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Basti News: चांद दिखने पर झूमे अकीदतमंद... पढ़ी गई तरावीह की नमाज
Sun, 02 Mar 2025 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 02 Mar 2025 12:24 AM IST
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बस्ती। मुस्लिम समुदाय को जिस घड़ी का बेसब्री से इंतजार था, शनिवार शाम को वह आ गई। चांद का दीदार होते ही अकीदतमंद खुशी से झूम उठे।
मस्जिदों-ईदगाहों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। एक-दूसरे को रमजान माह की बधाई दी। इफ्तार के सामान की खरीदारी के साथ ही बाजारों की रौनक बढ़ गई। सादगी, शांति और अमन चैन का महीना रमजान बरकत का महीना है।
उधर, बाजार में भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे। लोगों ने सेवई, खजूर, टोपी व इत्र की खरीदारी की। मस्जिदों में साफ-सफाई हुई। देर रात तक बाजार में चहल-पहल रही। साथ ही घर-घर में कुरान की तिलावत का दौर भी शुरू हो गया।
घर हो या मस्जिद, हर जगह सिर्फ खुदा की इबादत की बात होने लगी है। नमाज में शरीक होने के लिए अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। छोटी बड़ी सभी मस्जिदों में नमाजियों की खासी तादाद दिखी। वहीं नन्हें मुन्नों में भी खुदा की इबादत का जज्बा दिखा।
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इमानदारी से रखें रमजान में रोजा
जमा मस्जिद के इमाम तफज्जुल हुसैन ने बताया कि इसी महीने में कुरान आसमान से जमीन पर उतरा गया था। रमजान में रोजा रखकर पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं। रोजेदार को पूरी इमानदारी का ध्यान रखना होता है। इस्लाम में पांच चीजें फर्ज हैं। इसमें से रमजान में रोजा सबसे खास है।
रमजान के दौरान हर बुराई से बचना और गरीबों की खिदमत करना होता है। अंजुमन इस्लामिया गांधी नगर के अध्यक्ष मोहम्मद सुहेल ने बताया कि मुस्लिम समुदाय में पाक रमजान महीने का बहुत महत्व है। लोग 29 या 30 दिन रोजे रखते हैं और कुरान पढ़ते हैं। हर दिन पांच बार नमाज अदा की जाती है।
इसके अलावा रमजान के महीने में रात के समय एक विशेष नमाज पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। इन दिनों में लोग अल्लाह से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। मुस्लिम समाज के लोग रमजान के महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
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मस्जिदों-ईदगाहों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। एक-दूसरे को रमजान माह की बधाई दी। इफ्तार के सामान की खरीदारी के साथ ही बाजारों की रौनक बढ़ गई। सादगी, शांति और अमन चैन का महीना रमजान बरकत का महीना है।
उधर, बाजार में भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे। लोगों ने सेवई, खजूर, टोपी व इत्र की खरीदारी की। मस्जिदों में साफ-सफाई हुई। देर रात तक बाजार में चहल-पहल रही। साथ ही घर-घर में कुरान की तिलावत का दौर भी शुरू हो गया।
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घर हो या मस्जिद, हर जगह सिर्फ खुदा की इबादत की बात होने लगी है। नमाज में शरीक होने के लिए अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। छोटी बड़ी सभी मस्जिदों में नमाजियों की खासी तादाद दिखी। वहीं नन्हें मुन्नों में भी खुदा की इबादत का जज्बा दिखा।
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इमानदारी से रखें रमजान में रोजा
जमा मस्जिद के इमाम तफज्जुल हुसैन ने बताया कि इसी महीने में कुरान आसमान से जमीन पर उतरा गया था। रमजान में रोजा रखकर पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं। रोजेदार को पूरी इमानदारी का ध्यान रखना होता है। इस्लाम में पांच चीजें फर्ज हैं। इसमें से रमजान में रोजा सबसे खास है।
रमजान के दौरान हर बुराई से बचना और गरीबों की खिदमत करना होता है। अंजुमन इस्लामिया गांधी नगर के अध्यक्ष मोहम्मद सुहेल ने बताया कि मुस्लिम समुदाय में पाक रमजान महीने का बहुत महत्व है। लोग 29 या 30 दिन रोजे रखते हैं और कुरान पढ़ते हैं। हर दिन पांच बार नमाज अदा की जाती है।
इसके अलावा रमजान के महीने में रात के समय एक विशेष नमाज पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। इन दिनों में लोग अल्लाह से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। मुस्लिम समाज के लोग रमजान के महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।