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सुलग रहे कारागार में सिलसिलेवार अनुशासनहीनता
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:34 AM IST
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कारागार में लगातार मनमानी
प्रभारी डीएम की दबिश में 26 मोबाइल मिले थे, नहीं हुई कार्रवाई
एक पखवारे में दूसरी बार आधा दर्जन मोबाइल बरामदगी से खलबली
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। कारागार में एक महीने से माहौल सुलग रहा है। प्रशासनिक हीलाहवाली बवालियों का मनोबल बढ़ा रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि प्रभारी डीएम की दबिश में मिली अनियमितताओं पर कार्रवाई हुई होती तो शुक्रवार को डीएम के निरीक्षण में फिर मोबाइल बरामद न होता।
एक पखवारे पहले भी बंदियों की बैरक की फर्श के नीचे सामान छुपाने की जगह बनाई मिली थी। तीन बंदीरक्षकों पर बदमाशों से मिलीभगत का आरोप लगा था। 20 बंदियों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर भी दी गई थी और तीनों बंदीरक्षकों को हटाने की अनुशंसा की गई थी। जेल अधीक्षक संतलाल यादव ने दावा किया था कि पूरी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा चुकी है। मगर रात गई तो बात गई। मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अभी पिछले महीने गाजियाबाद पुलिस ने यहां के कारागार से स्पूफ़िंग गिरोह संचालित होने का खुलासा किया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जेल प्रशासन खुलकर बताने से परहेज कर रहा है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसके पीछे पूर्ववर्ती जेल अधिकारियों की कारस्तानी सामने आ रही है। जेल अधीक्षक संतलाल यादव का कहना है कि आरोपी बंदीरक्षकों को निलंबित कर विभागीय नियमावली के मुताबिक कार्रवाई शुरू की जा रही है। जांच में इनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। बवाली बंदियों को गैर जेलों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई भी शुरू है।
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कारागार में लगातार मनमानी
प्रभारी डीएम की दबिश में 26 मोबाइल मिले थे, नहीं हुई कार्रवाई
एक पखवारे में दूसरी बार आधा दर्जन मोबाइल बरामदगी से खलबली
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। कारागार में एक महीने से माहौल सुलग रहा है। प्रशासनिक हीलाहवाली बवालियों का मनोबल बढ़ा रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि प्रभारी डीएम की दबिश में मिली अनियमितताओं पर कार्रवाई हुई होती तो शुक्रवार को डीएम के निरीक्षण में फिर मोबाइल बरामद न होता।
एक पखवारे पहले भी बंदियों की बैरक की फर्श के नीचे सामान छुपाने की जगह बनाई मिली थी। तीन बंदीरक्षकों पर बदमाशों से मिलीभगत का आरोप लगा था। 20 बंदियों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर भी दी गई थी और तीनों बंदीरक्षकों को हटाने की अनुशंसा की गई थी। जेल अधीक्षक संतलाल यादव ने दावा किया था कि पूरी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा चुकी है। मगर रात गई तो बात गई। मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अभी पिछले महीने गाजियाबाद पुलिस ने यहां के कारागार से स्पूफ़िंग गिरोह संचालित होने का खुलासा किया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जेल प्रशासन खुलकर बताने से परहेज कर रहा है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसके पीछे पूर्ववर्ती जेल अधिकारियों की कारस्तानी सामने आ रही है। जेल अधीक्षक संतलाल यादव का कहना है कि आरोपी बंदीरक्षकों को निलंबित कर विभागीय नियमावली के मुताबिक कार्रवाई शुरू की जा रही है। जांच में इनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। बवाली बंदियों को गैर जेलों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई भी शुरू है।
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