हेपेटाइटिस, पीलिया, उल्टी-दस्त, डायरिया व हीट स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए धूप में आवश्यक हो तभी निकलें, वह भी सिर ढक कर। पानी पीकर ही घर से निकलें, जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए। - डॉ. पीके श्रीवास्तव, बाल रोग विशेषज्ञ