{"_id":"5af3401b4f1c1b84098b9273","slug":"food-and-breakfast-are-not-available-in-chc","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह माह से ठप है भोजन-नाश्ते की आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह माह से ठप है भोजन-नाश्ते की आपूर्ति
basti
Updated Thu, 10 May 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
indian food
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर्रैया।
सरकार की महत्वाकांक्षी जननी सुरक्षा योजना को विभागीय अधिकारी और ठेकदार मिलकर चूना लगा रहे हैं। सीएचसी पर बने संस्थागत प्रसव केंद्रों पर भर्ती होने वाली मां के आहार को भी वे डकार रहे हैं। सरकार के निर्धारित डाइट के अनुसार मिलने वाला भोजन और नाश्ता कभी भी इनको नहीं मिला। अब तो हालत ये हो गई है कि छह माह से पूरी तरह बंद पड़ी इस योजना के बारे में ठीक से कोई बताने वाला ही नहीं है।
जननी सुरक्षा योजना में प्रसूता को सीएचसी में प्रसव के लिए भर्ती होने पर निशुल्क भोजन और नाश्ते की व्यवस्था है, जिसके लिए बाकायदा टेंडर निकाल कर पंजीकृत फर्म को निर्धारित दर के अनुरूप भोजन, फल, दूध व अंडे देना होता है। सामान्य प्रसव मेँ दो दिन और ऑपरेशन के मामले में पांच दिन तक प्रसूता को नियमित तौर पर भोजन और नाश्ता देने की व्यवस्था बनाई गई है। शासन के निर्देश तो ये भी हैं कि किसी सीएचसी पर किन्हीं कारणों से टेंडर नहीं हुआ या ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए तो भी सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक को वैकल्पिक व्यवस्था बनाते हुए 40 रुपये का दो पैकेट दूध, फल, अंडे, ब्रांडेड ब्रेड व 20 ग्राम मक्खन हर प्रसूता को सीएचसी में भर्ती रहने तक देना होगा। मगर इस योजना में कभी भी निर्धारित मानक के अनुरूप भोजन व नाश्ता प्रसूता को नहीं मिला। वर्ष 2016 और 17 के डाइट रजिस्टर से भी यह तथ्य उजागर हुआ है कि प्रसूता को कभी बिस्कुट तो कभी दो केला और किसी दिन अनार दिया गया है। सूत्रों की मानें तो सीएचसी पर कभी भी किसी प्रसूता को भोजन उपल्ब्ध नहीं कराया गया।
अजानडीह की इन्द्रावती भी प्रसव के लिए सीएचसी में 27 अप्रैल को भर्ती हुईं और इनको पुत्री पैदा हुई। गौहनिया नैपाल सिंह की अनीता भी इसी महीने सीएचसी में भर्ती हुईं। इन्हे पुत्र की प्राप्ति हुई। नगर पंचायत के वार्ड नंबर दस की अमृता सोनी सहित कई प्रसूताएं सीएचसी में भर्ती हुईं और ये सभी मां बन गईं लेकिन किसी को भी योजना में न नाश्ता मिल सका और न भोजन। 12 नवंबर 2017 से बंद पड़ी इस योजना का कोई पुरसाहाल नहीं है। करीब छह माह से बंद पड़ी योजना में हर माह करीब 150 प्रसूता को मिलने वाले भोजन और नाश्ते का लाखों रुपये ठेकेदार और जिम्मेदार डकार गए। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि ठेकेदार के भोजन और नाश्ते की आपूर्ति ठप है। इसकी सूचना मुख्यालय पर दी जा चुकी है। रही बात अपने स्तर से वैकल्पिक व्यवस्था कर दूध और फल आदि देने की तो जब तक सीएमओ स्तर से कोई निर्देश नहीं मिलता तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। सीएमओ डॉ जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि प्रसूताओं को योजना के अनुसार लाभ मिलना चाहिए। हर्रैया सीएचसी पर ठेकेदार के व्यवस्था नहीं करने की जानकारी मिली है। संबधित फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार की महत्वाकांक्षी जननी सुरक्षा योजना को विभागीय अधिकारी और ठेकदार मिलकर चूना लगा रहे हैं। सीएचसी पर बने संस्थागत प्रसव केंद्रों पर भर्ती होने वाली मां के आहार को भी वे डकार रहे हैं। सरकार के निर्धारित डाइट के अनुसार मिलने वाला भोजन और नाश्ता कभी भी इनको नहीं मिला। अब तो हालत ये हो गई है कि छह माह से पूरी तरह बंद पड़ी इस योजना के बारे में ठीक से कोई बताने वाला ही नहीं है।
जननी सुरक्षा योजना में प्रसूता को सीएचसी में प्रसव के लिए भर्ती होने पर निशुल्क भोजन और नाश्ते की व्यवस्था है, जिसके लिए बाकायदा टेंडर निकाल कर पंजीकृत फर्म को निर्धारित दर के अनुरूप भोजन, फल, दूध व अंडे देना होता है। सामान्य प्रसव मेँ दो दिन और ऑपरेशन के मामले में पांच दिन तक प्रसूता को नियमित तौर पर भोजन और नाश्ता देने की व्यवस्था बनाई गई है। शासन के निर्देश तो ये भी हैं कि किसी सीएचसी पर किन्हीं कारणों से टेंडर नहीं हुआ या ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए तो भी सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक को वैकल्पिक व्यवस्था बनाते हुए 40 रुपये का दो पैकेट दूध, फल, अंडे, ब्रांडेड ब्रेड व 20 ग्राम मक्खन हर प्रसूता को सीएचसी में भर्ती रहने तक देना होगा। मगर इस योजना में कभी भी निर्धारित मानक के अनुरूप भोजन व नाश्ता प्रसूता को नहीं मिला। वर्ष 2016 और 17 के डाइट रजिस्टर से भी यह तथ्य उजागर हुआ है कि प्रसूता को कभी बिस्कुट तो कभी दो केला और किसी दिन अनार दिया गया है। सूत्रों की मानें तो सीएचसी पर कभी भी किसी प्रसूता को भोजन उपल्ब्ध नहीं कराया गया।
विज्ञापन
अजानडीह की इन्द्रावती भी प्रसव के लिए सीएचसी में 27 अप्रैल को भर्ती हुईं और इनको पुत्री पैदा हुई। गौहनिया नैपाल सिंह की अनीता भी इसी महीने सीएचसी में भर्ती हुईं। इन्हे पुत्र की प्राप्ति हुई। नगर पंचायत के वार्ड नंबर दस की अमृता सोनी सहित कई प्रसूताएं सीएचसी में भर्ती हुईं और ये सभी मां बन गईं लेकिन किसी को भी योजना में न नाश्ता मिल सका और न भोजन। 12 नवंबर 2017 से बंद पड़ी इस योजना का कोई पुरसाहाल नहीं है। करीब छह माह से बंद पड़ी योजना में हर माह करीब 150 प्रसूता को मिलने वाले भोजन और नाश्ते का लाखों रुपये ठेकेदार और जिम्मेदार डकार गए। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि ठेकेदार के भोजन और नाश्ते की आपूर्ति ठप है। इसकी सूचना मुख्यालय पर दी जा चुकी है। रही बात अपने स्तर से वैकल्पिक व्यवस्था कर दूध और फल आदि देने की तो जब तक सीएमओ स्तर से कोई निर्देश नहीं मिलता तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। सीएमओ डॉ जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि प्रसूताओं को योजना के अनुसार लाभ मिलना चाहिए। हर्रैया सीएचसी पर ठेकेदार के व्यवस्था नहीं करने की जानकारी मिली है। संबधित फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन