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Basti News: बाल कल्याण अधिकारी व विवेचक तलब
Sat, 13 Apr 2024 01:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 13 Apr 2024 01:38 AM IST
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बालिका को बरामद कर थाने में रखने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बालिका को बरामद करने के बाद एक रात महिला व एक रात सोनहा थाने में रोकने तथा इसके बाद न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने मुकामी थाने के बाल कल्याण अधिकारी और विवेचक को तलब किय है। इसके लिए उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
थाना क्षेत्र के एक गांव के शख्स ने नाबालिग बेटी के घर से गायब होने की सूचना थाने में दर्ज करवाया था। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी के साथ ही बालिका को बरामद कर लिया, लेकिन विवेचक ने बालिका को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। बालिका को बिलंब से प्रस्तुत करने के नाते उसकी मेडिकल जांच के साथ ही काउंसलिंग में देरी हुई। इससे बालिका का सर्वोच्च हित प्रभावित हुआ है।
इतना ही नहीं बाल, अधिनियम 2015 के अनुसार किसी भी नाबालिग को थाने में नहीं रोका जा सकता है, लेकिन पुलिस ने बाल अधिनियम की अनदेखी करते हुए बालिका को एक रात महिला और एक रात सोनहा थाने में रोके रखा। बालिका ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उसे आंबेडकर नगर के एक गांव से तीन अप्रैल को बरामद किया गया था। इसके बाद उसे थाने पर रखा गया।
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बालिका को पांच अप्रैल को न्याय पीठ के सदस्य डाॅ. संतोष श्रीवास्तव के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उसके मेडिकल जांच आदि की कार्रवाई शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डाॅ. संतोष श्रीवास्तव, मंजू त्रिपाठी ने जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि बाल हित सर्वोपरि है। उसके साथ किसी को मनमानी करने का अधिकार नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बालिका को बरामद करने के बाद एक रात महिला व एक रात सोनहा थाने में रोकने तथा इसके बाद न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने मुकामी थाने के बाल कल्याण अधिकारी और विवेचक को तलब किय है। इसके लिए उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
थाना क्षेत्र के एक गांव के शख्स ने नाबालिग बेटी के घर से गायब होने की सूचना थाने में दर्ज करवाया था। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी के साथ ही बालिका को बरामद कर लिया, लेकिन विवेचक ने बालिका को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। बालिका को बिलंब से प्रस्तुत करने के नाते उसकी मेडिकल जांच के साथ ही काउंसलिंग में देरी हुई। इससे बालिका का सर्वोच्च हित प्रभावित हुआ है।
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इतना ही नहीं बाल, अधिनियम 2015 के अनुसार किसी भी नाबालिग को थाने में नहीं रोका जा सकता है, लेकिन पुलिस ने बाल अधिनियम की अनदेखी करते हुए बालिका को एक रात महिला और एक रात सोनहा थाने में रोके रखा। बालिका ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उसे आंबेडकर नगर के एक गांव से तीन अप्रैल को बरामद किया गया था। इसके बाद उसे थाने पर रखा गया।
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बालिका को पांच अप्रैल को न्याय पीठ के सदस्य डाॅ. संतोष श्रीवास्तव के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उसके मेडिकल जांच आदि की कार्रवाई शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डाॅ. संतोष श्रीवास्तव, मंजू त्रिपाठी ने जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि बाल हित सर्वोपरि है। उसके साथ किसी को मनमानी करने का अधिकार नहीं है।