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नियमों के जाल में उलझे किसान, कैसे बिके धान

Sun, 06 Nov 2022 11:49 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 11:49 PM IST
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Farmers entangled in the web of rules, how paddy is sold
नियमों के जाल में उलझे किसान, कैसे बिके धान
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बस्ती। धान खरीद में कई नियम किसानों के लिए बाधा बनने लगे हैं। प्रक्रिया इतनी जटिल है कि किसान इसमें उलझकर रह गए हैं। ऐसे में थककर वे अपना धान व्यापारियों के हाथों बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं। यही कारण है कि किसान सरकारी केंद्रों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। कई खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।
प्रगतिशील किसान नरेंद्र पांडेय का कहना है कि इस बार कई नियम लागू किए गए हैं, जिसके कारण काफी दिक्कत हो रही है। पहला नियम पंजीकरण कराना, दूसरा खतौनी सत्यापन कराना, तीसरा हाइब्रिड धान, चौथा खतौनी पर दर्ज जोत में सिर्फ 35 प्रतिशत हाइब्रिड की खरीद और पांचवां नियम हाइब्रिड धान बीज खरीद का बिल दिखाना अनिवार्य है।
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ये नियम किसानों के लिए परेशानी की वजह बन गए हैं। पंजीकरण कराने के बाद सत्यापन के लिए किसान तहसील के चक्कर काट रहे हैं। सख्त नियमों के चलते हाइब्रिड धान की बुवाई कर किसान पछता रहे हैं, जबकि व्यापारी और राइस मिल मालिक इसी का आसानी से फायदा उठाने के लिए तत्पर हैं।
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यही कारण है कि कई खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है। अभी तक 38 केंद्रों में से किसी पर भी बोहनी तक नहीं हुई है। जिले में खरीद का लक्ष्य एक लाख 65 हजार मीट्रिक टन का है। वहीं जिम्मेदार भी शासन के बनाए गए नियमों का हवाला देकर हाथ खड़े कर रहे हैं।
बहादुरपुर ब्लॉक के नरायनपुर निवासी किसान कौशलेंद्र ने बताया कि पिछले वर्ष 160 क्विंटल धान क्रय केंद्र पर बेचे थे। इस बार इतने ज्यादा नियम हैं कि सरकारी केंद्र पर धान बेच पाना मुश्किल है।
इसी ब्लॉक के अरबा पर निवासी किसान नागेंद्र सिंह ने बताया कि सरकारी केंद्र पर टेढे़ नियमों के कारण शुरू की कटाई का 12 क्विंटल धान व्यापारी को बेच चुका हूं। बाकी भी व्यापारियों को ही बेचने की सोच रहे हैं।

तय नियमों के तहत खरीद की तैयारी पूरी
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय का कहना है कि धान खरीद की सभी तैयारियां कर ली गई हैं। सभी 38 केंद्रों पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। शासन स्तर से जो नियम तय किए गए हैं, उसके अनुरूप खरीद कराई जानी है। चूंकि, धान की कटाई देर से हो रही है, इस लिए अभी किसान अभी उपज लेकर बेचने नहीं आ रहे हैं।
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