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Basti News: महिला की पिटाई व धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर का आदेश
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बस्ती। न्यायालय जेएम-एफटीसी क्राइम अगेंस्ट वूमेन के न्यायाधीश पीयूष कुमार की अदालत ने नगर पुलिस को महिला की पिटाई और धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की विवेचना कर 15 दिन में आख्या प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।
मामला नगर थाना क्षेत्र के कुशमौर गांव का है। गांव निवासी फूला देवी ने अधिवक्ता एसएन दूबे के माध्यम से न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। फूला देवी का आरोप है कि 31 जनवरी की शाम करीब पांच बजे गांव के सोनू, प्रेमकुमार और फगूना रंजिश को लेकर उनके घर पर चढ़ आए। आरोपियों ने घर के सामने स्थित जमीन का गलत ढंग से बैनामा कर दिया। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए सहन की जमीन और उसमें बने छप्परपोश रिहायशी मकान को बेचने व गिराने की धमकी दी। विरोध करने पर प्रेमकुमार ने उनका हाथ पकड़कर घर के अंदर से खींचा और तीनों आरोपियों ने मिलकर उनकी पिटाई की।
घर में रखे बर्तन भी तोड़ दिए गए, जिससे करीब एक हजार रुपये का नुकसान हुआ। शिकायत करने पर हत्या की धमकी भी दी। घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
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इनसेट
पुलिस आख्या में नहीं मिला विपक्षी की ओर से तथ्य
अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध प्रपत्रों और आवेदिका के शपथ पत्र से समर्थित प्रार्थना पत्र का अवलोकन किया। आदेश में कहा गया कि न्यायालय की ओर से संबंधित थाने से मामले की प्रथम दृष्टया सत्यता के संबंध में आख्या मांगी गई थी। आख्या के अनुसार विपक्षी की ओर से पुलिस को कोई तथ्य नहीं बताया गया।
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मामला नगर थाना क्षेत्र के कुशमौर गांव का है। गांव निवासी फूला देवी ने अधिवक्ता एसएन दूबे के माध्यम से न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। फूला देवी का आरोप है कि 31 जनवरी की शाम करीब पांच बजे गांव के सोनू, प्रेमकुमार और फगूना रंजिश को लेकर उनके घर पर चढ़ आए। आरोपियों ने घर के सामने स्थित जमीन का गलत ढंग से बैनामा कर दिया। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए सहन की जमीन और उसमें बने छप्परपोश रिहायशी मकान को बेचने व गिराने की धमकी दी। विरोध करने पर प्रेमकुमार ने उनका हाथ पकड़कर घर के अंदर से खींचा और तीनों आरोपियों ने मिलकर उनकी पिटाई की।
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घर में रखे बर्तन भी तोड़ दिए गए, जिससे करीब एक हजार रुपये का नुकसान हुआ। शिकायत करने पर हत्या की धमकी भी दी। घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
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पुलिस आख्या में नहीं मिला विपक्षी की ओर से तथ्य
अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध प्रपत्रों और आवेदिका के शपथ पत्र से समर्थित प्रार्थना पत्र का अवलोकन किया। आदेश में कहा गया कि न्यायालय की ओर से संबंधित थाने से मामले की प्रथम दृष्टया सत्यता के संबंध में आख्या मांगी गई थी। आख्या के अनुसार विपक्षी की ओर से पुलिस को कोई तथ्य नहीं बताया गया।