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Basti News: मियाद बीतने के साढ़े तीन माह बाद भी 56 अस्पतालों ने नहीं कराया नवीनीकरण

Fri, 14 Aug 2026 01:01 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:01 AM IST
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Even after three and a half months of the expiry of the deadline, 56 hospitals did not get the renewal done.
जिला महिला अस्पताल के सामने सकरी गली में संचालित हैं अस्पताल व क्लीनिक संवाद - फोटो : 1
बस्ती। जिले में 56 निजी अस्पताल और क्लीनिक ऐसे हैं, जिनके लाइसेंस की वैधता चार माह पहले खत्म हो चुकी है और उन्होंने अब तक नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। विभाग ने इन्हें समय देने के साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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विभाग के अनुसार जिले के 295 अस्पतालों के पंजीकरण के लिए आवेदन आए थे। इनमें 126 के लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें लाइसेंस जारी किया जा चुका है। वहीं, 56 अस्पतालों के आवेदन समय से प्रक्रिया पूरी न होने के कारण पोर्टल से हट गए।
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सीएमओ डॉ. राजीव निगम के अनुसार लाइसेंस नवीनीकरण के लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया गया था। इसके बावजूद 56 संचालकों ने नवीनीकरण में रुचि नहीं दिखाई। विभाग ने इन्हें अंतिम चेतावनी दी है। इसके बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों को बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई निजी अस्पतालों में पंजीकरण के साथ ही जरूरी मानकों की भी अनदेखी सामने आ रही है। इनमें फायर सेफ्टी की अधूरी व्यवस्था, पार्किंग का अभाव, इमरजेंसी निकास नहीं होना और संकरी सीढ़ियों से बहुमंजिला भवनों में मरीजों को भर्ती करना शामिल है। ऐसे में आग या किसी अन्य आपात स्थिति में बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
चौकाने वाली बात यह है कि सीएमओ कार्यालय को इसकी जानकारी होने के बाद भी अवैध तरह से संचालित इन अस्पताल संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सूत्रों की माने तो इनके संरक्षक विभाग में ही मौजूद हैं।
विभाग में कार्यरत यह मददगार कार्रवाई से जुड़ी हर खबर इन्हें पहले से ही अपडेट कर देते हैं। ऐसे में जांच टीम को मौके पर इन अस्पतालों के गेट पर ताला पड़ा मिलता है। टीम के वापस जाने पर ताला खोलकर अस्पताल का संचालन फिर शुरू हो जाता है।
महज नोटिस तक सिमटी कार्रवाई : बिना वैध लाइसेंस अस्पताल या क्लीनिक संचालित पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई कई मामलों में नोटिस तक ही सीमित रह जाती है। अधिकारियों का तर्क होता है कि संचालक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है।
इसके चलते तत्काल सीलिंग की कार्रवाई नहीं हो पाती। करीब 15 दिन पहले भानपुर में दो सेंटरों की जांच की गई थी। संचालकों से जवाब मांगा गया, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। करीब एक माह पहले कुदरहा और बनकटी क्षेत्र के दो क्लीनिकों पर भी छापा मारा गया था। दोनों संचालकों को नोटिस दिया गया, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया। दोनों क्लीनिक सील हैं।

करीब छह माह पहले हरदिया के पास एक क्लीनिक को भी सील किया गया था। संचालक की ओर से जवाब नहीं दिए जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ ऐसे क्लीनिक नाम बदलकर दोबारा संचालित किए जा रहे हैं।
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