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बीट पुलिस ऑफिसर के पास सूचनाओं का अकाल

Thu, 28 Jul 2022 12:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jul 2022 12:22 AM IST
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BPO not conect in area
बीट पुलिस अफसर का क्षेत्र में संपर्क नहीं
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बस्ती। जिले में बीट पुलिस अफसर यानी बीपीओ के पास सूचनाओं का अकाल पड़ा हुआ है। क्षेत्र के बारे में उनके पास जरूरी सूचनाएं नहीं होती हैं। यहां तक कि बीट के गांवों, मोहल्लों में रहने वाले संभ्रांत लोगों के मोबाइल नंबर और नाम भी अपडेट नहीं हैं। लिहाजा इस पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।
23 जुलाई 2021 को जिले में बीट पुलिस अफसर सिस्टम को लागू किया गया था। सभी 16 थानों में 380 बीट पुलिस अधिकारी बनाए गए। संबंधित बीट के हेड कांस्टेबल/कांस्टेबल को बीपीओ बनाया गया। इसके प्रचार-प्रसार के लिए तत्कालीन आईजी रेंज अनिल कुमार राय ने बैनर लांच किया। जिस पर बीट पुलिस अधिकारी, संबंधित थाने के एसओ/एसएचओ,सीओ, एएसपी, एसपी, आईजी/डीआईजी,एडीजी और डीजीपी के नाम व मोबाइल नंबर लिखवाया गया था। इस बैनर को संबंधित क्षेत्र के प्रमुख स्थलों, विद्यालयों आदि पर लगवाए गए ताकि आम आवाम जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सके।
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इसके पीछे मकसद आम जन मानस में पुलिस की पहुंच बढ़ाना और प्रत्येक गांव, गली, कस्बों के बारे में छोटी- सी- छोटी सूचनाएं हासिल करना है। इस सिस्टम की रीढ़ सूचनाओं का आदान- प्रदान है। मगर बीट पुलिस अधिकारी सूचनाओं को अपडेट रखने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। शुरुआत में तत्कालीन बीपीओ ने कुछ सूचनाओं को अपनी डायरी में दर्ज किया लेकिन उनके तबादले के बाद या बीट बदलने के बाद उसे अपडेट नहीं किया गया।
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यह है बीपीओ का मकसद
कम्यूनिटी पुलिसिंग के तहत शुरू हुई इस पहल के जरिए माना जा रहा है बीट में सिपाहियों का लोगों से संवाद बढ़ेगा। आरक्षी उनकी समस्याओं को जान सकेंगे और उनके निराकरण का समुचित प्रयास करेंगे। बीपीओ के पास अपने क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के साथ बदमाशों का पूरा रिकॉर्ड होगा। बदमाशों पर उनकी पैनी नजर रहेगी। इसके अलावा इलाके में होने वाले जुआ, शराब और अन्य छोटे-छोटे अपराधों की पूरी सूचना भी बीपीओ को बीट बुक में नोट करेंगे। अपेक्षा की गई है कि बीपीओ के पास इलाके के लेखपाल सहित अन्य राजस्व तथा ब्लॉक कर्मियों के मोबाइल नंबर भी हों। प्रत्येक बीपीओ को रिवॉल्वर और बॉडी वार्न कैमरा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। उनके पास क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के रिकॉर्ड, कोर्ट समन, वारंट, एनसीआर के मुकदमें, थाने से आए शिकायती प्रार्थना पत्र, पासपोर्ट व चरित्र सत्यापन की जांच से संबंधी प्रपत्र रहेंगे।
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व्हाट्सएप ग्रुप में अनावश्यक सूचनाएं
- सभी बीट पुलिस अधिकारियों को बीट के 250 संभ्रांत व्यक्तियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के लिए कहा गया था। ज्यादातर बीपीओ ने ग्रुप तो बना लिया लेकिन उसमें जुड़ने वाले सदस्यों की संख्या 40-50 से ज्यादा नहीं हो पाई। इसके अलावा ग्रुप में आवश्यक एवं उपयोगी सूचनाओं के आदान-प्रदान की जगह अनावश्यक सामग्री ही पोस्ट की जाती है।

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डीआईजी बोले, अपडेट प्रक्रिया जारी
डीआईजी आरके भारद्वाज ने बताया कि उनके पास इस तरह की शिकायतें आई हैं। अपने भ्रमण के दौरान कई बीपीओ से डीआईजी ने सवाल किया तो समुचित जवाब नहीं मिल पाया। डीआईजी के अनुसार इसे लेकर तीनों जिलों के क्षेत्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी बीट पुलिस अधिकारियों को अपडेट करें।
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