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Basti News: बच्चों में तेज बुखार के साथ झटके की शिकायत

Sun, 21 Dec 2025 01:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Dec 2025 01:22 AM IST
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Complaints of high fever and convulsions in children
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श के लिए आई गर्भवती को बेंच के अभाव में फर्श पर
बस्ती। तापमान गिरने व बर्फीली हवा के साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों पर मौसम कहर बरपा रहा है। कोल्ड डायरिया के साथ ही सर्दी-जुकाम और तेज बुखार से बच्चे पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच रहे। जांच में उन्हें झटका आने की शिकायत मिल रही है। ऐसे बच्चों को पीआईसीयू में रखा गया है। जेई-एईएस जांच के लिए ब्लड सैंपल लिया गया है।
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जिले में पिछले तीन दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड व गलन वाली सर्दी से लोग बेहाल हैं। जिला अस्पताल हो या फिर महिला अस्पताल यहां उपचार कराने आए रोगियों को सांसत झेलनी पड़ी। शनिवार को जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में बुखार, उल्टी और दस्त से परेशान होकर पहुंचे बच्चों को परामर्श दिया गया। जिन बच्चों की स्थिति ठीक नहीं थी, भर्ती किया गया। चिकित्सक अभिभावकों को सर्दी से बचाव व साफ-सफाई की सलाह दिए।
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फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि सर्दी के मौसम में नोरोवायरस के अलावा ठंड में राइनोवायरस, इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू वायरस व रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस भी पनपते हैं। ये तीनों वायरस सर्दी-जुकाम व सांस संक्रमण की समस्या पैदा करते हैं। इनसे खांसी, छाती में जकड़न, बलगम आदि की समस्या होती है। ये सभी वायरस मिलकर कोल्ड डायरिया की स्थिति पैदा करते हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीएस पटेल ने बताया कि इस मौसम में छोटे बच्चों का खास ध्यान रखने की आवश्यकता है।
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सर्दी-जुकाम के कारक वायरस ठंड में काफी समय तक हवा में बने रहते हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में 419 मरीज पहुंचे। अधिकांश में सर्दी व बुखार के लक्षण दिखे। जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में डॉ. जेपी कुशवाहा ने बताया कि बच्चों की जांच में जकड़न, पीलिया के लक्षण आ रहे। उन्हें भर्ती कराया जा रहा है। खांसी के भी बच्चे आ रहे हैं। वहीं महिला अस्पताल के कक्ष संख्या दो ओपीडी में गर्भवती महिलाएं बेंच के अभाव में फर्श पर बैठी दिखीं।

गलन होने से उन्हें परेशानी हो रही थी। महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मरीजों के लिए बेहतर व्यवस्था की जा रही है। ओपीडी के डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि ज्यादा देर तक बाहर न खड़ा करें। नियमित जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
कोट
पीआईसीयू में जो बच्चे भर्ती हैं उन्हें बेहतर उपचार के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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