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Basti News: ग्रीन जोन की जमीन पर बना लिया आशियाना, बदल सकता है बीडीए का पैमाना
Sun, 27 Aug 2023 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 27 Aug 2023 12:27 AM IST
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बस्ती। बीडीए के मानचित्र में चिह्नित ग्रीन जोन या पार्कों की जमीन पर बड़े पैमाने पर निर्माण हुए हैं। हाल के सर्वे में इस तथ्य का खुलासा हुआ है। जीआईएस प्लेटफाॅर्म पर सेटेलाइट इमेजनरी के माध्यम से प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 16 स्थान पार्क या ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है। जिनका क्षेत्रफल 1096.54 हेक्टेयर है। सर्वे के दौरान पता चला कि इसमें से 35 प्रतिशत हिस्से में निर्माण हो चुका है। कुछ आशियाने तो बाकायदा मानचित्र स्वीकृति कराने के बाद बनाए गए हैं, तो कुछ बिना मानचित्र के ही तैयार हुए हैं।
बीडीए नए सिरे से इन मकानों की गणना में जुटा है। इसके साथ ही यह भी मंथन शुरू हो गया है कि प्राधिकरण क्षेत्र के ग्रीन जोन का या तो पैमाना बदला जाए या फिर नए रिक्त स्थान को ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित किया जाए। प्राधिकरण के गठन के समय वर्ष-2016 में पहली महायोजना तैयार की गई थी। इसमें नगर पालिका समेत 69 गांव शामिल किए गए थे। उस समय बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किलोमीटर निर्धारित हुआ था। मगर बीडीए प्रभावी होने में दो साल का विलंब हो गया। इस अवधि में विनियमित क्षेत्र से मानचित्रों को स्वीकृति दी गई और निर्माण होता चला गया, जिससे बीडीए के लैंड यूज जमीनों के मानक का पालन नहीं हो सका।
इस महायोजना का मास्टर प्लान वर्ष-2021 में लागू हुआ। मगर तब तक देर हो चुकी थी। ग्रीन जोन या पार्क क्षेत्र की जमीनों पर निर्माण हो चुके थे। इसका असर महायोजना-2031 के मास्टर प्लान पर भी पड़ा है। नए मास्टर प्लान के मुताबिक बीडीए का दायरा 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसमें भारत सरकार के जीआईएस प्लेटफाॅर्म पर सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर नगर पालिका समेत कुल 217 गांवों को शामिल किया गया है। इसमें 1096.54 हेक्टेयर भूमि ग्रीन जोन या पार्क के रूप में चिह्नित की गई है।
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बीडीए नियमावली के अनुसार इस भूमि में किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। मगर धरातलीय सच्चाई इससे इतर है। क्षेत्रवार जिन जगहों को ग्रीन जोन या पार्क के रूप में चिह्नित किया गया है, वर्तमान में वहां निर्माण है। बीडीए के सर्वे में यह असलियत खुद उजागर हुई है। सर्वे रिपोर्ट में ग्रीन जोन में 35 प्रतिशत निर्माण दर्ज किया गया है। भवनों के गणना का कार्य अभी चल रहा है, जिसमें मानचित्र स्वीकृत कराकर बनाए गए या बिना मानचित्र के बनाए गए भवन भी चिह्नित किए जा रहे हैं।
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कुल 16 जगहों पर पार्क के रूप में ग्रीन जोन हुए हैं चिह्नित
बीडीए के मानचित्र में कुल 16 जगहों पर पार्क के रूप में ग्रीन जोन चिह्नित हुए हैं। इसमें गिदही पाॅवर हाउस के पीछे, बस्ती खास, छियुलिया, लखनऊरा, नरहरिया, विशुनपुरवा, खौरहवा, खीरीघाट, लौकियहवा, एपीएन के पीछे, मड़वानगर, मिश्रौलिया, भूअर, अमहट, ढोरिका, बड़ार में पार्क चिह्नित हुए हैं। इन जगहों पर अधिकांश पार्क की जमीनों में निर्माण हो चुके हैं। जिन्हें भविष्य में पार्क के रूप में संवारा नहीं जा सकता है।
