{"_id":"6ab2e2de0d074f0a890713c9","slug":"details-regarding-the-deaths-of-mothers-and-infants-will-now-be-recorded-on-the-portal-basti-news-c-207-1-bst1005-167465-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: प्रसूता और शिशु की मौत का ब्योरा अब पोर्टल पर होगा दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: प्रसूता और शिशु की मौत का ब्योरा अब पोर्टल पर होगा दर्ज
विज्ञापन
बस्ती। प्रसूताओं और नवजातों की मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। मातृ एवं शिशु मृत्यु की घटनाओं की जानकारी जुटाने और उनकी समीक्षा के लिए एमपीसीडीआर (मातृ एवं शिशु मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया) पोर्टल विकसित किया गया है।
अब प्रसूता और शिशु की प्रत्येक मृत्यु की सूचना पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके आधार पर मृत्यु के कारणों की समीक्षा कर स्वास्थ्य सेवाओं में जरूरी सुधार किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अब तक जिले में 21,900 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें करीब 13 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित मिलीं। इसी अवधि में 18 हजार महिलाओं का प्रसव कराया गया। विभाग के अनुसार, अप्रैल से अब तक नौ प्रसूताओं की मौत हुई है। इन मामलों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की गई है। एमपीसीडीआर पोर्टल पर प्रसूता और शिशु की मृत्यु से संबंधित सूचनाएं छह बिंदुओं में दर्ज की जाएंगी। स्थानीय और जनपद स्तर के अधिकारी इन सूचनाओं को देख सकेंगे। इससे प्रत्येक मौत का रिकॉर्ड तैयार होने के साथ ही उसके कारणों की समीक्षा भी आसान होगी।
स्वास्थ्य विभाग का जोर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली महिलाओं की समय से पहचान और उनकी नियमित निगरानी पर है। एनीमिया, उच्च रक्तचाप समेत अन्य जोखिम की स्थिति में गर्भवती को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रसव के दौरान जटिलताओं को कम किया जा सके।
विज्ञापन
चिकित्सक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि एचआरपी वाली महिलाओं में प्रसव के दौरान जोखिम अधिक रहता है। खून की कमी और रक्तचाप बढ़ने से गंभीर जटिलताओं की आशंका रहती है।
विज्ञापन
अब प्रसूता और शिशु की प्रत्येक मृत्यु की सूचना पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके आधार पर मृत्यु के कारणों की समीक्षा कर स्वास्थ्य सेवाओं में जरूरी सुधार किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अब तक जिले में 21,900 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें करीब 13 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित मिलीं। इसी अवधि में 18 हजार महिलाओं का प्रसव कराया गया। विभाग के अनुसार, अप्रैल से अब तक नौ प्रसूताओं की मौत हुई है। इन मामलों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की गई है। एमपीसीडीआर पोर्टल पर प्रसूता और शिशु की मृत्यु से संबंधित सूचनाएं छह बिंदुओं में दर्ज की जाएंगी। स्थानीय और जनपद स्तर के अधिकारी इन सूचनाओं को देख सकेंगे। इससे प्रत्येक मौत का रिकॉर्ड तैयार होने के साथ ही उसके कारणों की समीक्षा भी आसान होगी।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग का जोर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली महिलाओं की समय से पहचान और उनकी नियमित निगरानी पर है। एनीमिया, उच्च रक्तचाप समेत अन्य जोखिम की स्थिति में गर्भवती को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रसव के दौरान जटिलताओं को कम किया जा सके।
विज्ञापन
चिकित्सक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि एचआरपी वाली महिलाओं में प्रसव के दौरान जोखिम अधिक रहता है। खून की कमी और रक्तचाप बढ़ने से गंभीर जटिलताओं की आशंका रहती है।