{"_id":"5efdda558ebc3e42bb684b26","slug":"not-a-single-death-due-to-je-in-three-years-basti-news-gkp3566621100","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन सालों में नहीं हुई जेई से एक भी मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन सालों में नहीं हुई जेई से एक भी मौत
विज्ञापन
तीन सालों में नहीं हुई जेई से एक भी मौत
विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान का असर
वर्ष-2017 में दर्ज हुई थी जेई से तीन मौत
बस्ती। जिले में पिछले तीन सालों में जेई से एक भी मौत नहीं हुई है। आखिरी बार 2017 में तीन मौत स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज की गई थी। इसे विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्वांचल के लिए अभिशाप बने एईएस, जेई से जंग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विशेष संचारी रोग व दस्तक अभियान शुरू किया गया। अब इसका असर सामने आने लगा है।
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी का कहना है कि विशेष संचारी रोग अभियान के माध्यम से जहां शहर से लेकर गांव तक स्वच्छता, शुद्ध पानी, जलभराव आदि पर जोर दिया गया, वहीं दस्तक अभियान में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को एईएस, जेई से बचाव के लिए घर वालों को जागरूक करती हैं। आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे जेई व एईएस के मामले जहां कम हो रहे हैं, वहीं मौत शून्य हो गई है। जागरूकता की ही देन है कि बच्चों के बीमार होने पर घर वाले बिना समय गंवाएं पीआईसीयू या ईटीसी केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी जान को बचायी जा सकी है। अब जरूरत इस बात की है कि इस जागरूकता की निरंतरता बनी रहे।
विज्ञापन
विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान का असर
वर्ष-2017 में दर्ज हुई थी जेई से तीन मौत
बस्ती। जिले में पिछले तीन सालों में जेई से एक भी मौत नहीं हुई है। आखिरी बार 2017 में तीन मौत स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज की गई थी। इसे विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्वांचल के लिए अभिशाप बने एईएस, जेई से जंग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विशेष संचारी रोग व दस्तक अभियान शुरू किया गया। अब इसका असर सामने आने लगा है।
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी का कहना है कि विशेष संचारी रोग अभियान के माध्यम से जहां शहर से लेकर गांव तक स्वच्छता, शुद्ध पानी, जलभराव आदि पर जोर दिया गया, वहीं दस्तक अभियान में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को एईएस, जेई से बचाव के लिए घर वालों को जागरूक करती हैं। आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे जेई व एईएस के मामले जहां कम हो रहे हैं, वहीं मौत शून्य हो गई है। जागरूकता की ही देन है कि बच्चों के बीमार होने पर घर वाले बिना समय गंवाएं पीआईसीयू या ईटीसी केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी जान को बचायी जा सकी है। अब जरूरत इस बात की है कि इस जागरूकता की निरंतरता बनी रहे।
विज्ञापन