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Basti News: कारसेवा के लिए छिपते-छिपाते बंगाल से अयोध्या पहुंचे थे बस्ती के चंद्रबली

Sun, 14 Jan 2024 01:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 14 Jan 2024 01:48 PM IST
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hiding for car service
सबके राम : चंद्रबली चौधरी। संवाद
- 108 साथियों के साथ पूजित ईंट लेकर बंगाल से निकले थे अयोध्या, मुगलसराय में गिरफ्तार हो गए थे 106 लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती।
बहादुरपुर ब्लॉक के कनैला खुर्द गांव के रहने वाले चंद्रबली चौधरी 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवा करने बंगाल से अयोध्या पहुंच गए थे। उनके साथ श्री रामलला मंदिर के लिए पूजित ईंट लेकर 108 लोगों की टोली निकली थी। रास्ते में मुगलसराय स्टेशन (वर्तमान का पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर) पर 106 लोग गिरफ्तार कर लिए गए, जबकि चंद्रबली और बिहार के रहने वाले एक साथी राम आसरे पांडेय पुलिस को चकमा देकर भाग निकले। बाद में दोनों लोग छिपते- छिपाते अयोध्या पहुंचे पर कारसेवा से पहले गिरफ्तार कर लिए गए।
राम मंदिर आंदोलन की बात उठते ही बुजुर्ग चंद्रबली जोश से भर जाते हैं। उनके संस्मरण में इससे बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। बताते हैं कि वह जीविकोपार्जन के लिए बंगाल में नौकरी करते थे। राम मंदिर आंदोलन की लहर वहां तक पहुंच चुकी थी। खाली समय वह मुहल्ले के घरों में जाकर श्री रामलला के मंदिर निर्माण के लिए ईंट का पूजन कराकर अपने कमरे में सुरक्षित रखने लगे। उनके इस जुनून को देखकर आंदोलन से जुड़े हिंदूवादी संगठनों ने उन्हें ईंट पूजन समिति का अध्यक्ष बना दिया। 1990 में हावड़ा के उलबेरिया स्थित शिशु मंदिर में उन्होंने कारसेवा का प्रशिक्षण लिया। 5 अक्तूबर 1990 को विद्यालय परिसर में 108 साथियों की टोली तैयार हुई। 108 कन्याओं ने सभी सदस्यों को तिलक लगाया। इसके बाद 6 अक्तूबर को ट्रेन से यह टोली पूजित ईंट के साथ अयोध्या के लिए रवाना हो गई। मगर मुगलसराय स्टेशन पर जांच के दौरन 106 साथी पकड़ लिए गए। चंद्रबली और उनके साथी राम आसरे यहां से चकमा देकर निकल लिए। कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। रास्ते में बस, ट्रक, टैक्सी वाहन का सहारा ले- लेकर किसी तरह सुल्तानपुर पहुंचे। यहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व विहिप पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। यहां से 10 अक्तूबर को पैदल अयोध्या पहुंच गए। अचानक पुलिस सामने आ गई। पुलिस की लाठियां खाकर घायल हो गए। पुलिस दोनों लोगो को गिरफ्तार कर वाराणसी स्थित बाल कारागार में डाल दी। 7 दिन बाद रिहा हुए। 1992 में फिर कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे। 6 दिसंबर 1992 की घटना के चश्मदीद बने।
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अब जाकर टूटा पान न खाने का प्रण
चंद्रबली उस समय पान खाने के बड़े शौकीन थे, लेकिन मंदिर आंदोलन से जुड़ने के बाद 6 दिसंबर 1992 को उन्होंने राम मंदिर न बनने तक पान नहीं खाने का प्रण कर लिया। 5 पांच अगस्त 2020 को जब श्रीराम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री ने श्री रामलला के मंदिर का शिलान्यास किया तब उन्होंने अपने इस प्रण का त्याग किया। कहते हैं कि अब यदा-कदा पान खा लेते हैं।
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आमंत्रण नहीं मिलने का मलाल नहीं

चंद्रबली बताते हैं कि श्री रामलला के नव्य मंदिर बनने की उन्हें आत्मीय खुशी है। आमंत्रण न मिलने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। कहते हैं कि प्रभु श्रीराम सबके हैं। उनके बिना जग अधूरा है। मंदिर बनने से बड़ी प्रसन्नता कुछ भी नहीं है। इसका उत्सव हम अयोध्या से लेकर घर तक मनाएंगे।
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