{"_id":"6151f50e8ebc3e1ab542afb1","slug":"oxysion-was-reach-on-bad-of-drict-hospital-basti-news-gkp4108350118","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल के 250 बेड पर सीधे पहुंचेगी ऑक्सीजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल के 250 बेड पर सीधे पहुंचेगी ऑक्सीजन
विज्ञापन
जिला अस्पताल के 250 बेड पर सीधे पहुंचेगी ऑक्सीजन
- 960 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला जेनेरेटर प्लांट दे रहा आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल के लगभग 250 बेड पर अब सीधे पाइप लाइन के जरिए मरीज को ऑक्सीजन मिलना शुरू हो गया है। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए अस्पताल में 960 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता वाला प्लांट लगाया गया है। बेड तक पाइप लाइन लगाने का कार्य पहले ही किया जा चुका है।
प्रभारी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. राम प्रकाश ने कहा कि अस्पताल के पुराने पीआईसीयू में तो अभी सिलिंडर से ही आपूर्ति दी जा रही है, जबकि शेष 250 बेड पर प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है, जो शेष बचे हैं उनका भी वायरिंग आदि का काम पूरा हो चुका है। तकनीकी कारणों से उसे प्लांट के सिस्टम से नहीं जोड़ा जा सका है। बताया कि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट पीएम केयर फंड से लगाया गया है। प्लांट लगाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने डीआरडीओ को सौंपी है। प्लांट के लिए फाउंडेशन व शेड आदि बनाने का कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने वाली एजेंसी एनएचएआई ने किया है। शेड व फाउंडेशन बनाने के बाद उसमें प्लांट की मशीनें लगाई जा चुकी हैं। कोविड काल के दौरान सबसे पहले मरीज को जिला अस्पताल लाया जा रहा था। वहां पर प्राथमिक उपचार के साथ ही उसकी कोविड की जांच की जा रही थी। पॉजिटिव पाए जाने पर उसे मेडिकल कॉलेज बस्ती की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली में बने कोविड अस्पताल में रेफर कर दिया जा रहा था। चिकित्सकों की माने तो उस दौरान जो भी मरीज आ रहे थे, उनमें से अधिकांश को सांस फूलने की समस्या था। उनका ऑक्सीजन लेवल तेजी से कम हो रहा था, और उन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी। उस समय इमरजेंसी में बेड खाली न होने व ऑक्सीजन की कमी के कारण काफी मरीजों के इलाज में दिक्कत का सामना करना पड़ा। अब जबकि अस्पताल में खुद अपना ऑक्सीजन प्लांट लग गया है, तो मरीजों को आक्सीजन देने की समस्या दूर हो गई है। अस्पताल में बेड व इलाज की अन्य सुविधाएं पर्याप्त हैं, ऐसे में ऑक्सीजन की समस्या हल हो जाने के बाद कोविड की तीसरी लहर आती भी है तो उसका सामना आसानी से किया जा सकेगा।
----------
प्लांट काम करने लगा
जिला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो गया। प्लांट को लगाने का ठेका लेने वाली लखनऊ की फर्म सिंडिकेट इंडस्ट्रियल सर्विसेज की टीम ने प्लांट पर काम पूरा कर लिया है। कंपनी के सर्विस मैनेजर आशीष ने बताया कि प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। प्लांट में कनेक्शन देने का भी काम करीब-करीब पूरा हो गया है। अस्पताल में अब से 250 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
- 960 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला जेनेरेटर प्लांट दे रहा आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल के लगभग 250 बेड पर अब सीधे पाइप लाइन के जरिए मरीज को ऑक्सीजन मिलना शुरू हो गया है। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए अस्पताल में 960 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता वाला प्लांट लगाया गया है। बेड तक पाइप लाइन लगाने का कार्य पहले ही किया जा चुका है।
प्रभारी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. राम प्रकाश ने कहा कि अस्पताल के पुराने पीआईसीयू में तो अभी सिलिंडर से ही आपूर्ति दी जा रही है, जबकि शेष 250 बेड पर प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है, जो शेष बचे हैं उनका भी वायरिंग आदि का काम पूरा हो चुका है। तकनीकी कारणों से उसे प्लांट के सिस्टम से नहीं जोड़ा जा सका है। बताया कि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट पीएम केयर फंड से लगाया गया है। प्लांट लगाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने डीआरडीओ को सौंपी है। प्लांट के लिए फाउंडेशन व शेड आदि बनाने का कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने वाली एजेंसी एनएचएआई ने किया है। शेड व फाउंडेशन बनाने के बाद उसमें प्लांट की मशीनें लगाई जा चुकी हैं। कोविड काल के दौरान सबसे पहले मरीज को जिला अस्पताल लाया जा रहा था। वहां पर प्राथमिक उपचार के साथ ही उसकी कोविड की जांच की जा रही थी। पॉजिटिव पाए जाने पर उसे मेडिकल कॉलेज बस्ती की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली में बने कोविड अस्पताल में रेफर कर दिया जा रहा था। चिकित्सकों की माने तो उस दौरान जो भी मरीज आ रहे थे, उनमें से अधिकांश को सांस फूलने की समस्या था। उनका ऑक्सीजन लेवल तेजी से कम हो रहा था, और उन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी। उस समय इमरजेंसी में बेड खाली न होने व ऑक्सीजन की कमी के कारण काफी मरीजों के इलाज में दिक्कत का सामना करना पड़ा। अब जबकि अस्पताल में खुद अपना ऑक्सीजन प्लांट लग गया है, तो मरीजों को आक्सीजन देने की समस्या दूर हो गई है। अस्पताल में बेड व इलाज की अन्य सुविधाएं पर्याप्त हैं, ऐसे में ऑक्सीजन की समस्या हल हो जाने के बाद कोविड की तीसरी लहर आती भी है तो उसका सामना आसानी से किया जा सकेगा।
विज्ञापन
----------
प्लांट काम करने लगा
जिला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो गया। प्लांट को लगाने का ठेका लेने वाली लखनऊ की फर्म सिंडिकेट इंडस्ट्रियल सर्विसेज की टीम ने प्लांट पर काम पूरा कर लिया है। कंपनी के सर्विस मैनेजर आशीष ने बताया कि प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। प्लांट में कनेक्शन देने का भी काम करीब-करीब पूरा हो गया है। अस्पताल में अब से 250 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जा रही है।
विज्ञापन