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Basti News: ऑपरेशन थिएटर पर ताला, अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे जांच की सुविधा ही नहीं
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सीएचसी कप्तानगंज का बंद ओटी
कप्तानगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कप्तानगंज में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और जरूरी संसाधनों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। करीब डेढ़ लाख की आबादी के उपचार की जिम्मेदारी वाले इस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद रिक्त हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है, जबकि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन होने के बावजूद मरीजों को रिपोर्ट के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। हेल्थ एटीएम भी करीब तीन साल से निष्क्रिय है। ऑपरेशन थिएटर में ताला लगा रहता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है।
नेशनल हाईवे के किनारे स्थित इस सीएचसी में सात विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन ही तैनात हैं। इनमें तीन जनरल फिजिशियन और एक सर्जन शामिल हैं। सर्जन सुनील तिवारी जिला अस्पताल में संबद्ध हैं। एमओआईसी डॉ. अनूप कुमार के अलावा डॉ. अहमद फरदीन और डॉ. राघवेंद्र वर्मा मरीजों को देखते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को सामान्य उपचार ही मिल पा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रोजाना 10 से 15 मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
अस्पताल में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन उपलब्ध है और टेक्नीशियन की तैनाती भी है, लेकिन मरीजों को एक्स-रे की रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मरीजों का कहना है कि मोबाइल से फोटो खींचकर रिपोर्ट दी जाती है। वहीं, अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट की सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों को करीब 15 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय या निजी सेंटर जाना पड़ता है।
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तीन साल से खराब है हेल्थ एटीएम
अस्पताल में लगी हेल्थ एटीएम मशीन करीब तीन साल से निष्क्रिय पड़ी है। इसके संचालन के लिए कर्मचारी की भी तैनाती नहीं है। पैथोलॉजी में शुगर, टीएलसी, डीएलसी, मलेरिया और डेंगू जैसी जांच हो रही हैं। सीबीसी, एलएफटी, केएलएफटी समेत कई जांचों के लिए मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
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वार्ड ब्वाय के तीन पद, ड्यूटी पर एक
अस्पताल में तीन फार्मासिस्ट तैनात हैं, लेकिन इनमें से एक जिला कारागार में ड्यूटी करता है। तीन वार्ड ब्वाय के स्थान पर केवल एक की ड्यूटी लग रही है। दवाओं में सामान्य दवाओं के अलावा एंटीवेनम और एंटी रेबीज उपलब्ध होने की बात कही गई है। हालांकि, मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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ओटी में ताला, सामान्य प्रसव तक सीमित सुविधा
अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर बंद है। एनेस्थेटिस्ट, स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण यहां सिजेरियन प्रसव की सुविधा नहीं है। सामान्य प्रसव ही कराया जा रहा है। स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए भी अस्पताल में विशेष व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई। हाईवे किनारे होने के कारण दुर्घटनाओं में घायल मरीज भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिलने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
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बोले मरीज और तीमारदार
जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। चिकित्सक बाहर से दवा लिखते हैं। सामान्य उपचार में भी परेशानी होती है। चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
-शेषधर चौधरी, बनहरा
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। आंख में संक्रमण होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं मिलते। दवाओं की भी कमी रहती है।
-पवन कुमार, खौपोखर
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जांच और दवा बाहर से लेनी पड़ती है। ऑपरेशन के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
-हदीशुन्निशा, महुलानी
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सामान्य उपचार ही हो पाता है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक बेहतर सुविधा की जरूरत है। उपलब्ध संसाधनों को भी पूरी तरह क्रियाशील करने की आवश्यकता है।
-कैलासा देवी, बलुआ
कोट
सीएचसी कप्तानगंज की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए एमओआईसी को निर्देशित किया जाएगा। जो उपकरण क्रियाशील नहीं हैं, उन्हें ठीक कराकर मरीजों के उपयोग में लाया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती
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नेशनल हाईवे के किनारे स्थित इस सीएचसी में सात विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन ही तैनात हैं। इनमें तीन जनरल फिजिशियन और एक सर्जन शामिल हैं। सर्जन सुनील तिवारी जिला अस्पताल में संबद्ध हैं। एमओआईसी डॉ. अनूप कुमार के अलावा डॉ. अहमद फरदीन और डॉ. राघवेंद्र वर्मा मरीजों को देखते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को सामान्य उपचार ही मिल पा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रोजाना 10 से 15 मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
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अस्पताल में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन उपलब्ध है और टेक्नीशियन की तैनाती भी है, लेकिन मरीजों को एक्स-रे की रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मरीजों का कहना है कि मोबाइल से फोटो खींचकर रिपोर्ट दी जाती है। वहीं, अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट की सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों को करीब 15 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय या निजी सेंटर जाना पड़ता है।
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तीन साल से खराब है हेल्थ एटीएम
अस्पताल में लगी हेल्थ एटीएम मशीन करीब तीन साल से निष्क्रिय पड़ी है। इसके संचालन के लिए कर्मचारी की भी तैनाती नहीं है। पैथोलॉजी में शुगर, टीएलसी, डीएलसी, मलेरिया और डेंगू जैसी जांच हो रही हैं। सीबीसी, एलएफटी, केएलएफटी समेत कई जांचों के लिए मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
वार्ड ब्वाय के तीन पद, ड्यूटी पर एक
अस्पताल में तीन फार्मासिस्ट तैनात हैं, लेकिन इनमें से एक जिला कारागार में ड्यूटी करता है। तीन वार्ड ब्वाय के स्थान पर केवल एक की ड्यूटी लग रही है। दवाओं में सामान्य दवाओं के अलावा एंटीवेनम और एंटी रेबीज उपलब्ध होने की बात कही गई है। हालांकि, मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
ओटी में ताला, सामान्य प्रसव तक सीमित सुविधा
अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर बंद है। एनेस्थेटिस्ट, स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण यहां सिजेरियन प्रसव की सुविधा नहीं है। सामान्य प्रसव ही कराया जा रहा है। स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए भी अस्पताल में विशेष व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई। हाईवे किनारे होने के कारण दुर्घटनाओं में घायल मरीज भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिलने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
बोले मरीज और तीमारदार
जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। चिकित्सक बाहर से दवा लिखते हैं। सामान्य उपचार में भी परेशानी होती है। चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
-शेषधर चौधरी, बनहरा
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। आंख में संक्रमण होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं मिलते। दवाओं की भी कमी रहती है।
-पवन कुमार, खौपोखर
जांच और दवा बाहर से लेनी पड़ती है। ऑपरेशन के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
-हदीशुन्निशा, महुलानी
सामान्य उपचार ही हो पाता है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक बेहतर सुविधा की जरूरत है। उपलब्ध संसाधनों को भी पूरी तरह क्रियाशील करने की आवश्यकता है।
-कैलासा देवी, बलुआ
कोट
सीएचसी कप्तानगंज की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए एमओआईसी को निर्देशित किया जाएगा। जो उपकरण क्रियाशील नहीं हैं, उन्हें ठीक कराकर मरीजों के उपयोग में लाया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती