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Basti News: दबंग ने किया जमीन पर कब्जा, पैमाइश कराने में बीत गए बरसों
Mon, 09 Oct 2023 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 09 Oct 2023 12:08 AM IST
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जमीन रंजिश के आधे से ज्यादा विवाद इसी के इर्द-गिर्द
किसी भी हद तक जाने में नहीं हिचकते जमीन कब्जा करने वाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भूमि विवाद में सबसे संवेदनशील और जोखिम भरा पहलू कब्जा और उसे खाली कराने का है। आधा से ज्यादा जमीन की रंजिश इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। दबंग, बगलगीर आदि कब्जा कर खाली न करने पर पूरा जोर लगाते हैं। पीड़ित पैमाइश और कब्जा पाने के लिए बरसों तक थाने और तहसील के चक्कर काटते रह जाते हैं। मारपीट, मुकदमेबाजी तक का सामना करना पड़ता है। लेखपाल और राजस्व कर्मी चढ़ावा मांगते हैं। चढ़ावा लेने के बावजूद पैमाइश नहीं करते। कई लेखपाल पैमाइश के लिए घूस लेते गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
तमाम काश्तकारों की पैतृक संपत्ति ऐसे ही पड़ी हुई है। जब वे भूमि पर कब्जा लेने जाते हैं तो समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर अगल-बगल के लोग जमीन पर कब्जा नहीं करने देते हैं। वह अपनी जमीन का हिस्सा बताकर निर्माण रोक देते हैं। आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। पैमाइश कराकर पहले पत्थर नसब कराइए। संपूर्ण और समाधान दिवस पर अफसरों के आदेश पर कानूनगो व लेखपाल पुलिस बल के साथ जमीन की माप करा देते हैं। यदि मामला खत्म नहीं हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
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45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार, पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया तो जल्द प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगाते रहते हैं।
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धारा 24 के नाम से जानी जाती है पक्की पैमाइश
तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। तीन पथरान (फिक्स प्वाइंट जैसे पुराना कुआं, मंदिर, भवन, सड़क आदि) के आधार पर पैमाइश की जाती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पूरी की जाती है।
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चर्चा में रहे लेखपालों के घूसखोरी के मामले
- 25 अप्रैल 2023 को सदर तहसील की लेखपाल मुदिता श्रीवास्तव को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता ने रंगे हाथ घूस लेते गिरफ्तार किया।
- 17 जून 2022 में पैमाइश के लिए घूस लेते समय हर्रैया के राजस्व निरीक्षक घनश्याम वर्मा को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता के रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- 25 अगस्त 2022 को सदर तहसील के एक लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया।
- पांच फरवरी 2023 को सदर तहसील में तैनात लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एसडीएम ने उसे निलंबित कर दिया।
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केस-एक
शहर के ओपेक हाॅस्पिटल कैली के पास मुंडेरवा थाना क्षेत्र के भौरा गांव निवासी कैलाश चंद्र ने जमीन का बैनामा कराया था। 22 सितंबर को उनकी जमीन पर कुछ लोग कब्जा करने लगे। मना करने पर अपशब्द कहते हुए कहने लगे कि भाग जाओ वरना जान से मारे जाओगे। इस मामले की कैलाश चंद्र ने थाने में तहरीर देने के साथ ही प्रकरण का समाधान निकालने के लिए संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र दिया। शनिवार को कोतवाली पुलिस ने थाना क्षेत्र के छबिलहाखोर निवासी अजय मिश्रा और उनकी पत्नी रेखा मिश्रा पर केस दर्ज किया।
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केस दो
नगर थाने के चंदो जोगीपुर गांव में शत्रुघन सिंह और दयाराम यादव के बीच जमीन का विवाद है। काफी जद्दोजहद के बाद पैमाइश और पत्थर नसब का आदेश हुआ। तहसील की टीम ने पत्थर नसब किया। बाद में एक पक्ष को पैमाइश मंजूर नहीं हुई। उसे लगा कि पैमाइश में पारदर्शिता नहीं बरती गई। शत्रुघन सिंह ने थाने में तहरीर दी कि विपक्षी ने नसब हुए पत्थर को उखाड़ कर फेंक दिया। मना करने पर अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे। पुलिस अब केस दर्ज कर छानबीन कर रही है।
