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भारतीय उत्पादों की बिक्री बढ़ी
basti
Updated Wed, 18 Oct 2017 11:10 PM IST
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त्याोहार
- फोटो : amarujala
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भारत और चीन के बीच तनातनी का असर दिवाली में होने वाली सजावट पर देखने को मिला। चाइनीज बिजली उपकरण सस्ता होने के बावजूद 30 फीसदी भारतीय सजावटी उपकरण बिक रहे हैं। जिले की मार्केट करीब एक करोड़ की है। पिछले साल की अपेक्षा बिजली के चाइनीज झालर की इस बार 30 फीसदी कम की बिक्री है। भारतीय झालरों में एलईडी का प्रयोग होने से इसकी मांग बढ़ी है। हालत यह रही कि मांग के सापेक्ष आपूर्ति ही नहीं हुई। वर्षों से बिजली से जलने वाली रंग बिरंगी चाइनीज झालरों की तरह इस बार भारतीय झालरों में भी प्रयोग हुए।हालांकि इनमें बल्ब चायनीज ही हैं। स्वदेशी 15 मीटर बिजली झालर 140 रुपये में तो वहीं चाइनीज दाम महज 50 रुपये ही हैं।
कटरा में इलेक्ट्रिकल्स उपकरणों के कारोबारी आकाश मिश्र कहते हैं इस बार चाइनीज झालरों की बिक्री और मांग दोनों कम रही है। जबकि इंडियन के मुकाबले चाइनीज झालरों की कीमत बहुत कम है। अगर चाइनीज झालर 25 से 40 रुपये हैं तो वहीं इंडियन झालर की कीमत सौ रुपये से अधिक है। फिर उपभोक्ताओं के मांग के मुताबिक स्वदेशी उपकरणों की पूर्ति नहीं हो सकी है। झालर के बड़े कारोबारी हिमांशु मोदी ने कहा कि चाइनीज सामान के बहिष्कार का झालरों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा। पहले लोग चाइनीज झालर मांगते थे, मगर इस साल पहले इंडियन झालर की मांग कर रहे हैं। इंडियन नहीं मिला तो विकल्प में चाइनीज झालर ले गए। बताया कि दोनों के रेट में 100-30 रुपये के अंतर हैं। दूसरे विक्रेता रवि कुमार बताते हैं कि धीरे-धीरे चाइनीज झालर सहित चीन से बने अन्य सामान की बिक्री कम होती जा रही है। चाइनीज सामान सस्ता तो हैं, मगर टिकाऊ नहीं है।
दुकान पर सामान खरीद रहे सत्येंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि पहले अपना देश उसके बाद कोई और। कहते हैं कि हम सभी का यह दायित्व है कि इंडियन सामान खरीद कर देश की तरक्की में भागीदार बने। ग्राहक रमेश शर्मा ने बताया कि इस बार जो इंडियन झालर बाजार में आया है, वह काफी टिकाऊ है, हालांकि कीमत अधिक है, मगर देश के सामने यह कुछ भी नहीं है। सभी को चाइनीज सामान का राष्ट्रहित में बहिष्कार करना चाहिए। इंडियन झालर खरीद रहे रामजी ने बताया कि चाइनीज झालर सहित अन्य सामान देखने में तो काफी खूबसूरत दिखने वाला होता है, मगर टिकाऊ नहीं होता। चाइनीज झालर हर साल बदलना पड़ता है।
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इलेक्ट्रिक उपकरणों के फुटकर विक्रेता विद्यासागर पांडेय कहते हैं कि मार्केट में टिके रहने के लिए देशी उत्पादों के दाम में कमी और लानी होगी। लोग न चाहते हुए भी सस्ता होने के कारण विदेशी सामान खरीद रहे हैं। दूसरी कारोबारी महेंद्र नाथ का कहना है कि चीन के सामान सस्ते होते हैं। अभी आमजन सस्ता ही पूछता है। जबकि भारतीय उत्पाद महंगे जरूर हैं लेकिन इन्हें हर साल बदलना नहीं पड़ेगा। जो कस्टमर यह समझता है वह भारत निर्मित उपकरण खरीदता है। सच्चाई यह है कि इस बार करीब 80 फीसदी फिर भी बाजार है।
