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Basti News: पहले पूरी कीजिए फरमाइश...फिर होगी भूमि की पैमाइश
Mon, 08 May 2023 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 08 May 2023 01:22 AM IST
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हर्रैया तहसील।
बस्ती। यदि आपने किसी भूमि का बैनामा कराया है या अपनी पैतृक संपत्ति पर काबिज होना चाहते हैं तो आपको तमाम पापड़ बेलने पड़ेंगे। लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगाने पड़ेंगे। आपने उनकी फरमाइश पूरी कर दी तो पैमाइश हो जाएगी वरना दौड़ते रहिए।
बैनामाशुदा या अनुपयोगी पड़ी पैतृक जमीन को सुरक्षित करने के लिए आप चहारदीवारी या बाड़ लगाने जाएं और कोई आकर रोक दे। कहने लगे कि आप उसकी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में आप की परेशानी बढ़ सकती है। आपको हलके के लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह जमीन की पैमाइश के लिए आपसे कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलझ जाए वरना, तहसील के चक्कर काटते-काटते महीनों गुजर जाएंगे। तहसीलों में ऐसे करीब सात हजार मामले लंबित चल रहे हैं। जिनके निस्तारण के लिए तारीख लग रही है।
तमाम काश्तकारों की पैतृक संपत्ति ऐसे ही पड़ी हुई है। जब वे भूमि पर कब्जा लेने जाते हैं तो कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर अगल-बगल के लोग जमीन पर कब्जा नहीं करने देते हैं। वह अपनी जमीन का हिस्सा बताकर किसी तरह का निर्माण रोक देते हैं। आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। पैमाइश कराकर पहले पत्थर नसब कराइए। तहसील व थाना समाधान दिवस पर अफसरों के आदेश पर कानूनगो व लेखपाल पुलिस बल के साथ भूमि की माप करा देते हैं। यदि मामला खत्म नहीं हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
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45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
- अधिवक्ता सर्वेश दुबे के अनुसार, पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया, तो जल्दी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर में दौड़ते रहेंगे। ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं।
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धारा 24 के नाम से जानी जाती है पक्की पैमाइश
- तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। तीन पथरान (फिक्स प्वाइंट जैसे पुराना कुंआ, मंदिर, भवन, सड़क आदि) के आधार पर पैमाइश की जाती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पूरी की जाती है।
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चर्चा में रहे लेखपालों के घूसखोरी के मामले
- 25 अप्रैल 2023 को सदर तहसील की लेखपाल मुदिता श्रीवास्तव को रंगे हाथ गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता ने गिरफ्तार किया।
- 17 जून 2022 में पैमाइश के लिए घूस लेते समय हर्रैया राजस्व निरीक्षक घनश्याम वर्मा को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता के रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- 25 अगस्त 2022 को सदर तहसील के एक लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया।
- पांच फरवरी 2023 को सदर तहसील में तैनात लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एसडीएम ने उसे निलंबित कर दिया।
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केस-एक
- मई 2022 में पैतृक संपत्ति पर कब्जे के लिए धारा 24 के तहत आवेदन किया। कानूनगो और लेखपाल ने दो महीने बाद पैमाइश कर फील्ड बुक तैयार की। इसके बाद से आज तक न तो पत्थर नसब हुआ और न ही मुझे कब्जा दिलाया गया। कानूनगो की फरमाइश भी पूरी कर चुका हूं। फिर भी आए दिन तहसील के चक्कर काट रहा हूं। -विजेंद्र कुमार, इटवा, हर्रैया
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केस-दो
- पैतृक संपत्ति पर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया है। जब हम अपनी जमीन पर काम कराने गए तो कब्जेदारों ने आपत्ति कर दी। 30 मई 2022 में भूमि की पक्की पैमाइश के लिए धारा 24 के तहत आवेदन किया। अभी तक कच्ची पैमाइश भी नहीं की गई। पूछने पर राजस्वकर्मियों ने बताया कि फाइल गायब हो गई है। एसडीएम से शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -शिवाजीत सिंह, चाईबारी, सदर तहसील
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बैनामाशुदा या अनुपयोगी पड़ी पैतृक जमीन को सुरक्षित करने के लिए आप चहारदीवारी या बाड़ लगाने जाएं और कोई आकर रोक दे। कहने लगे कि आप उसकी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में आप की परेशानी बढ़ सकती है। आपको हलके के लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह जमीन की पैमाइश के लिए आपसे कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलझ जाए वरना, तहसील के चक्कर काटते-काटते महीनों गुजर जाएंगे। तहसीलों में ऐसे करीब सात हजार मामले लंबित चल रहे हैं। जिनके निस्तारण के लिए तारीख लग रही है।
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तमाम काश्तकारों की पैतृक संपत्ति ऐसे ही पड़ी हुई है। जब वे भूमि पर कब्जा लेने जाते हैं तो कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर अगल-बगल के लोग जमीन पर कब्जा नहीं करने देते हैं। वह अपनी जमीन का हिस्सा बताकर किसी तरह का निर्माण रोक देते हैं। आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। पैमाइश कराकर पहले पत्थर नसब कराइए। तहसील व थाना समाधान दिवस पर अफसरों के आदेश पर कानूनगो व लेखपाल पुलिस बल के साथ भूमि की माप करा देते हैं। यदि मामला खत्म नहीं हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
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45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
- अधिवक्ता सर्वेश दुबे के अनुसार, पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया, तो जल्दी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर में दौड़ते रहेंगे। ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं।
धारा 24 के नाम से जानी जाती है पक्की पैमाइश
- तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। तीन पथरान (फिक्स प्वाइंट जैसे पुराना कुंआ, मंदिर, भवन, सड़क आदि) के आधार पर पैमाइश की जाती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पूरी की जाती है।
चर्चा में रहे लेखपालों के घूसखोरी के मामले
- 25 अप्रैल 2023 को सदर तहसील की लेखपाल मुदिता श्रीवास्तव को रंगे हाथ गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता ने गिरफ्तार किया।
- 17 जून 2022 में पैमाइश के लिए घूस लेते समय हर्रैया राजस्व निरीक्षक घनश्याम वर्मा को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता के रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- 25 अगस्त 2022 को सदर तहसील के एक लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया।
- पांच फरवरी 2023 को सदर तहसील में तैनात लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एसडीएम ने उसे निलंबित कर दिया।
केस-एक
- मई 2022 में पैतृक संपत्ति पर कब्जे के लिए धारा 24 के तहत आवेदन किया। कानूनगो और लेखपाल ने दो महीने बाद पैमाइश कर फील्ड बुक तैयार की। इसके बाद से आज तक न तो पत्थर नसब हुआ और न ही मुझे कब्जा दिलाया गया। कानूनगो की फरमाइश भी पूरी कर चुका हूं। फिर भी आए दिन तहसील के चक्कर काट रहा हूं। -विजेंद्र कुमार, इटवा, हर्रैया
केस-दो
- पैतृक संपत्ति पर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया है। जब हम अपनी जमीन पर काम कराने गए तो कब्जेदारों ने आपत्ति कर दी। 30 मई 2022 में भूमि की पक्की पैमाइश के लिए धारा 24 के तहत आवेदन किया। अभी तक कच्ची पैमाइश भी नहीं की गई। पूछने पर राजस्वकर्मियों ने बताया कि फाइल गायब हो गई है। एसडीएम से शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -शिवाजीत सिंह, चाईबारी, सदर तहसील