{"_id":"614b59248ebc3effd244d0d9","slug":"government-canteen-was-close-of-20-years-basti-news-gkp4101916197","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो दशक से बंद चल रही बस्ती बस अड्डे की सरकारी कैंटीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो दशक से बंद चल रही बस्ती बस अड्डे की सरकारी कैंटीन
विज्ञापन
दो दशक से बंद चल रही बस्ती बस अड्डे की सरकारी कैंटीन
- कैंटीन न संचालित होने से यात्रियों-रोडवेज कर्मियों को होती है परेशानी
- रोडवेज परिसर के बाहर मंहगे दामों पर भोजन करने को मजबूर हैं लोग
- कई बार हो चुकी है नीलामी फिर भी मंहगे भाड़े से नहीं लग सकी बोली
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती बस अड्डा परिसर में दो दशक पहले संचालित कैंटीन (भोजन प्रतिष्ठान) बंद पड़ा है। इससे यात्रियों के साथ ही रोडवेज कर्मियों को भी परेशान होना पड़ रहा है। रोडवेज प्रशासन इस बड़ी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है, इससे यहां पहुंचने वाले यात्रियों व अन्य लोगों को भूख मिटाने के लिए महंगे होटलों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बस अड्डे पर दशकों से संचालित भोजन-नाश्ता व चाय-पानी की कैंटीनों पर उस समय ग्रहण लग गया, जब वर्ष 2000-2001 में इन कैंटीनों को चलाने के लिए परिवहन निगम ने अचानक भाड़े की कीमत कई गुना बढ़ा दिया। नतीजा हुआ कि दोनों कैंटीनों में ताले लग गए। इसके लिए हर साल नीलामी का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया, लेकिन महंगे किराए के कारण नतीजा शून्य रहा। साल 2016 में किसी तरह से चायपानी की कैंटीन की बोली तो लग गई और वह संचालित भी हो गई, लेकिन भोजन व नाश्ते की कैंटीन वैसे ही बंद पड़ी है। इससे यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी आसपास के होटलों में जाकर महंगे दामों पर भोजन व नाश्ता करना पड़ रहा है। देवरिया से लखनऊ जा रहे यात्री प्रेम प्रकाश ने बताया कि परिसर के अंदर कैंटीन खोजने पर भी नहीं मिली। ऐसे में बाहर की दुकान से खाने का सामान खरीदना पड़ा। प्रयागराज से सिद्धार्थनगर जा रहे रवि कुमार ने बताया मंगलवार की रात में बस्ती स्टेशन पर पहुंचा। सिद्धार्थनगर की बस मिलने में देर थी। भूख लगी थी, लेकिन रोडवेज की कैंटीन कहीं नहीं दिखी। ऐसे में बाहर खाना खाने को मजबूर होना पड़ा।
---
कैंटीन संचालित करने के लिए भवन के किराए का निर्धारण निगम मुख्यालय से होता है। किराया कम करने व कैंटीन संचालित करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जैसा निर्देश होगा, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
- आरपी सिंह, एआरएम, बस्ती डिपो।
विज्ञापन
- कैंटीन न संचालित होने से यात्रियों-रोडवेज कर्मियों को होती है परेशानी
- रोडवेज परिसर के बाहर मंहगे दामों पर भोजन करने को मजबूर हैं लोग
- कई बार हो चुकी है नीलामी फिर भी मंहगे भाड़े से नहीं लग सकी बोली
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती बस अड्डा परिसर में दो दशक पहले संचालित कैंटीन (भोजन प्रतिष्ठान) बंद पड़ा है। इससे यात्रियों के साथ ही रोडवेज कर्मियों को भी परेशान होना पड़ रहा है। रोडवेज प्रशासन इस बड़ी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है, इससे यहां पहुंचने वाले यात्रियों व अन्य लोगों को भूख मिटाने के लिए महंगे होटलों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बस अड्डे पर दशकों से संचालित भोजन-नाश्ता व चाय-पानी की कैंटीनों पर उस समय ग्रहण लग गया, जब वर्ष 2000-2001 में इन कैंटीनों को चलाने के लिए परिवहन निगम ने अचानक भाड़े की कीमत कई गुना बढ़ा दिया। नतीजा हुआ कि दोनों कैंटीनों में ताले लग गए। इसके लिए हर साल नीलामी का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया, लेकिन महंगे किराए के कारण नतीजा शून्य रहा। साल 2016 में किसी तरह से चायपानी की कैंटीन की बोली तो लग गई और वह संचालित भी हो गई, लेकिन भोजन व नाश्ते की कैंटीन वैसे ही बंद पड़ी है। इससे यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी आसपास के होटलों में जाकर महंगे दामों पर भोजन व नाश्ता करना पड़ रहा है। देवरिया से लखनऊ जा रहे यात्री प्रेम प्रकाश ने बताया कि परिसर के अंदर कैंटीन खोजने पर भी नहीं मिली। ऐसे में बाहर की दुकान से खाने का सामान खरीदना पड़ा। प्रयागराज से सिद्धार्थनगर जा रहे रवि कुमार ने बताया मंगलवार की रात में बस्ती स्टेशन पर पहुंचा। सिद्धार्थनगर की बस मिलने में देर थी। भूख लगी थी, लेकिन रोडवेज की कैंटीन कहीं नहीं दिखी। ऐसे में बाहर खाना खाने को मजबूर होना पड़ा।
विज्ञापन
---
कैंटीन संचालित करने के लिए भवन के किराए का निर्धारण निगम मुख्यालय से होता है। किराया कम करने व कैंटीन संचालित करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जैसा निर्देश होगा, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
- आरपी सिंह, एआरएम, बस्ती डिपो।