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किसी भी हद तक जाने में नहीं हिचकते जमीन कब्जा करने वाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भूमि विवाद में सबसे संवेदनशील और जोखिम भरा पहलू कब्जा और उसे खाली कराने का है। आधा से ज्यादा जमीन की रंजिश इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। दबंग, बगलगीर आदि कब्जा कर खाली न करने पर पूरा जोर लगाते हैं। पीड़ित पैमाइश और कब्जा पाने के लिए बरसों तक थाने और तहसील के चक्कर काटते रह जाते हैं। मारपीट, मुकदमेबाजी तक का सामना करना पड़ता है। लेखपाल और राजस्व कर्मी चढ़ावा मांगते हैं। चढ़ावा लेने के बावजूद पैमाइश नहीं करते। कई लेखपाल पैमाइश के लिए घूस लेते गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
तमाम काश्तकारों की पैतृक संपत्ति ऐसे ही पड़ी हुई है। जब वे भूमि पर कब्जा लेने जाते हैं तो समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर अगल-बगल के लोग जमीन पर कब्जा नहीं करने देते हैं। वह अपनी जमीन का हिस्सा बताकर निर्माण रोक देते हैं। आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। पैमाइश कराकर पहले पत्थर नसब कराइए। संपूर्ण और समाधान दिवस पर अफसरों के आदेश पर कानूनगो व लेखपाल पुलिस बल के साथ जमीन की माप करा देते हैं। यदि मामला खत्म नहीं हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
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45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार, पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया तो जल्द प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगाते रहते हैं।
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धारा 24 के नाम से जानी जाती है पक्की पैमाइश
तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। तीन पथरान (फिक्स प्वाइंट जैसे पुराना कुआं, मंदिर, भवन, सड़क आदि) के आधार पर पैमाइश की जाती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पूरी की जाती है।
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चर्चा में रहे लेखपालों के घूसखोरी के मामले
- 25 अप्रैल 2023 को सदर तहसील की लेखपाल मुदिता श्रीवास्तव को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता ने रंगे हाथ घूस लेते गिरफ्तार किया।
- 17 जून 2022 में पैमाइश के लिए घूस लेते समय हर्रैया के राजस्व निरीक्षक घनश्याम वर्मा को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता के रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- 25 अगस्त 2022 को सदर तहसील के एक लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया।
- पांच फरवरी 2023 को सदर तहसील में तैनात लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एसडीएम ने उसे निलंबित कर दिया।
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केस-एक
शहर के ओपेक हाॅस्पिटल कैली के पास मुंडेरवा थाना क्षेत्र के भौरा गांव निवासी कैलाश चंद्र ने जमीन का बैनामा कराया था। 22 सितंबर को उनकी जमीन पर कुछ लोग कब्जा करने लगे। मना करने पर अपशब्द कहते हुए कहने लगे कि भाग जाओ वरना जान से मारे जाओगे। इस मामले की कैलाश चंद्र ने थाने में तहरीर देने के साथ ही प्रकरण का समाधान निकालने के लिए संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र दिया। शनिवार को कोतवाली पुलिस ने थाना क्षेत्र के छबिलहाखोर निवासी अजय मिश्रा और उनकी पत्नी रेखा मिश्रा पर केस दर्ज किया।
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केस दो
नगर थाने के चंदो जोगीपुर गांव में शत्रुघन सिंह और दयाराम यादव के बीच जमीन का विवाद है। काफी जद्दोजहद के बाद पैमाइश और पत्थर नसब का आदेश हुआ। तहसील की टीम ने पत्थर नसब किया। बाद में एक पक्ष को पैमाइश मंजूर नहीं हुई। उसे लगा कि पैमाइश में पारदर्शिता नहीं बरती गई। शत्रुघन सिंह ने थाने में तहरीर दी कि विपक्षी ने नसब हुए पत्थर को उखाड़ कर फेंक दिया। मना करने पर अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे। पुलिस अब केस दर्ज कर छानबीन कर रही है।