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Basti News: सड़कों पर जान का दुश्मन बन रही ओवरस्पीड
Mon, 12 Aug 2024 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 12 Aug 2024 12:54 AM IST
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- ओवरस्पीड और नशे की हालत में वाहन चलाने पर हो रही दुर्घटनाएं
- जून माह में हुई 34 सड़क हादसों में 19 की गई जान, विभाग अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सुरक्षित यात्रा करने के लिए हाईवे पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार न भरिए। यहां के हाईवे पर इससे अधिक रफ्तार में चलने की इजाजत नहीं है। आधुनिक तकनीक से लैस लग्जरी गाड़ियों की ओवरस्पीड सीधे मौत के मुंह में धकेल रही है। अभी जून माह में जिले की हाईवे समेत अन्य सड़कों पर 34 मार्ग दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 19 लोगों की जान चली गई। सड़क सुरक्षा समिति के सर्वे में दुर्घटनाओं का अहम कारण ज्यादातर ओवरस्पीड एवं नशे की हालत में वाहन चलाना सामने आया है।
हाईवे समेत जिले के अन्य प्रमुख मार्गों की स्थिति काफी हद तक सुधार दी गई है। चौड़ीकरण के साथ हॉट मिक्स प्लांट से चमचमाती सड़कें लगातार तैयार हो रही है। इससे वाहनों चालकों को हाई स्पीड में चलने का अवसर मिल रहा है। मगर यह खतरनाक है। आधुनिक तकनीक से लैस लग्जरी गाड़ियों का स्पीड मीटर पलक झपकते 100 के पार हो जा रहा है।
जिले से होकर गुजरने वाली लखनऊ गोरखपुर फोरलेन, लुंबिनी-दुद्धी टू लेन, राम जानकी मार्ग टू लेन के अलावा बस्ती-कांटे मार्ग, बस्ती-डुमरिया मार्ग जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार का अलग-अलग मानक निर्धारित है। फोरलेन पर वाहनों की रफ्तार 80 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि अन्य सड़कों पर 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से सुरक्षित यात्रा की जा सकती है। फोरलेन पर अमूमन लग्जरी वाहनों की रफ्तार 100 से अधिक रहती है। जबकि इस रफ्तार के अनुकूल यह सड़क नहीं है। हाईवे दोनों तरफ से खुला हुआ है। आगे कभी जानवर या सड़क पार करते हुए लोग बनकर आ सकते हैं। अचानक अवरोध आने पर हाई स्पीड की गाड़िया नियंत्रित नहीं हो पाती है। इस वजह से दुर्घटना हो जाती है। इसी तरह टू- लेन सड़कों पर डिवाइडर एवं बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं है। यहां भी अधिक स्पीड में चलने पर खतरा बढ़ जाता है। ओवरस्पीड के दौरान सामने पड़ने वाले अवरोध से बचने के दौरान वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।
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इंटरसेप्टर से शुरू हुई स्पीड की चेकिंग
परिवहन विभाग ओवरस्पीड से होने वाले मार्ग दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अलर्ट हो गया है। जुलाई माह में शासन से उपलब्ध इंटरसेप्टर से हाईवे पर चेकिंग अभियान चलाया गया। यह तकनीक से लैस विशेष तरह का वाहन है। सड़क के किनारे खड़ा होकर ओवरस्पीड वाले वाहनों की पूरी स्कैनिंग करता है और उनकी गति भी माप लेता है। इस आधार पर विभाग चालान करता है। ऐसे में वाहन चलाते समय इस मुगालते में न रहे कि आप पकड़ में नहीं आएंगे। इंटरसेप्टर वाहन के कैमरे में आए तो कार्रवाई तय मानिए। जुलाई में एक सप्ताह के भीतर 21 वाहन हाईवे पर ओवर स्पीड में चालान किए गए हैं। यह वाहन संभागीय परिवहन विभाग ने इस माह सिद्धार्थनगर जनपद में चेेकिंग के लिए लगाया है। ओेवरस्पीड में प्रति वाहन चालान पर दो हजार रुपये जुर्माना भी है।
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रम्बलिंग स्ट्रिप न होना भी बन रहा दुर्घटना कारण
हाईवे व अन्य उच्कीकृत सड़कों पर खतरनाक मोड़ पर रम्बलिंग स्टीप या संकेतक का न होना भी दुर्घटना का कारण बन रहा है। अवैध कट और ब्लैक स्पॉट ज्यादा संवेदशनशील है। सड़क सुरक्षा समिति ऐसे स्थलों का चयन करने में जुटी है। हाईवे पर 24 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इन जगहों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
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मार्ग दुघर्टना के मामले में सबसे ज्यादा ओवरस्पीड का कारण सामने आया है। वाहन चलाते समय स्पीड का जरूर ध्यान दिया जाए। इसके लिए विभाग जागरूकता फैलाने के साथ कार्रवाई भी कर रहा है। यदि सजगता के साथ वाहन चलाए तो दुर्घटनाएं कम होंगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा दुर्घटनाओं में कमी भी आई है।
