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Basti News: तीन सदस्यीय कमेटी ने शुरू की जांच, एक सप्ताह में देगी रिपोर्ट
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बस्ती। शहर के मालवीय रोड स्थित प्राइवेट अस्पताल में महिला की मौत के मामले में जांच शुरू हो गई है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। जांच टीम से एक सप्ताह में जांच आख्या देने के लिए निर्देशित किया है। अस्पताल पर बिना न्यूरो सर्जन के हेड इंजरी से पीड़ित महिला के इलाज का आरोप लगा है।
मूल रूप से महादेवा पैकौलिया निवासी लक्ष्मी पत्नी विजय कुमार 26 जुलाई को बाइक से गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं। सिर में चोट लगने से परिजन किसी के कहने पर शहर के मालवीय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां छह दिनों तक उपचार चला और एक अगस्त को सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था। सूचना मिलने पर सीएमओ कार्यालय की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
परिजनों का आरोप था कि न्यूरो सर्जन समझकर भर्ती कराए थे, बाद में पता चला कि एमबीबीएस चिकित्सक ने हेड इंजरी का उपचार कर रहे थे। विभाग की प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित अस्पताल एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. प्रमोद चौधरी के नाम से 10 बेड के अस्पताल के रूप में पंजीकृत है। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं है, जबकि हेड इंजरी जैसे गंभीर मामले का उपचार किया जा रहा था। सीएमओ ने बताया कि महिला का ऑपरेशन किस चिकित्सक ने किया और किस आधार पर उपचार किया गया, इसकी भी जांच कराई जा रही है।
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टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह के साथ एक सर्जन और एक फिजिशियन को शामिल किया गया है। सप्ताह भीतर जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मूल रूप से महादेवा पैकौलिया निवासी लक्ष्मी पत्नी विजय कुमार 26 जुलाई को बाइक से गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं। सिर में चोट लगने से परिजन किसी के कहने पर शहर के मालवीय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां छह दिनों तक उपचार चला और एक अगस्त को सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था। सूचना मिलने पर सीएमओ कार्यालय की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
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परिजनों का आरोप था कि न्यूरो सर्जन समझकर भर्ती कराए थे, बाद में पता चला कि एमबीबीएस चिकित्सक ने हेड इंजरी का उपचार कर रहे थे। विभाग की प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित अस्पताल एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. प्रमोद चौधरी के नाम से 10 बेड के अस्पताल के रूप में पंजीकृत है। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं है, जबकि हेड इंजरी जैसे गंभीर मामले का उपचार किया जा रहा था। सीएमओ ने बताया कि महिला का ऑपरेशन किस चिकित्सक ने किया और किस आधार पर उपचार किया गया, इसकी भी जांच कराई जा रही है।
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टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह के साथ एक सर्जन और एक फिजिशियन को शामिल किया गया है। सप्ताह भीतर जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।