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Basti News: हत्या के जुर्म में 37 वर्ष बाद 90 वर्षीय बुजुर्ग को उम्रकैदी
Thu, 19 Dec 2024 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 19 Dec 2024 12:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) राम करन यादव की अदालत ने हत्या के जुर्म में 37 वर्ष बाद 90 वर्षीय मुसऊ निवासी ग्राम गोपीनाथपुर थाना परशुरामपुर को आजीवन कारावास की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता कनिष्क सिंह ने अदालत को बताया कि मोहम्मद अली उर्फ अतर अली निवासी गोपीनाथपुर ने 17 जुलाई 1987 को उदय नारायण सिंह से तहरीर लिखवाकर थाने में दी थी कि गांव के मुसऊ से गेहूं की मड़ाई के समय कुएं से पानी भरने के विवाद में मारपीट हुई थी। इसका मुकदमा अदालत में चल रहा है।
शाम को खाना खाकर वह और उसके भाई मकान की छत पर सो गए थे। भाभी और पत्नी नीचे सो रही थीं। रात करीब 12 बजे मुसऊ दीवार से चढ़कर छत पर पहुंच गया।
उसने गंडासे से भाई को मारने लगा। भाई के शोर मचाने पर उसकी नींद खुल गई। ललकारा व टार्च की रोशनी डालते हुए आरोरपी को दौड़ा। मुसऊ उतरकर भाग गया। भाई घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आठ गवाहों ने गवाही देकर घटना साबित किया। न्यायाधीश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सजा का हुक्म दिया है।
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बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) राम करन यादव की अदालत ने हत्या के जुर्म में 37 वर्ष बाद 90 वर्षीय मुसऊ निवासी ग्राम गोपीनाथपुर थाना परशुरामपुर को आजीवन कारावास की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता कनिष्क सिंह ने अदालत को बताया कि मोहम्मद अली उर्फ अतर अली निवासी गोपीनाथपुर ने 17 जुलाई 1987 को उदय नारायण सिंह से तहरीर लिखवाकर थाने में दी थी कि गांव के मुसऊ से गेहूं की मड़ाई के समय कुएं से पानी भरने के विवाद में मारपीट हुई थी। इसका मुकदमा अदालत में चल रहा है।
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शाम को खाना खाकर वह और उसके भाई मकान की छत पर सो गए थे। भाभी और पत्नी नीचे सो रही थीं। रात करीब 12 बजे मुसऊ दीवार से चढ़कर छत पर पहुंच गया।
उसने गंडासे से भाई को मारने लगा। भाई के शोर मचाने पर उसकी नींद खुल गई। ललकारा व टार्च की रोशनी डालते हुए आरोरपी को दौड़ा। मुसऊ उतरकर भाग गया। भाई घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आठ गवाहों ने गवाही देकर घटना साबित किया। न्यायाधीश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सजा का हुक्म दिया है।
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