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विनियमित क्षेत्र से स्वीकृति हुआ था मानचित्र
ग्रीन जोन की जमीनों में काश्तकारों ने पहले ही मानचित्र स्वीकृत कराकर निर्माण कर लिया है। अब प्राधिकरण को यह सच्चाई न उगलते बन रही है और न ही निगलते। काश्तकारों पर भी किसी तरह के कार्रवाई की गुंजाइश नहीं बन पा रही है। क्योंकि ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित जमीन काश्तकारों की ही है। साथ ही उनके मकान का नक्शा भी पास है। इसलिए बीडीए नई राह की तलाश में है।
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नदी और हाईवे के किनारे ग्रीन बेल्ट चिह्नित
प्राधिकरण क्षेत्र में पड़ने वाले हाईवे और कुआनों नदी के किनारे दोनों तरफ 87.5 मीटर की दूरी तक ग्रीन बेल्ट चिह्नित हुई है। यहां भी निर्माण प्रतिबंधित है। मगर कुछ जगहाें पर काश्तकारों ने ग्रीन बेल्ट में चिह्नित अपने भूखंड पर निर्माण करा लिया है। शत प्रतिशत यह भूमि भी बीडीए संरक्षित नहीं कर सकी है।
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सर्वे रिपोर्ट के साथ पैमाना बदलने की आजमाइश
सर्वे के साथ ग्रीन जोन के पैमाना बदलने की आजमाइश शुरू हो गई है। ग्रीन जोन का सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के बाद प्राधिकरण समिति उच्च स्तर पर या तो ग्रीन जोन का पैमाना बदलने का सुझाव पेश करेगी या नए सिरे से ग्रीन जोन चिह्नित करने की सिफारिश की जा सकती है। इसके अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है। फिलहाल यह अमल में लाया जाएगा या नहीं इसको शासन तय करेगा।
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पार्क के रूप में चिह्नित जमीनों में 35 प्रतिशत निर्माण पाया गया है। सर्वे कार्य अभी चल रहा है। भवनों की गणना के बाद रिपोर्ट उच्च स्तर पर प्रेषित की जाएगी। प्राधिकरण समिति परिस्थितियों अनुसार सुझाव दे सकती है। शासन स्तर पर ही कोई निर्णय होगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।
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बीडीए नए सिरे से इन मकानों की गणना में जुटा है। इसके साथ ही यह भी मंथन शुरू हो गया है कि प्राधिकरण क्षेत्र के ग्रीन जोन का या तो पैमाना बदला जाए या फिर नए रिक्त स्थान को ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित किया जाए। प्राधिकरण के गठन के समय वर्ष-2016 में पहली महायोजना तैयार की गई थी। इसमें नगर पालिका समेत 69 गांव शामिल किए गए थे। उस समय बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किलोमीटर निर्धारित हुआ था। मगर बीडीए प्रभावी होने में दो साल का विलंब हो गया। इस अवधि में विनियमित क्षेत्र से मानचित्रों को स्वीकृति दी गई और निर्माण होता चला गया, जिससे बीडीए के लैंड यूज जमीनों के मानक का पालन नहीं हो सका।
