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Basti News: ठंड में बढ़ रहे दिल के मरीज... सता रही सांस की तकलीफ
Thu, 18 Dec 2025 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:56 AM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे मरीज।
- फोटो : poni news
बस्ती। ठंड बढ़ने के साथ हार्ट अटैक के मरीजों में भी इजाफा हो गया है। ह्दय रोगियों के लिए यह मौसम सबसे खतरनाक बताया जा रहा है। हल्की सी लापरवाही बरतना भी भारी पड़ सकती है। उल्टी- दस्त की समस्या आने के साथ सीने में अचानक दर्द बढ़ रहा है।
इस हालत में लोग मरीज को लेकर जब अस्पताल पहुंच रहे हैं तो चिकित्सक हार्ट अटैक की समस्या बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में नहीं है। जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय में इधर एक सप्ताह में गंभीर हालत में ह्दय रोगियों के आने की संख्या बढ़ी है। चौबीस घंटे में दोनों जगहों पर मिलाकर आठ से 10 मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में ऐसे मरीजों को देखने के बाद ईएमओ ह्दय रोग विशेषज्ञ और आईसीयू व वेंटिलेटर न होने की दलील देकर हायर मेडिकल सेंटर ले जाने की सलाह दे रहे हैं। इससे परेशान तीमारदार मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में पहुंच रहे हैं।
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उन्हें यहां भी इसी तरह की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। ईसीजी आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिकित्सक आईसीयू की जरूरत बताकर तत्काल रेफर कर दे रहे हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों की मौत हो जा रही है। रुधौली क्षेत्र के मुनियांव गांव से आए सुमित ने बताया कि उनके पिता को अभी तीन दिन पहले सुबह खांसी आने के साथ हल्की उल्टी हुई। इसके बाद उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं बनकटी से राम प्रकट ने बताया कि उनके 60 साल के भाई को अचानक हार्ट अटैक आया। उन्हें लेकर ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे। चिकित्सकों ने तत्काल वेंटीलेटर पर रखने की सलाह देकर रेफर कर दिया। उसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में मरीज को ले जाना पड़ा। जहां चार- पांच घंटे के इलाज का 15 हजार रुपये ले लिया गया। बाद में उन्हें एंबुलेंस से लखनऊ ले जाना पड़ा।
दोनों अस्पतालों में नहीं हैं ह्दय रोग विशेषज्ञ : जिला अस्पताल में पिछले दो दशक से ह्दय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। एसआईसी और सीएमओ स्तर से कई बार शासन से पत्राचार होने के बाद भी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की जा रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज में ह्दय रोग विभाग ही नहीं है। यहां दस बेड का आईसीयू वार्ड बनाया गया है लेकिन कुछ दिन संचालित करने के बाद व्यवस्था फेल हो गई। 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट अभी निर्माणाधीन अवस्था में हैं। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।
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इस हालत में लोग मरीज को लेकर जब अस्पताल पहुंच रहे हैं तो चिकित्सक हार्ट अटैक की समस्या बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में नहीं है। जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय में इधर एक सप्ताह में गंभीर हालत में ह्दय रोगियों के आने की संख्या बढ़ी है। चौबीस घंटे में दोनों जगहों पर मिलाकर आठ से 10 मरीज पहुंच रहे हैं।
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जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में ऐसे मरीजों को देखने के बाद ईएमओ ह्दय रोग विशेषज्ञ और आईसीयू व वेंटिलेटर न होने की दलील देकर हायर मेडिकल सेंटर ले जाने की सलाह दे रहे हैं। इससे परेशान तीमारदार मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में पहुंच रहे हैं।
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उन्हें यहां भी इसी तरह की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। ईसीजी आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिकित्सक आईसीयू की जरूरत बताकर तत्काल रेफर कर दे रहे हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों की मौत हो जा रही है। रुधौली क्षेत्र के मुनियांव गांव से आए सुमित ने बताया कि उनके पिता को अभी तीन दिन पहले सुबह खांसी आने के साथ हल्की उल्टी हुई। इसके बाद उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं बनकटी से राम प्रकट ने बताया कि उनके 60 साल के भाई को अचानक हार्ट अटैक आया। उन्हें लेकर ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे। चिकित्सकों ने तत्काल वेंटीलेटर पर रखने की सलाह देकर रेफर कर दिया। उसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में मरीज को ले जाना पड़ा। जहां चार- पांच घंटे के इलाज का 15 हजार रुपये ले लिया गया। बाद में उन्हें एंबुलेंस से लखनऊ ले जाना पड़ा।
दोनों अस्पतालों में नहीं हैं ह्दय रोग विशेषज्ञ : जिला अस्पताल में पिछले दो दशक से ह्दय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। एसआईसी और सीएमओ स्तर से कई बार शासन से पत्राचार होने के बाद भी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की जा रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज में ह्दय रोग विभाग ही नहीं है। यहां दस बेड का आईसीयू वार्ड बनाया गया है लेकिन कुछ दिन संचालित करने के बाद व्यवस्था फेल हो गई। 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट अभी निर्माणाधीन अवस्था में हैं। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।