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Basti News: मौज में गुरुजी...स्कूल में पढ़ाने के बजाय कार्यालयों में पूरी कर ड्यूटी
Sun, 23 Nov 2025 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 23 Nov 2025 02:01 AM IST
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बस्ती। बेसिक शिक्षा विभाग में बच्चों की पढ़ाई के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। गुरुजी स्कूलों में पढ़ाने के बजाय मौज काट रहे हैं। बीएसए भवन से ब्लॉक स्तर पर बीआरसी कार्यालय तक इनकी भरमार हो गई है। तनख्वाह मूल तैनाती वाले विद्यालय से निर्गत हो रही है और काम बीएसए एवं बीआरसी कार्यालय में किया जा रहा है। जानकार बताते हैं यह सब अधिकारियों की रहमोकरम पर हो रहा है।
शिक्षा निदेशालय से कार्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता खत्म करने आदेश आए कई महीने बीत गए। लेकिन, यह अमल में अभी तक नहीं आया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों के चहेते शिक्षकों की ड्यूटी स्कूलों के बजाय कार्यालयों में ही पूरी हो जा रही है। गुरुजी को बाबूगिरी करने में खूब मजा भी आ रहा है। कई शिक्षक तो पिछले एक दशक से अपने मूल तैनाती वाले विद्यालय का मुंह नहीं देखे हैं। वह नियमित कार्यालयों में ऐसे पहुंचते हैं कि तमाम नए शिक्षक एवं आगंतुक उनकी पहचान कार्यालय लिपिक के रूप में ही करते हैं।
बीएसए कार्यालय के विभिन्न अनुभाग और पटल पर तैनात बाबुओं के शार्गिद के रूप में एक दर्जन शिक्षक संबद्धता के आधार पर ड्यूटी बजा रहे हैं। यह शिक्षक बाबुओं की तरह बाकायदे कार्यालयों की फाइल सहेजने से लेकर अधिकारियों के पास पहुंचकर दस्तखत कराने तक का कार्य संभाल रहे हैं। अनजान लोग इन्हें बाबू के रूप में ही जानते पहचानते हैं। जानकारों के अनुसार शिक्षकों को देयक, अवकाश एवं अन्य विभागीय कार्यों के लिए बाबुओं के बजाय इन्हीं का मनुहार करना पड़ता है। अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी मौन हैं।
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बीआरसी कार्यालयों में भी संबद्ध हैं कई शिक्षक
जिले के 14 ब्लॉकों में बीआरसी कार्यालय संचालित है। यहां खंड शिक्षाधिकारी के नेतृत्व में विभागीय व्यवस्था का संचालन किया जाता है। प्रत्येक बीआरसी कार्यालय में किसी न किसी अनुभाग में ऊंची रसूख रखने वाले चार से पांच शिक्षक तैनात है। सूत्र बताते हैं कि इन कार्यालयों में यह शिक्षक एक से दो घंटे कार्य करने का रस्म निभाने के बाद चलते बनते हैं। अधिकारियों की रहमोकरम ऐसी कि इनकी तनख्वाह भी नियमित मूल तैनाती वाले विद्यालय से आहरित होती रहती है।
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कोट
सभी शिक्षकों की संबद्धता खत्म कर दी गई है। सभी को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय में पहुंचकर शिक्षण कार्य करें। यदि कोई लापरवाही करेगा तो कार्रवाई भी की जाएगी। वैसे कार्यालयों में दिखने वाले शिक्षक एआरपी और एसआरजी का दायित्व संभालने वाले लोग हैं। उनका भ्रमण का कार्य है। इसलिए दिखाई पड़ते हैं।
-अनूप कुमार तिवारी, बीएसए।
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शिक्षा निदेशालय से कार्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता खत्म करने आदेश आए कई महीने बीत गए। लेकिन, यह अमल में अभी तक नहीं आया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों के चहेते शिक्षकों की ड्यूटी स्कूलों के बजाय कार्यालयों में ही पूरी हो जा रही है। गुरुजी को बाबूगिरी करने में खूब मजा भी आ रहा है। कई शिक्षक तो पिछले एक दशक से अपने मूल तैनाती वाले विद्यालय का मुंह नहीं देखे हैं। वह नियमित कार्यालयों में ऐसे पहुंचते हैं कि तमाम नए शिक्षक एवं आगंतुक उनकी पहचान कार्यालय लिपिक के रूप में ही करते हैं।
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बीएसए कार्यालय के विभिन्न अनुभाग और पटल पर तैनात बाबुओं के शार्गिद के रूप में एक दर्जन शिक्षक संबद्धता के आधार पर ड्यूटी बजा रहे हैं। यह शिक्षक बाबुओं की तरह बाकायदे कार्यालयों की फाइल सहेजने से लेकर अधिकारियों के पास पहुंचकर दस्तखत कराने तक का कार्य संभाल रहे हैं। अनजान लोग इन्हें बाबू के रूप में ही जानते पहचानते हैं। जानकारों के अनुसार शिक्षकों को देयक, अवकाश एवं अन्य विभागीय कार्यों के लिए बाबुओं के बजाय इन्हीं का मनुहार करना पड़ता है। अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी मौन हैं।
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बीआरसी कार्यालयों में भी संबद्ध हैं कई शिक्षक
जिले के 14 ब्लॉकों में बीआरसी कार्यालय संचालित है। यहां खंड शिक्षाधिकारी के नेतृत्व में विभागीय व्यवस्था का संचालन किया जाता है। प्रत्येक बीआरसी कार्यालय में किसी न किसी अनुभाग में ऊंची रसूख रखने वाले चार से पांच शिक्षक तैनात है। सूत्र बताते हैं कि इन कार्यालयों में यह शिक्षक एक से दो घंटे कार्य करने का रस्म निभाने के बाद चलते बनते हैं। अधिकारियों की रहमोकरम ऐसी कि इनकी तनख्वाह भी नियमित मूल तैनाती वाले विद्यालय से आहरित होती रहती है।
कोट
सभी शिक्षकों की संबद्धता खत्म कर दी गई है। सभी को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय में पहुंचकर शिक्षण कार्य करें। यदि कोई लापरवाही करेगा तो कार्रवाई भी की जाएगी। वैसे कार्यालयों में दिखने वाले शिक्षक एआरपी और एसआरजी का दायित्व संभालने वाले लोग हैं। उनका भ्रमण का कार्य है। इसलिए दिखाई पड़ते हैं।
-अनूप कुमार तिवारी, बीएसए।