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Basti News: कैसे हथियाएंगे नजूल की जमीन... प्रशासन के पास योजना ही नहीं
Sat, 09 Mar 2024 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 09 Mar 2024 12:08 AM IST
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शहर में 100 एकड़ से अधिक नजूल की जमीनों पर लंबे समय से दूसरों का कब्जा
अभिलेख में हेरफेर कर चढ़ा दिया नाम, जमीनों पर बन गई कोठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकार की मंशा के अनुरूप नजूल की जमीन को हथियाना प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं है। राजस्व अभिलेख से लेकर मौके तक इन जमीनों की प्रकृति बदल गई है। अभिलेख में हेरफेर कर वर्षों पहले जहां लोगों का नाम चढ़ गया है, वहीं मौके पर नजूल की जमीनों पर लंबे समय से कोठी-अटारी बनकर खड़ी है। इसीलिए कैबिनेट में नजूल की जमीनों का स्वामित्व राज्य सरकार के अधीन किए जाने के फैसले के बाद भी यहां प्रशासन की ओर से कोई योजना तैयार नहीं हो सकी है।
तहसील प्रशासन के पास नजूल की जमीनों का विवरण रजिस्टर बंद है। इसे छेड़ना मतलब जहमत उठाना है। तभी जिम्मेदार भी नजूल की जमीनों की पैमाइश या कब्जा वापस लेने से कतरा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में ही 100 एकड़ से अधिक नजूल की भूमि पर वर्षों से कब्जा है। इन जमीनों पर कहीं कोठी बनी हुई है तो कहीं कांप्लेक्स, घर, मकान और सहन के तौर उपयोग किया जा रहा है। कब्जेदारों की संख्या ज्यादा होने से प्रशासन भी बैकफुट पर नजर आ रहा है। किसी एक भी मामले को उधेड़ेंगे तो उसके साथ कई मामले उधड़ते चले जाएंगे।
आरोप है कि इन जमीनों पर कब्जा दखल पाने के लिए राजस्व अभिलेख में भी उलटफेर बड़े पैमाने पर हुआ है। यदि प्रशासन इन जमीनों को वापस लेने की मुहिम छेड़ता है तो सबसे पहले उसे अपने अभिलेख की ही पड़ताल करनी होगी। नाम दुरुस्तीकरण के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो पाएगी। कुछ नजूल की जमीनों पर तो पेच इस कदर फंसा है कि उस पर कई-कई बैनामेदार आ गए हैं। जिनका बैनामे के आधार पर तहसील से ही खाजिर दाखिल होकर नाम चढ़ाया गया है।
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ऐसे में पूरे प्रकरण में सिफ कब्जेदार ही अकेले दोषी नहीं कहे जा सकते हैं अलबत्ता सरकारी मुलाजिम भी जिम्मेदार है। निष्पक्षता से नजूल की जमीनों पर कार्रवाई शुरू हुई तो राजस्व विभाग के कई जिम्मेदार फंस सकते हैं। इधर, शासन का दबाव नजूल की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का बढ़ा तो राजस्व विभाग से लेकर कब्जेदारों तक में हलचल बढ़ जाएगी। बहरहाल, इस मकड़जाल में उलझने से अच्छा प्रशासन अभी चुप्पी साधे हुए हैं।
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बीडीए ने शुरू नहीं की कब्जा दखल की कार्रवाई
तीन माह पहले बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) की बैठक के दौरान नजूल की जमीन पर स्वामित्व को लेकर निर्णय लिए गए। इस दौरान बीडीए को इन जमीनों पर कब्जा दखल के लिए अधिकृत किया गया। तय हुआ कि बीडीए नजूल की जमीनों पर अपना बोर्ड लगाएगा। मगर, यह कार्रवाई अब तक नहीं शुरू हुई। यह हो भी कैसे जब तक राजस्व विभाग इन जमीनों की पैमाइश कर चिह्नांकन नहीं करेगा तब तक यह बीडीए के लिए अकेले संभव नहीं है। नतीजा नजूल की जमीनों का मालिकाना हक बीडीए के पास केवल कागजी कोरम बनकर रह गया है। शहरी क्षेत्र में एक भी नजूल की जमीन पर बीडीए अपना मालिकाना हक नहीं जता सका है।
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इन मोहल्लों में नजूल की जमीनों पर बस गई आबादी
शहरी क्षेत्र के नरहरिया, खीरीघाट, बस्ती खास, जामडीह, चननी, लबनापार, मनहनडीह, पचपेड़िया आदि मोहल्लों और गांवों में नजूल की जमीनों पर लंबे समय से लोगों का कब्जा चला आ रहा है। कुछ भू- माफिया ने तो राजस्व अभिलेख में इन जमीनों पर नाम चढ़वाकर बेच भी दी है। नजूल की जमीन पर नई काॅलोनियां बस गई हैं। कब्जेदारों के नाम से बाकायदा खतौनी है। ऐसे में उन्हें अचानक बेदखल करना किसी झमेले से कम नहीं है। क्योंकि जमीनों में नाम दर्ज होने से लेकर स्थानांतरण तक की कार्रवाई में तहसील की भूमिका है।
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मुख्य मार्गों पर भी नजूल की जमीन
शहर के बस्ती-मुंडेरवा मार्ग, मालवीय मार्ग, गांधीनगर मार्ग, पुरानी बस्ती क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के आसपास नजूल की जमीनें हैं। मगर, यहां कामर्शियल एवं आवासीय निर्माण होने से सघन आबादी बस गई है। इन जमीनों को खाली कराने के लिए कई-कई प्रतिष्ठान और घरों को उजाड़ना पड़ेगा। इसीलिए प्रशासन नजूल जमीन के कब्जेदारों पर हाथ नहीं डाल पा रहा है।
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कुछ जगहों पर पैमाइश भी संभव नहीं
सघन आबादी वाले क्षेत्रों में नजूल की जमीनों की पैमाइश भी संभव नहीं है। जानकारों की मानें तो आबादी वाले क्षेत्र में निष्पक्ष पैमाइश नहीं हो पाती है। सामान्य तौर पर मापी करके किसी जमीन को नजूल या बंजर की जमीन बताना न्यायिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इसके लिए विधिक प्रक्रिया अपनानी होती है। यही वजह है कि शहर में नजूल की जमीन तलाशने के लिए राजस्व टीम धरातल पर नहीं उतर पा रही है।
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सीज हुआ मैरिज हॉल, कब्जे से मुक्त नहीं करा पाए गड्ढे की जमीन
शहर के मुरलीजोत मोहल्ले में श्रीकृष्ण पांडेय स्कूल के पास संचालित एक मैरिज हॉल की जांच करने एसडीएम सदर पहुंचे थे। यहां कुछ हिस्से में निर्माण अवैध पाया गया। गड्ढे की जमीन पर अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। एसडीएम ने मैरिज हॉल की बुकिंग पर रोक लगा दी। मगर, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैरिज हॉल पूर्ववत संचालित हो रहा है। प्रशासन गड्ढे की जमीन खाली नहीं करा सका। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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कोट
नजूल की जमीन का विवरण तहसील प्रशासन के पास संकलित है। इन्हें कब्जे में लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा। सभी तरह की कार्रवाई विधिक रूप सेकी जाएगी। यदि इन जमीनों पर हुए अवैध कब्जे में सरकारी मुलाजिम की भूमिका संदिग्ध मिलेगी तो उनपर भी कार्रवाई होगी।
-शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर
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अभिलेख में हेरफेर कर चढ़ा दिया नाम, जमीनों पर बन गई कोठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकार की मंशा के अनुरूप नजूल की जमीन को हथियाना प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं है। राजस्व अभिलेख से लेकर मौके तक इन जमीनों की प्रकृति बदल गई है। अभिलेख में हेरफेर कर वर्षों पहले जहां लोगों का नाम चढ़ गया है, वहीं मौके पर नजूल की जमीनों पर लंबे समय से कोठी-अटारी बनकर खड़ी है। इसीलिए कैबिनेट में नजूल की जमीनों का स्वामित्व राज्य सरकार के अधीन किए जाने के फैसले के बाद भी यहां प्रशासन की ओर से कोई योजना तैयार नहीं हो सकी है।
तहसील प्रशासन के पास नजूल की जमीनों का विवरण रजिस्टर बंद है। इसे छेड़ना मतलब जहमत उठाना है। तभी जिम्मेदार भी नजूल की जमीनों की पैमाइश या कब्जा वापस लेने से कतरा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में ही 100 एकड़ से अधिक नजूल की भूमि पर वर्षों से कब्जा है। इन जमीनों पर कहीं कोठी बनी हुई है तो कहीं कांप्लेक्स, घर, मकान और सहन के तौर उपयोग किया जा रहा है। कब्जेदारों की संख्या ज्यादा होने से प्रशासन भी बैकफुट पर नजर आ रहा है। किसी एक भी मामले को उधेड़ेंगे तो उसके साथ कई मामले उधड़ते चले जाएंगे।
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आरोप है कि इन जमीनों पर कब्जा दखल पाने के लिए राजस्व अभिलेख में भी उलटफेर बड़े पैमाने पर हुआ है। यदि प्रशासन इन जमीनों को वापस लेने की मुहिम छेड़ता है तो सबसे पहले उसे अपने अभिलेख की ही पड़ताल करनी होगी। नाम दुरुस्तीकरण के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो पाएगी। कुछ नजूल की जमीनों पर तो पेच इस कदर फंसा है कि उस पर कई-कई बैनामेदार आ गए हैं। जिनका बैनामे के आधार पर तहसील से ही खाजिर दाखिल होकर नाम चढ़ाया गया है।