- रविकांत शुक्ल, आरटीओ प्रवर्तन
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- जून माह में हुई 34 सड़क हादसों में 19 की गई जान, विभाग अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सुरक्षित यात्रा करने के लिए हाईवे पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार न भरिए। यहां के हाईवे पर इससे अधिक रफ्तार में चलने की इजाजत नहीं है। आधुनिक तकनीक से लैस लग्जरी गाड़ियों की ओवरस्पीड सीधे मौत के मुंह में धकेल रही है। अभी जून माह में जिले की हाईवे समेत अन्य सड़कों पर 34 मार्ग दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 19 लोगों की जान चली गई। सड़क सुरक्षा समिति के सर्वे में दुर्घटनाओं का अहम कारण ज्यादातर ओवरस्पीड एवं नशे की हालत में वाहन चलाना सामने आया है।
हाईवे समेत जिले के अन्य प्रमुख मार्गों की स्थिति काफी हद तक सुधार दी गई है। चौड़ीकरण के साथ हॉट मिक्स प्लांट से चमचमाती सड़कें लगातार तैयार हो रही है। इससे वाहनों चालकों को हाई स्पीड में चलने का अवसर मिल रहा है। मगर यह खतरनाक है। आधुनिक तकनीक से लैस लग्जरी गाड़ियों का स्पीड मीटर पलक झपकते 100 के पार हो जा रहा है।
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जिले से होकर गुजरने वाली लखनऊ गोरखपुर फोरलेन, लुंबिनी-दुद्धी टू लेन, राम जानकी मार्ग टू लेन के अलावा बस्ती-कांटे मार्ग, बस्ती-डुमरिया मार्ग जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार का अलग-अलग मानक निर्धारित है। फोरलेन पर वाहनों की रफ्तार 80 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि अन्य सड़कों पर 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से सुरक्षित यात्रा की जा सकती है। फोरलेन पर अमूमन लग्जरी वाहनों की रफ्तार 100 से अधिक रहती है। जबकि इस रफ्तार के अनुकूल यह सड़क नहीं है। हाईवे दोनों तरफ से खुला हुआ है। आगे कभी जानवर या सड़क पार करते हुए लोग बनकर आ सकते हैं। अचानक अवरोध आने पर हाई स्पीड की गाड़िया नियंत्रित नहीं हो पाती है। इस वजह से दुर्घटना हो जाती है। इसी तरह टू- लेन सड़कों पर डिवाइडर एवं बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं है। यहां भी अधिक स्पीड में चलने पर खतरा बढ़ जाता है। ओवरस्पीड के दौरान सामने पड़ने वाले अवरोध से बचने के दौरान वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।
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इंटरसेप्टर से शुरू हुई स्पीड की चेकिंग
परिवहन विभाग ओवरस्पीड से होने वाले मार्ग दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अलर्ट हो गया है। जुलाई माह में शासन से उपलब्ध इंटरसेप्टर से हाईवे पर चेकिंग अभियान चलाया गया। यह तकनीक से लैस विशेष तरह का वाहन है। सड़क के किनारे खड़ा होकर ओवरस्पीड वाले वाहनों की पूरी स्कैनिंग करता है और उनकी गति भी माप लेता है। इस आधार पर विभाग चालान करता है। ऐसे में वाहन चलाते समय इस मुगालते में न रहे कि आप पकड़ में नहीं आएंगे। इंटरसेप्टर वाहन के कैमरे में आए तो कार्रवाई तय मानिए। जुलाई में एक सप्ताह के भीतर 21 वाहन हाईवे पर ओवर स्पीड में चालान किए गए हैं। यह वाहन संभागीय परिवहन विभाग ने इस माह सिद्धार्थनगर जनपद में चेेकिंग के लिए लगाया है। ओेवरस्पीड में प्रति वाहन चालान पर दो हजार रुपये जुर्माना भी है।
रम्बलिंग स्ट्रिप न होना भी बन रहा दुर्घटना कारण
हाईवे व अन्य उच्कीकृत सड़कों पर खतरनाक मोड़ पर रम्बलिंग स्टीप या संकेतक का न होना भी दुर्घटना का कारण बन रहा है। अवैध कट और ब्लैक स्पॉट ज्यादा संवेदशनशील है। सड़क सुरक्षा समिति ऐसे स्थलों का चयन करने में जुटी है। हाईवे पर 24 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इन जगहों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
मार्ग दुघर्टना के मामले में सबसे ज्यादा ओवरस्पीड का कारण सामने आया है। वाहन चलाते समय स्पीड का जरूर ध्यान दिया जाए। इसके लिए विभाग जागरूकता फैलाने के साथ कार्रवाई भी कर रहा है। यदि सजगता के साथ वाहन चलाए तो दुर्घटनाएं कम होंगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा दुर्घटनाओं में कमी भी आई है।
- रविकांत शुक्ल, आरटीओ प्रवर्तन