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मनरेगा में खेल, मजदूर के बजाय मशीन से कार्य
Sat, 23 Mar 2019 11:38 PM IST
राकेश पांडेय
basti
basti
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sat, 23 Mar 2019 11:38 PM IST
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मशीन से कराया गया मनरेगा का काम।
- फोटो : amar ujala
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विक्रमजोत। ब्लॉक में ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी सरकार की संचालित जनकल्याणकारी योजना मनरेगा में खेल कर रहे हैं। इसी के माध्यम से वे गरीब मजदूरों के हिस्से का धन की बंदरबांट में जुटे हैं। इसका उदाहरण ग्राम पंचायत खेमराजपुर के राजस्व गांव बेतावा में सामने आया है। यहां मनरेगा का कार्य श्रमिकों के बजाय मशीन से हो रहा है। जिम्मेदार मजदूरी का धन अपने चहेतों के खाते में भेज उसे निकलवा लेते हैं।
ब्लॉक में 10 ग्राम पंचायतों के लगभग 50 गांव नदी उस पार हैं। यहां मनरेगा कार्य के माध्यम मे कार्य दिखा कर सरकारी रकम की बंदरबांट का सिलसिला तेज हो गया है। क्योंकि वहां बाढ़ आने के बाद भौगोलिक परिस्थितियां बदल जाती हैं। इसका फायदा वे उठा कर कार्य को नदी की कटान में दिखा देते हैं। जांच-पड़ताल का भी कोई भय नहीं है क्योंकि इन क्षेत्रों में अधिकारियों की आवाजाही भी नहीं होती। ब्लॉक क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के राजस्व गांव बेतावा जो कि सरयू नदी के किनारे माझा क्षेत्र मे स्थित है जहां दूरदराज सात-आठ परिवार ही छप्पर डालकर गुजर-बसर करते हैं। इन इलाकों में मनरेगा योजना के तहत 12 सौ मीटर मिट्टी से सड़क पटाई का कच्चा कार्य मजदूरों से कराने बजाय जेसीबी मशीनों से रातों-रात करा दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो प्रधान और उनके समर्थक जेसीबी मशीन लेकर भाग खड़े हुए। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने बताया कि मनरेगा के तहत किसी भी प्रकार का कार्य मशीनों से कराया जाना अनुचित और गैरकानूनी है। अगर माझा क्षेत्र में मिट्टी पटाई का कार्य जेसीबी मशीनों से हुआ है तो संबंधित की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मशीन से कराया गया कार्य श्रमदान घोषित कर दिया जाएगा।
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ब्लॉक में 10 ग्राम पंचायतों के लगभग 50 गांव नदी उस पार हैं। यहां मनरेगा कार्य के माध्यम मे कार्य दिखा कर सरकारी रकम की बंदरबांट का सिलसिला तेज हो गया है। क्योंकि वहां बाढ़ आने के बाद भौगोलिक परिस्थितियां बदल जाती हैं। इसका फायदा वे उठा कर कार्य को नदी की कटान में दिखा देते हैं। जांच-पड़ताल का भी कोई भय नहीं है क्योंकि इन क्षेत्रों में अधिकारियों की आवाजाही भी नहीं होती। ब्लॉक क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के राजस्व गांव बेतावा जो कि सरयू नदी के किनारे माझा क्षेत्र मे स्थित है जहां दूरदराज सात-आठ परिवार ही छप्पर डालकर गुजर-बसर करते हैं। इन इलाकों में मनरेगा योजना के तहत 12 सौ मीटर मिट्टी से सड़क पटाई का कच्चा कार्य मजदूरों से कराने बजाय जेसीबी मशीनों से रातों-रात करा दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो प्रधान और उनके समर्थक जेसीबी मशीन लेकर भाग खड़े हुए। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने बताया कि मनरेगा के तहत किसी भी प्रकार का कार्य मशीनों से कराया जाना अनुचित और गैरकानूनी है। अगर माझा क्षेत्र में मिट्टी पटाई का कार्य जेसीबी मशीनों से हुआ है तो संबंधित की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मशीन से कराया गया कार्य श्रमदान घोषित कर दिया जाएगा।
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