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सीएम ने किसानों का दर्द समझा दवा भी दे गए
बस्ती (ब्यूरो)
Updated Fri, 30 Mar 2018 12:19 AM IST
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सीएम ने किसानों का दर्द समझा दवा भी दे गए
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। मुंडेरवा चीनी मिल के शिलान्यास के बहाने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने पहले गन्ना किसानों के दर्द से अपना नाता जोड़ा, फिर उसकी दवा भी दी। घंटे भर मंच पर रहे योगी ने यहां के किसानों के दुखती रग पर हाथ रखा और करीने से उनके दिल में उतर गए।
जिस चीनी मिल के लिए किसानों को गोली तक खानी पड़ी, वह मिल राजनीति के केंद्र में रहा। चुनावों में इस पर वादे तो तमाम हुआ, मगर निदान के नाम पर कदम पीछे हट गए। आखिरकार 25 वर्ष बाद योगी सरकार ने किसानों के उस आंदोलन के दर्द को समझा और मिल के नव निर्माण को हरी झंडी देकर मरहम लगा दिया। गन्ना ही एक ऐसी फसल थी, जिसे यहां का किसान बेचकर अपने सपने पूरा करता था। मिल बंद न हो, इसके लिए किसान आंदोलित हो उठे। तत्कालीन सरकार किसानों के इस दर्द को समझने में नाकाम रही, जिसके चलते आंदोलन इस कदर भड़क गया कि नियंत्रण के लिए गोली तक चलवानी पड़ी। इस घटना में किसान धर्मराज चौधरी, तिलकराम चौधरी व बद्री प्रसाद चौधरी को जान गंवानी पड़ी। चीनी मिल बंद हो जाने के बाद किसानों को गन्ना बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके चलते उनका मोह गन्ने की खेती से भंग होने लगा और वे आर्थिक संकट से जूझने लगे। बृहस्पतिवार को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि पूजन कर आधारशिला रखी तो किसानों के आंखों में चमक लौट आई। यहां पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले किसान आंदोलन के लिए शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर किसानों के भावनाओं का आदर किया। मंच संभाला तो शहीद किसानों के बेटों को नौकरी दिलाने का वादा कर योगी ने किसानों को भावुक कर दिया।
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जिस चीनी मिल के लिए किसानों को गोली तक खानी पड़ी, वह मिल राजनीति के केंद्र में रहा। चुनावों में इस पर वादे तो तमाम हुआ, मगर निदान के नाम पर कदम पीछे हट गए। आखिरकार 25 वर्ष बाद योगी सरकार ने किसानों के उस आंदोलन के दर्द को समझा और मिल के नव निर्माण को हरी झंडी देकर मरहम लगा दिया। गन्ना ही एक ऐसी फसल थी, जिसे यहां का किसान बेचकर अपने सपने पूरा करता था। मिल बंद न हो, इसके लिए किसान आंदोलित हो उठे। तत्कालीन सरकार किसानों के इस दर्द को समझने में नाकाम रही, जिसके चलते आंदोलन इस कदर भड़क गया कि नियंत्रण के लिए गोली तक चलवानी पड़ी। इस घटना में किसान धर्मराज चौधरी, तिलकराम चौधरी व बद्री प्रसाद चौधरी को जान गंवानी पड़ी। चीनी मिल बंद हो जाने के बाद किसानों को गन्ना बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके चलते उनका मोह गन्ने की खेती से भंग होने लगा और वे आर्थिक संकट से जूझने लगे। बृहस्पतिवार को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि पूजन कर आधारशिला रखी तो किसानों के आंखों में चमक लौट आई। यहां पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले किसान आंदोलन के लिए शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर किसानों के भावनाओं का आदर किया। मंच संभाला तो शहीद किसानों के बेटों को नौकरी दिलाने का वादा कर योगी ने किसानों को भावुक कर दिया।
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