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आग से 12 झोपड़ियां जलीं, गृहस्थी राख
बस्ती (ब्यूरो)
Updated Fri, 30 Mar 2018 12:29 AM IST
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आग से 12 झोपड़ियां जलीं, गृहस्थी राख
- फोटो : अमर उजाला
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गायघाट (बस्ती)। कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत चरकैला के राजस्व गांव भगवंतपुर में आग लगने से 12 झोपड़ियां जल गईं। आग लगने के स्पष्ट कारणों की जानकारी नहीं हो पाई।
भगवंतपुर गांव में बृहस्पतिवार को दोपहर करीब 12 बजे दुलारे के घर के पीछे आग लग गई। देखते ही देखते आग की चपेट में विजय, धर्मेंद्र, महेंद्र, बाबूलाल, संतलाल, रामधनी, राजेश, लक्ष्मी, परशुराम, विश्राम सहित 12 लोगों की झोपड़ियां आ गईं। किसी को अपने घर से कुछ भी समान निकालने का मौका नहीं मिला पाया। अग्निशमन दल और पुलिस के जवानों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू किया। महेंद्र ने बताया कि घर की छत बनवाने के लिए बैंक व रिश्तेदारों से 40 हजार रुपये लेकर बक्से में रखे थे। यह रकम भी घर में रखे सामान के साथ जल गई। जबकि विजय कुमार के बहन की 13 मई को शादी है, उसके लिए आभूषण, कपड़े, बेड आदि घर में रखे सारे सामान भी जल गए। बाबूलाल की झोपड़ी में रखे सारे सामान भी जल गए। कैंसर पीड़ित पत्नी मालती के इलाज के लिए बुधवार को 40 हजार में भैस बेच दिया था। रिश्तेदारों से भी उधार लेकर 80 हजार रुपये इकट्ठा किए थे। ताकि शुक्रवार को वह अपनी पत्नी को गोरखपुर इलाज के लिए ले जा सकें। बाबूलाल ने कहा कि वह दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
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भगवंतपुर गांव में बृहस्पतिवार को दोपहर करीब 12 बजे दुलारे के घर के पीछे आग लग गई। देखते ही देखते आग की चपेट में विजय, धर्मेंद्र, महेंद्र, बाबूलाल, संतलाल, रामधनी, राजेश, लक्ष्मी, परशुराम, विश्राम सहित 12 लोगों की झोपड़ियां आ गईं। किसी को अपने घर से कुछ भी समान निकालने का मौका नहीं मिला पाया। अग्निशमन दल और पुलिस के जवानों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू किया। महेंद्र ने बताया कि घर की छत बनवाने के लिए बैंक व रिश्तेदारों से 40 हजार रुपये लेकर बक्से में रखे थे। यह रकम भी घर में रखे सामान के साथ जल गई। जबकि विजय कुमार के बहन की 13 मई को शादी है, उसके लिए आभूषण, कपड़े, बेड आदि घर में रखे सारे सामान भी जल गए। बाबूलाल की झोपड़ी में रखे सारे सामान भी जल गए। कैंसर पीड़ित पत्नी मालती के इलाज के लिए बुधवार को 40 हजार में भैस बेच दिया था। रिश्तेदारों से भी उधार लेकर 80 हजार रुपये इकट्ठा किए थे। ताकि शुक्रवार को वह अपनी पत्नी को गोरखपुर इलाज के लिए ले जा सकें। बाबूलाल ने कहा कि वह दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
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