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भारत और चीन के बीच तनातनी का असर दिवाली में होने वाली सजावट पर देखने को मिला। चाइनीज बिजली उपकरण सस्ता होने के बावजूद 30 फीसदी भारतीय सजावटी उपकरण बिक रहे हैं। जिले की मार्केट करीब एक करोड़ की है। पिछले साल की अपेक्षा बिजली के चाइनीज झालर की इस बार 30 फीसदी कम की बिक्री है। भारतीय झालरों में एलईडी का प्रयोग होने से इसकी मांग बढ़ी है। हालत यह रही कि मांग के सापेक्ष आपूर्ति ही नहीं हुई। वर्षों से बिजली से जलने वाली रंग बिरंगी चाइनीज झालरों की तरह इस बार भारतीय झालरों में भी प्रयोग हुए।हालांकि इनमें बल्ब चायनीज ही हैं। स्वदेशी 15 मीटर बिजली झालर 140 रुपये में तो वहीं चाइनीज दाम महज 50 रुपये ही हैं।
कटरा में इलेक्ट्रिकल्स उपकरणों के कारोबारी आकाश मिश्र कहते हैं इस बार चाइनीज झालरों की बिक्री और मांग दोनों कम रही है। जबकि इंडियन के मुकाबले चाइनीज झालरों की कीमत बहुत कम है। अगर चाइनीज झालर 25 से 40 रुपये हैं तो वहीं इंडियन झालर की कीमत सौ रुपये से अधिक है। फिर उपभोक्ताओं के मांग के मुताबिक स्वदेशी उपकरणों की पूर्ति नहीं हो सकी है। झालर के बड़े कारोबारी हिमांशु मोदी ने कहा कि चाइनीज सामान के बहिष्कार का झालरों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा। पहले लोग चाइनीज झालर मांगते थे, मगर इस साल पहले इंडियन झालर की मांग कर रहे हैं। इंडियन नहीं मिला तो विकल्प में चाइनीज झालर ले गए। बताया कि दोनों के रेट में 100-30 रुपये के अंतर हैं। दूसरे विक्रेता रवि कुमार बताते हैं कि धीरे-धीरे चाइनीज झालर सहित चीन से बने अन्य सामान की बिक्री कम होती जा रही है। चाइनीज सामान सस्ता तो हैं, मगर टिकाऊ नहीं है।
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दुकान पर सामान खरीद रहे सत्येंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि पहले अपना देश उसके बाद कोई और। कहते हैं कि हम सभी का यह दायित्व है कि इंडियन सामान खरीद कर देश की तरक्की में भागीदार बने। ग्राहक रमेश शर्मा ने बताया कि इस बार जो इंडियन झालर बाजार में आया है, वह काफी टिकाऊ है, हालांकि कीमत अधिक है, मगर देश के सामने यह कुछ भी नहीं है। सभी को चाइनीज सामान का राष्ट्रहित में बहिष्कार करना चाहिए। इंडियन झालर खरीद रहे रामजी ने बताया कि चाइनीज झालर सहित अन्य सामान देखने में तो काफी खूबसूरत दिखने वाला होता है, मगर टिकाऊ नहीं होता। चाइनीज झालर हर साल बदलना पड़ता है।
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इलेक्ट्रिक उपकरणों के फुटकर विक्रेता विद्यासागर पांडेय कहते हैं कि मार्केट में टिके रहने के लिए देशी उत्पादों के दाम में कमी और लानी होगी। लोग न चाहते हुए भी सस्ता होने के कारण विदेशी सामान खरीद रहे हैं। दूसरी कारोबारी महेंद्र नाथ का कहना है कि चीन के सामान सस्ते होते हैं। अभी आमजन सस्ता ही पूछता है। जबकि भारतीय उत्पाद महंगे जरूर हैं लेकिन इन्हें हर साल बदलना नहीं पड़ेगा। जो कस्टमर यह समझता है वह भारत निर्मित उपकरण खरीदता है। सच्चाई यह है कि इस बार करीब 80 फीसदी फिर भी बाजार है।