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प्रमाण पत्र दो कि सौ साल होगी इमारत की उम्र
basti
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:22 AM IST
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निरीक्षण करते डीएम डॉ राजशेखर।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। मंगलवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने कलेक्ट्रेट के भवन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहीं प्लास्टर उखड़ते देखा तो कहीं पानी की टोंटी ही नहीं मिली। 11.80 करोड़ लगाकर तैयार कराए जा रहे इस नए भवन में इस्तेमाल की जा रही ईंटें घटिया दर्जे का पाकर डीएम भड़क उठे। पूरी रकम प्राप्त करने के बावजूद कार्य सिर्फ 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण मिलने पर डीएम ने निर्माण एजेंसी समाज कल्याण निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक को निर्देशित किया कि वे 100 ईयर लाइफ प्रमाण पत्र दें।
असल में मंगलवार को जांच करने के दौरान एकाएक डीएम ईंटों की लाट के पास रुके। उसमें की दो ईंट उठाकर हल्के से ठोंका तो दोनों ईंट भरभरा कर टूट गईं। इस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए प्रत्येक लॉट की ईंट की गुणवत्ता जांच के बाद आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। डीएम ने परियोजना प्रबंधक समाज कल्याण निर्माण निगम को नोटिस भी जारी किया। बता दें कि पुराना कलेक्ट्रेट भवन वर्ष 1856 में बनाया गया था। पुराना भवन 160 साल से अधिक अवधि पूरी करने के बाद इमारत को कंडम अथवा निष्प्रयोज्य घोषित किया गया था। जब तक नई बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं हो जाती तब तक पुरानी बिल्डिंग में न्यूनतम रखरखाव और मरम्मत कराने के बाद उपयोग किया जा रहा है।
ईको-फ्रेंडली कलेक्ट्रेट में सोलर से चलेगा सिस्टम
बस्ती। नया कलेक्ट्रेट सोलर कलेक्ट्रेट के रूप में विकसित किया जा रहा है। पूर्णतया पर्यावरण अनुकूल परिसर इनवायरमेंट फ्रेंडली कैंपस जैसा होगा। जिसमें पांच सौ पौधे लगाकर हर संभव ग्रीन बेल्ट तैयार किया जाएगा। पूरे भवन की रोशनी और उपकरणों का संचालन सौर्य ऊर्जा सिस्टम से होगा। गलियारे और कमरे प्राकृतिक वायु अनुकूलन से युक्त होगा।
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मंगलवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने निर्माणाधीन नवीन कलेक्ट्रेट के निरीक्षण के दौरान बताया कि सीएसआर मद से एक बड़ी सौर प्रणाली स्थापित की जाएगी। जिसके जरिए कार्यालय व संभागों के सभी रोशनी, पंखे, कंप्यूटर इत्यादि संचालित किए जाएंगे। डीएम ने नेडा के परियोजना अधिकारी से 15 अगस्त 2018 तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य को 31 दिसंबर तक पूरा करने के लिए कहा गया है। पुराना कलेक्ट्रेट भवन वर्ष 1856 में बनाया गया था। पुराना भवन 160 साल से अधिक अवधि पूरी करने के बाद इमारत को कंडम अथवा निष्प्रयोज्य घोषित किया गया था। जब तक नई बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं हो जाती तब तक पुरानी बिल्डिंग में न्यूनतम रखरखाव और मरम्मत कराने के बाद उपयोग किया जा रहा है। भवन का निर्माण 11.80 करोड़ की लागत से कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण एजेंसी समाज कल्याण निर्माण निगम (एसकेएनएन) पूरा भुगतान प्राप्त करने के बाद सिर्फ 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया।
नये वर्ष पर उद्घाटन होगा
