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सस्ते के चक्कर में जोखिम में डाली जान
basti
Updated Tue, 13 Feb 2018 11:47 PM IST
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घटनास्थल पर पहुंची पुलिस।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती/बनकटी।
अपार भीड़भाड़ वाले मेले में खतरनाक गैस का खुलेेआम इस्तेमाल करने से पुलिस प्रशासन ने टोका होता तो यह हादसा न हुआ होता। लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी थी कि अगर बच्चों को गुब्बारे में खतरनाक गैस भरकर बेचने से रोका गया होता तो नानी के घर से मेला देखने गई निशा मेले से मिठाइयां लेकर लौटी होती।
मौके पर पहुंची पुलिस की फील्ड यूनिट और फोरेंसिक टीम ने शुरुआती छानबीन में पाया है कि गुब्बारे में हीलियम या हाइड्रोजन की जगह कार्बाइड से बनने वाली एसीटीलीन गैस का इस्तेमाल किया गया। किसान पीजी कॉलेज के विज्ञान विभाग के डॉ. जेपी शुक्ल के अनुसार बाजार में कार्बाइड सौ रुपये किलोग्राम या इसके आसपास कीमत में मिलती है। एसीटीलीन गैस वाले गुब्बारे आकाश में ज्यादा देर तक तो नहीं टिक पाते लेकिन तात्कालिक रोमांच का एहसास कराने में सक्षम होने की वजह से बच्चे इसके पीछे लट्टू रहते हैं। डॉ. शुक्ल के अनुसार कैल्सियम व कार्बाइड से बनी एसीटीलीन गैस ज्यादा ज्वलनशील और घातक है।
हादसा मान लीपापोती में जुटी पुलिस
लापरवाही के जिम्मेदार गुब्बारे वाले पर पुलिस मेहरबान दिख रही है। लालगंज पुलिस ने बिना जांच-पड़ताल किए ही करार दे दिया कि हाइड्रोजन वाला सिलिंडर ब्लास्ट हुआ। जबकि मौके पर मौजूद लोगों ने कार्बाइड वाली गैस भरते समय हादसा होने की बात बताते हैं।
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ये सभी घायल हुए हैं
बेहिल निवासी राहुल (10), रोशनी(10), आकाश (10), चंदा (5), राजमती (30), हटवा निवासी सत्यम (6), डड़वा निवासी बलदेव (45), मोहनाखोर निवासी सुजीत (13), विवेक (10), दीपक (12), सोनू (10) तथा गुब्बारा बेचने वाला कमल हसन (40) । कई मामूली घायल खुद निजी क्लीनिक गए। किसी का मुंह झुलसा, कान का पर्दा फटा, सिर फटा तथा भगदड़ में कई को चोटें आईं। आधे से अधिक घायलों का इलाज कैली और सदर अस्पताल में चल रहा है।
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अपार भीड़भाड़ वाले मेले में खतरनाक गैस का खुलेेआम इस्तेमाल करने से पुलिस प्रशासन ने टोका होता तो यह हादसा न हुआ होता। लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी थी कि अगर बच्चों को गुब्बारे में खतरनाक गैस भरकर बेचने से रोका गया होता तो नानी के घर से मेला देखने गई निशा मेले से मिठाइयां लेकर लौटी होती।
मौके पर पहुंची पुलिस की फील्ड यूनिट और फोरेंसिक टीम ने शुरुआती छानबीन में पाया है कि गुब्बारे में हीलियम या हाइड्रोजन की जगह कार्बाइड से बनने वाली एसीटीलीन गैस का इस्तेमाल किया गया। किसान पीजी कॉलेज के विज्ञान विभाग के डॉ. जेपी शुक्ल के अनुसार बाजार में कार्बाइड सौ रुपये किलोग्राम या इसके आसपास कीमत में मिलती है। एसीटीलीन गैस वाले गुब्बारे आकाश में ज्यादा देर तक तो नहीं टिक पाते लेकिन तात्कालिक रोमांच का एहसास कराने में सक्षम होने की वजह से बच्चे इसके पीछे लट्टू रहते हैं। डॉ. शुक्ल के अनुसार कैल्सियम व कार्बाइड से बनी एसीटीलीन गैस ज्यादा ज्वलनशील और घातक है।
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हादसा मान लीपापोती में जुटी पुलिस
लापरवाही के जिम्मेदार गुब्बारे वाले पर पुलिस मेहरबान दिख रही है। लालगंज पुलिस ने बिना जांच-पड़ताल किए ही करार दे दिया कि हाइड्रोजन वाला सिलिंडर ब्लास्ट हुआ। जबकि मौके पर मौजूद लोगों ने कार्बाइड वाली गैस भरते समय हादसा होने की बात बताते हैं।
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ये सभी घायल हुए हैं
बेहिल निवासी राहुल (10), रोशनी(10), आकाश (10), चंदा (5), राजमती (30), हटवा निवासी सत्यम (6), डड़वा निवासी बलदेव (45), मोहनाखोर निवासी सुजीत (13), विवेक (10), दीपक (12), सोनू (10) तथा गुब्बारा बेचने वाला कमल हसन (40) । कई मामूली घायल खुद निजी क्लीनिक गए। किसी का मुंह झुलसा, कान का पर्दा फटा, सिर फटा तथा भगदड़ में कई को चोटें आईं। आधे से अधिक घायलों का इलाज कैली और सदर अस्पताल में चल रहा है।