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इस महायोजना का मास्टर प्लान वर्ष-2021 में लागू हुआ। मगर तब तक देर हो चुकी थी। ग्रीन जोन या पार्क क्षेत्र की जमीनों पर निर्माण हो चुके थे। इसका असर महायोजना-2031 के मास्टर प्लान पर भी पड़ा है। नए मास्टर प्लान के मुताबिक बीडीए का दायरा 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसमें भारत सरकार के जीआईएस प्लेटफाॅर्म पर सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर नगर पालिका समेत कुल 217 गांवों को शामिल किया गया है। इसमें 1096.54 हेक्टेयर भूमि ग्रीन जोन या पार्क के रूप में चिह्नित की गई है।
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बीडीए नियमावली के अनुसार इस भूमि में किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। मगर धरातलीय सच्चाई इससे इतर है। क्षेत्रवार जिन जगहों को ग्रीन जोन या पार्क के रूप में चिह्नित किया गया है, वर्तमान में वहां निर्माण है। बीडीए के सर्वे में यह असलियत खुद उजागर हुई है। सर्वे रिपोर्ट में ग्रीन जोन में 35 प्रतिशत निर्माण दर्ज किया गया है। भवनों के गणना का कार्य अभी चल रहा है, जिसमें मानचित्र स्वीकृत कराकर बनाए गए या बिना मानचित्र के बनाए गए भवन भी चिह्नित किए जा रहे हैं।
कुल 16 जगहों पर पार्क के रूप में ग्रीन जोन हुए हैं चिह्नित
बीडीए के मानचित्र में कुल 16 जगहों पर पार्क के रूप में ग्रीन जोन चिह्नित हुए हैं। इसमें गिदही पाॅवर हाउस के पीछे, बस्ती खास, छियुलिया, लखनऊरा, नरहरिया, विशुनपुरवा, खौरहवा, खीरीघाट, लौकियहवा, एपीएन के पीछे, मड़वानगर, मिश्रौलिया, भूअर, अमहट, ढोरिका, बड़ार में पार्क चिह्नित हुए हैं। इन जगहों पर अधिकांश पार्क की जमीनों में निर्माण हो चुके हैं। जिन्हें भविष्य में पार्क के रूप में संवारा नहीं जा सकता है।
विनियमित क्षेत्र से स्वीकृति हुआ था मानचित्र
ग्रीन जोन की जमीनों में काश्तकारों ने पहले ही मानचित्र स्वीकृत कराकर निर्माण कर लिया है। अब प्राधिकरण को यह सच्चाई न उगलते बन रही है और न ही निगलते। काश्तकारों पर भी किसी तरह के कार्रवाई की गुंजाइश नहीं बन पा रही है। क्योंकि ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित जमीन काश्तकारों की ही है। साथ ही उनके मकान का नक्शा भी पास है। इसलिए बीडीए नई राह की तलाश में है।
नदी और हाईवे के किनारे ग्रीन बेल्ट चिह्नित
प्राधिकरण क्षेत्र में पड़ने वाले हाईवे और कुआनों नदी के किनारे दोनों तरफ 87.5 मीटर की दूरी तक ग्रीन बेल्ट चिह्नित हुई है। यहां भी निर्माण प्रतिबंधित है। मगर कुछ जगहाें पर काश्तकारों ने ग्रीन बेल्ट में चिह्नित अपने भूखंड पर निर्माण करा लिया है। शत प्रतिशत यह भूमि भी बीडीए संरक्षित नहीं कर सकी है।
सर्वे रिपोर्ट के साथ पैमाना बदलने की आजमाइश
सर्वे के साथ ग्रीन जोन के पैमाना बदलने की आजमाइश शुरू हो गई है। ग्रीन जोन का सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के बाद प्राधिकरण समिति उच्च स्तर पर या तो ग्रीन जोन का पैमाना बदलने का सुझाव पेश करेगी या नए सिरे से ग्रीन जोन चिह्नित करने की सिफारिश की जा सकती है। इसके अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है। फिलहाल यह अमल में लाया जाएगा या नहीं इसको शासन तय करेगा।
पार्क के रूप में चिह्नित जमीनों में 35 प्रतिशत निर्माण पाया गया है। सर्वे कार्य अभी चल रहा है। भवनों की गणना के बाद रिपोर्ट उच्च स्तर पर प्रेषित की जाएगी। प्राधिकरण समिति परिस्थितियों अनुसार सुझाव दे सकती है। शासन स्तर पर ही कोई निर्णय होगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।