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प्रधान पर शौचालय की रकम हड़पने का आरोप
basti
Updated Sun, 27 May 2018 11:11 PM IST
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शौचालय बने कूड़ेदान।
- फोटो : amar ujala
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एक ओर प्रदेश से लेकर केंद्र तक की सरकारें शौचालय एवं स्वच्छता को लेकर दम भर रही हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश सरकार की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों में रोड़ा पड़ रहा है। विकास खंड के भीटाखुर्द में ग्राम प्रधान पर लोगों ने शौचालय हड़पने का आरोप लगाया है। जबकि ग्राम प्रधान ने मामले में अपनी सफाई गोलमोल ढंग से दे दी। वहीं, जिम्मेदारों का जवाब कि मामले की जांच होगी।
रविवार को जब गांव में विकास की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम पहुंची तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली दिखी। टूटी सड़कें और बजबजाती नालियां मानों बीमारियों को आमंत्रण दे रही थीं। टीम की नजर कुछ अधूरे पड़े शौचालय पर गई। इन शौचालयों के गड्ढों को कूड़ेदान के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। पता चला कि यह शौचालय पिछले डेढ़ वर्षों से रुके पड़े हैं।
गांव की मिसलावती, वीरेंद्र प्रजापति, रामजी प्रजापति का कहना है कि स्वच्छ निर्मल भारत के खुले में शौच से मुक्त करने के लिए सरकार ने जो धन दिया था उसे प्रधान अजीजुल्लाह ने ले लिया और शौचालय निर्माण को अधूरा छोड़ दिया। मिसलावती ने बताया कि दो बार छह-छह हजार चेक मिला, लेकिन पूरा पेमेंट ग्राम प्रधान अजीजुल्लाह ने ले लिया। रामजी प्रजापति ने भी बताया उनकी पहली किस्त के छह हजार रुपये ग्राम प्रधान ने ले लिए लेकिन दूसरी क़िस्त को जब वह मांगने लगे तो मैंने मना कर दिया। वीरेंद्र प्रजापति का कहना कि उनको 12 हजार मिला था, उसे प्रधान ने ले लिया। ग्रामीणों के आरोपों पर प्रधान अजीजुल्लाह ने सफाई दी। बोले जब ग्रामीणों के खाते में धन आया तो बैठक के माध्यम से सभी ने ग्रामीणों के सामने मेरी देखरेख में शौचालय निर्माण की सहमति दी थी। इसी नाते मैंने उनसे रुपये ले लिया। कुछ कारण वश शौचालय कार्य रुक गया और अब ग्रामीण मेरे ऊपर गलत आरोप लगा रहे हैं।
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एक ओर प्रदेश से लेकर केंद्र तक की सरकारें शौचालय एवं स्वच्छता को लेकर दम भर रही हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश सरकार की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों में रोड़ा पड़ रहा है। विकास खंड के भीटाखुर्द में ग्राम प्रधान पर लोगों ने शौचालय हड़पने का आरोप लगाया है। जबकि ग्राम प्रधान ने मामले में अपनी सफाई गोलमोल ढंग से दे दी। वहीं, जिम्मेदारों का जवाब कि मामले की जांच होगी।
रविवार को जब गांव में विकास की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम पहुंची तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली दिखी। टूटी सड़कें और बजबजाती नालियां मानों बीमारियों को आमंत्रण दे रही थीं। टीम की नजर कुछ अधूरे पड़े शौचालय पर गई। इन शौचालयों के गड्ढों को कूड़ेदान के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। पता चला कि यह शौचालय पिछले डेढ़ वर्षों से रुके पड़े हैं।
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गांव की मिसलावती, वीरेंद्र प्रजापति, रामजी प्रजापति का कहना है कि स्वच्छ निर्मल भारत के खुले में शौच से मुक्त करने के लिए सरकार ने जो धन दिया था उसे प्रधान अजीजुल्लाह ने ले लिया और शौचालय निर्माण को अधूरा छोड़ दिया। मिसलावती ने बताया कि दो बार छह-छह हजार चेक मिला, लेकिन पूरा पेमेंट ग्राम प्रधान अजीजुल्लाह ने ले लिया। रामजी प्रजापति ने भी बताया उनकी पहली किस्त के छह हजार रुपये ग्राम प्रधान ने ले लिए लेकिन दूसरी क़िस्त को जब वह मांगने लगे तो मैंने मना कर दिया। वीरेंद्र प्रजापति का कहना कि उनको 12 हजार मिला था, उसे प्रधान ने ले लिया। ग्रामीणों के आरोपों पर प्रधान अजीजुल्लाह ने सफाई दी। बोले जब ग्रामीणों के खाते में धन आया तो बैठक के माध्यम से सभी ने ग्रामीणों के सामने मेरी देखरेख में शौचालय निर्माण की सहमति दी थी। इसी नाते मैंने उनसे रुपये ले लिया। कुछ कारण वश शौचालय कार्य रुक गया और अब ग्रामीण मेरे ऊपर गलत आरोप लगा रहे हैं।
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