पहले चरण में हवालात बिल्डिंग, डीएम कार्यालय, सार्वजनिक शौचालय और कैंटीन शामिल हैं। 18 महीने पहले हवालात बिल्डिंग तैयार करने के बावजूद कुछ मरम्मत और रखरखाव के मुद्दों के कारण हैंडओवर और अधिग्रहण कार्य लंबित है। डीएम ने एडीएम और समाज कल्याण निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक से दिनों में हैंडओवर अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए, बशर्ते गुणवत्ता दुरुस्त हो। डीएम चैम्बर, टॉयलेट ब्लॉक और कैंटीन एरिया की कार्य प्रगति आधी पाए जाने पर डीएम ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। निर्माण निगम को 31 दिसंबर तक नजरत को हैंडओवर का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि 1 जनवरी 2019 (नये साल पर) उद्घाटन किया जाएगा।
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असल में मंगलवार को जांच करने के दौरान एकाएक डीएम ईंटों की लाट के पास रुके। उसमें की दो ईंट उठाकर हल्के से ठोंका तो दोनों ईंट भरभरा कर टूट गईं। इस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए प्रत्येक लॉट की ईंट की गुणवत्ता जांच के बाद आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। डीएम ने परियोजना प्रबंधक समाज कल्याण निर्माण निगम को नोटिस भी जारी किया। बता दें कि पुराना कलेक्ट्रेट भवन वर्ष 1856 में बनाया गया था। पुराना भवन 160 साल से अधिक अवधि पूरी करने के बाद इमारत को कंडम अथवा निष्प्रयोज्य घोषित किया गया था। जब तक नई बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं हो जाती तब तक पुरानी बिल्डिंग में न्यूनतम रखरखाव और मरम्मत कराने के बाद उपयोग किया जा रहा है।
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ईको-फ्रेंडली कलेक्ट्रेट में सोलर से चलेगा सिस्टम
बस्ती। नया कलेक्ट्रेट सोलर कलेक्ट्रेट के रूप में विकसित किया जा रहा है। पूर्णतया पर्यावरण अनुकूल परिसर इनवायरमेंट फ्रेंडली कैंपस जैसा होगा। जिसमें पांच सौ पौधे लगाकर हर संभव ग्रीन बेल्ट तैयार किया जाएगा। पूरे भवन की रोशनी और उपकरणों का संचालन सौर्य ऊर्जा सिस्टम से होगा। गलियारे और कमरे प्राकृतिक वायु अनुकूलन से युक्त होगा।
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मंगलवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने निर्माणाधीन नवीन कलेक्ट्रेट के निरीक्षण के दौरान बताया कि सीएसआर मद से एक बड़ी सौर प्रणाली स्थापित की जाएगी। जिसके जरिए कार्यालय व संभागों के सभी रोशनी, पंखे, कंप्यूटर इत्यादि संचालित किए जाएंगे। डीएम ने नेडा के परियोजना अधिकारी से 15 अगस्त 2018 तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य को 31 दिसंबर तक पूरा करने के लिए कहा गया है। पुराना कलेक्ट्रेट भवन वर्ष 1856 में बनाया गया था। पुराना भवन 160 साल से अधिक अवधि पूरी करने के बाद इमारत को कंडम अथवा निष्प्रयोज्य घोषित किया गया था। जब तक नई बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं हो जाती तब तक पुरानी बिल्डिंग में न्यूनतम रखरखाव और मरम्मत कराने के बाद उपयोग किया जा रहा है। भवन का निर्माण 11.80 करोड़ की लागत से कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण एजेंसी समाज कल्याण निर्माण निगम (एसकेएनएन) पूरा भुगतान प्राप्त करने के बाद सिर्फ 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया।
नये वर्ष पर उद्घाटन होगा
पहले चरण में हवालात बिल्डिंग, डीएम कार्यालय, सार्वजनिक शौचालय और कैंटीन शामिल हैं। 18 महीने पहले हवालात बिल्डिंग तैयार करने के बावजूद कुछ मरम्मत और रखरखाव के मुद्दों के कारण हैंडओवर और अधिग्रहण कार्य लंबित है। डीएम ने एडीएम और समाज कल्याण निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक से दिनों में हैंडओवर अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए, बशर्ते गुणवत्ता दुरुस्त हो। डीएम चैम्बर, टॉयलेट ब्लॉक और कैंटीन एरिया की कार्य प्रगति आधी पाए जाने पर डीएम ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। निर्माण निगम को 31 दिसंबर तक नजरत को हैंडओवर का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि 1 जनवरी 2019 (नये साल पर) उद्घाटन किया जाएगा।