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ऐसे में पूरे प्रकरण में सिफ कब्जेदार ही अकेले दोषी नहीं कहे जा सकते हैं अलबत्ता सरकारी मुलाजिम भी जिम्मेदार है। निष्पक्षता से नजूल की जमीनों पर कार्रवाई शुरू हुई तो राजस्व विभाग के कई जिम्मेदार फंस सकते हैं। इधर, शासन का दबाव नजूल की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का बढ़ा तो राजस्व विभाग से लेकर कब्जेदारों तक में हलचल बढ़ जाएगी। बहरहाल, इस मकड़जाल में उलझने से अच्छा प्रशासन अभी चुप्पी साधे हुए हैं।
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बीडीए ने शुरू नहीं की कब्जा दखल की कार्रवाई
तीन माह पहले बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) की बैठक के दौरान नजूल की जमीन पर स्वामित्व को लेकर निर्णय लिए गए। इस दौरान बीडीए को इन जमीनों पर कब्जा दखल के लिए अधिकृत किया गया। तय हुआ कि बीडीए नजूल की जमीनों पर अपना बोर्ड लगाएगा। मगर, यह कार्रवाई अब तक नहीं शुरू हुई। यह हो भी कैसे जब तक राजस्व विभाग इन जमीनों की पैमाइश कर चिह्नांकन नहीं करेगा तब तक यह बीडीए के लिए अकेले संभव नहीं है। नतीजा नजूल की जमीनों का मालिकाना हक बीडीए के पास केवल कागजी कोरम बनकर रह गया है। शहरी क्षेत्र में एक भी नजूल की जमीन पर बीडीए अपना मालिकाना हक नहीं जता सका है।
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इन मोहल्लों में नजूल की जमीनों पर बस गई आबादी
शहरी क्षेत्र के नरहरिया, खीरीघाट, बस्ती खास, जामडीह, चननी, लबनापार, मनहनडीह, पचपेड़िया आदि मोहल्लों और गांवों में नजूल की जमीनों पर लंबे समय से लोगों का कब्जा चला आ रहा है। कुछ भू- माफिया ने तो राजस्व अभिलेख में इन जमीनों पर नाम चढ़वाकर बेच भी दी है। नजूल की जमीन पर नई काॅलोनियां बस गई हैं। कब्जेदारों के नाम से बाकायदा खतौनी है। ऐसे में उन्हें अचानक बेदखल करना किसी झमेले से कम नहीं है। क्योंकि जमीनों में नाम दर्ज होने से लेकर स्थानांतरण तक की कार्रवाई में तहसील की भूमिका है।
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मुख्य मार्गों पर भी नजूल की जमीन
शहर के बस्ती-मुंडेरवा मार्ग, मालवीय मार्ग, गांधीनगर मार्ग, पुरानी बस्ती क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के आसपास नजूल की जमीनें हैं। मगर, यहां कामर्शियल एवं आवासीय निर्माण होने से सघन आबादी बस गई है। इन जमीनों को खाली कराने के लिए कई-कई प्रतिष्ठान और घरों को उजाड़ना पड़ेगा। इसीलिए प्रशासन नजूल जमीन के कब्जेदारों पर हाथ नहीं डाल पा रहा है।
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कुछ जगहों पर पैमाइश भी संभव नहीं
सघन आबादी वाले क्षेत्रों में नजूल की जमीनों की पैमाइश भी संभव नहीं है। जानकारों की मानें तो आबादी वाले क्षेत्र में निष्पक्ष पैमाइश नहीं हो पाती है। सामान्य तौर पर मापी करके किसी जमीन को नजूल या बंजर की जमीन बताना न्यायिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इसके लिए विधिक प्रक्रिया अपनानी होती है। यही वजह है कि शहर में नजूल की जमीन तलाशने के लिए राजस्व टीम धरातल पर नहीं उतर पा रही है।
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सीज हुआ मैरिज हॉल, कब्जे से मुक्त नहीं करा पाए गड्ढे की जमीन
शहर के मुरलीजोत मोहल्ले में श्रीकृष्ण पांडेय स्कूल के पास संचालित एक मैरिज हॉल की जांच करने एसडीएम सदर पहुंचे थे। यहां कुछ हिस्से में निर्माण अवैध पाया गया। गड्ढे की जमीन पर अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। एसडीएम ने मैरिज हॉल की बुकिंग पर रोक लगा दी। मगर, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैरिज हॉल पूर्ववत संचालित हो रहा है। प्रशासन गड्ढे की जमीन खाली नहीं करा सका। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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कोट
नजूल की जमीन का विवरण तहसील प्रशासन के पास संकलित है। इन्हें कब्जे में लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा। सभी तरह की कार्रवाई विधिक रूप सेकी जाएगी। यदि इन जमीनों पर हुए अवैध कब्जे में सरकारी मुलाजिम की भूमिका संदिग्ध मिलेगी तो उनपर भी कार्रवाई होगी।
-शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर