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Basti News: पैथोलॉजिस्ट-रेडियोलॉजिस्ट का पता नहीं, डिजिटल हस्ताक्षर से रिपोर्ट
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बस्ती। शहर के कई निजी पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ सेंटरों पर पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की नियमित मौजूदगी के बिना जांच कर रिपोर्ट जारी की जा रही है। रिपोर्ट पर संबंधित चिकित्सक के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को यह जानकारी तक नहीं मिल पाती कि उनकी जांच किस चिकित्सक की निगरानी में हुई।
जिला अस्पताल के आसपास संचालित कुछ सेंटरों में मरीजों से जांच के लिए रकम लेने के बाद नमूने लेने और जांच करने का काम कर्मचारियों द्वारा किए जाने का आरोप है। वहीं, रिपोर्ट पर पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक का नाम और डिजिटल हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। रुधौली क्षेत्र के सुभाष ने बताया कि उनके भाई की तबीयत खराब होने पर निजी चिकित्सक ने कई तरह की रक्त जांच कराने की सलाह दी थी।
इसके बाद वह जिला अस्पताल से दक्षिण दरवाजा मार्ग पर स्थित एक पैथोलॉजी सेंटर पहुंचे। उनके अनुसार, सेंटर के प्रथम तल पर बने लैब में रिसेप्शन पर एक युवक मिला। जांच के नाम पर 1400 रुपये लिए गए और उसी कर्मचारी ने खून का नमूना लिया। सुभाष के मुताबिक, शाम को रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उस पर एमबीबीएस, एमडी पैथ डिग्री वाले चिकित्सक का नाम छपा था और डिजिटल हस्ताक्षर भी दर्ज था। रिपोर्ट के दूसरी ओर लैब इंचार्ज के नाम के सामने पेन से हस्ताक्षर किया गया था। चिकित्सक की मौजूदगी के बारे में पूछने पर कर्मचारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
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वहीं गांधीनगर निवासी मोहम्मद अलीम ने बताया कि उन्होंने अस्पताल चौराहा के निकट स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर अपने भाई का अल्ट्रासाउंड करवाया था। जिस पर चिकित्सक का हस्ताक्षर नहीं था। निजी चिकित्सक ने उसी रिपोर्ट के आधार पर दवा लिखी है। जबकि पवन शुक्ल ने बताया कि पिछले दिनों उनके पत्नी के ब्लड जांच की रिपोर्ट में भी पैथोलाॅजिस्ट चिकित्सक का डिजिटल हस्ताक्षर हुआ था। जबकि रिपोर्ट में वास्तविक हस्ताक्षर होना चाहिए।
लैब के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक कहीं और अपनी लैब संचालित करते हैं और यहां उनकी डिग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर भी सवालों के घेरे में
जिला अस्पताल से कैली मार्ग पर संचालित एक डायग्नोस्टिक सेंटर में भी रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ रिपोर्टों पर संबंधित चिकित्सक के हस्ताक्षर नहीं होते और डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए रिपोर्ट जारी कर दी जाती है। पिछले दिनों बिना हस्ताक्षर वाली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिए जाने को लेकर विवाद की बात भी सामने आई थी। इसी मार्ग पर एक निजी अस्पताल में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर में पिछले दिनों एक पुरुष के पेट में गर्भाशय होने की रिपोर्ट दिए जाने का मामला सामने आने की बात कही गई। इस पर विवाद हुआ था। हालांकि, मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और उसके निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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दो दर्जन से अधिक जांच केंद्रों की भरमार
जिला अस्पताल के आसपास पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गेट नंबर एक के सामने कैली मार्ग, दक्षिण दरवाजा मार्ग और गेट संख्या दो व तीन के आसपास कई निजी जांच केंद्र संचालित हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ केंद्रों पर अस्पताल आने वाले मरीजों को जांच के लिए भेजा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सेंटरों पर मरीजों से जांच के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक की नियमित मौजूदगी स्पष्ट नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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चिकित्सकों ने पंजीकरण में डिग्री के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
पिछले एक वर्ष में 10 से अधिक पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और एमबीबीएस चिकित्सकों ने सीएमओ को पत्र देकर आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना उनकी डिग्री का इस्तेमाल कुछ सेंटरों के पंजीकरण में किया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को कुछ सेंटरों और अस्पतालों के पंजीकरण में संशोधन कराना पड़ा। इन शिकायतों से यह सवाल उठता है कि पंजीकरण के समय संबंधित चिकित्सकों की सहमति और उनकी वास्तविक उपलब्धता का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।
कोट
सभी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर पंजीकरण में उल्लिखित चिकित्सक की मौजूदगी अनिवार्य है। सेंटर पर संबंधित चिकित्सक का नाम भी प्रदर्शित होना चाहिए। यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ
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जिला अस्पताल के आसपास संचालित कुछ सेंटरों में मरीजों से जांच के लिए रकम लेने के बाद नमूने लेने और जांच करने का काम कर्मचारियों द्वारा किए जाने का आरोप है। वहीं, रिपोर्ट पर पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक का नाम और डिजिटल हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। रुधौली क्षेत्र के सुभाष ने बताया कि उनके भाई की तबीयत खराब होने पर निजी चिकित्सक ने कई तरह की रक्त जांच कराने की सलाह दी थी।
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इसके बाद वह जिला अस्पताल से दक्षिण दरवाजा मार्ग पर स्थित एक पैथोलॉजी सेंटर पहुंचे। उनके अनुसार, सेंटर के प्रथम तल पर बने लैब में रिसेप्शन पर एक युवक मिला। जांच के नाम पर 1400 रुपये लिए गए और उसी कर्मचारी ने खून का नमूना लिया। सुभाष के मुताबिक, शाम को रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उस पर एमबीबीएस, एमडी पैथ डिग्री वाले चिकित्सक का नाम छपा था और डिजिटल हस्ताक्षर भी दर्ज था। रिपोर्ट के दूसरी ओर लैब इंचार्ज के नाम के सामने पेन से हस्ताक्षर किया गया था। चिकित्सक की मौजूदगी के बारे में पूछने पर कर्मचारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
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वहीं गांधीनगर निवासी मोहम्मद अलीम ने बताया कि उन्होंने अस्पताल चौराहा के निकट स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर अपने भाई का अल्ट्रासाउंड करवाया था। जिस पर चिकित्सक का हस्ताक्षर नहीं था। निजी चिकित्सक ने उसी रिपोर्ट के आधार पर दवा लिखी है। जबकि पवन शुक्ल ने बताया कि पिछले दिनों उनके पत्नी के ब्लड जांच की रिपोर्ट में भी पैथोलाॅजिस्ट चिकित्सक का डिजिटल हस्ताक्षर हुआ था। जबकि रिपोर्ट में वास्तविक हस्ताक्षर होना चाहिए।
लैब के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक कहीं और अपनी लैब संचालित करते हैं और यहां उनकी डिग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अल्ट्रासाउंड सेंटर भी सवालों के घेरे में
जिला अस्पताल से कैली मार्ग पर संचालित एक डायग्नोस्टिक सेंटर में भी रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ रिपोर्टों पर संबंधित चिकित्सक के हस्ताक्षर नहीं होते और डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए रिपोर्ट जारी कर दी जाती है। पिछले दिनों बिना हस्ताक्षर वाली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिए जाने को लेकर विवाद की बात भी सामने आई थी। इसी मार्ग पर एक निजी अस्पताल में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर में पिछले दिनों एक पुरुष के पेट में गर्भाशय होने की रिपोर्ट दिए जाने का मामला सामने आने की बात कही गई। इस पर विवाद हुआ था। हालांकि, मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और उसके निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दो दर्जन से अधिक जांच केंद्रों की भरमार
जिला अस्पताल के आसपास पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गेट नंबर एक के सामने कैली मार्ग, दक्षिण दरवाजा मार्ग और गेट संख्या दो व तीन के आसपास कई निजी जांच केंद्र संचालित हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ केंद्रों पर अस्पताल आने वाले मरीजों को जांच के लिए भेजा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सेंटरों पर मरीजों से जांच के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन पंजीकरण में दर्ज चिकित्सक की नियमित मौजूदगी स्पष्ट नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
चिकित्सकों ने पंजीकरण में डिग्री के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
पिछले एक वर्ष में 10 से अधिक पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और एमबीबीएस चिकित्सकों ने सीएमओ को पत्र देकर आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना उनकी डिग्री का इस्तेमाल कुछ सेंटरों के पंजीकरण में किया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को कुछ सेंटरों और अस्पतालों के पंजीकरण में संशोधन कराना पड़ा। इन शिकायतों से यह सवाल उठता है कि पंजीकरण के समय संबंधित चिकित्सकों की सहमति और उनकी वास्तविक उपलब्धता का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।
कोट
सभी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर पंजीकरण में उल्लिखित चिकित्सक की मौजूदगी अनिवार्य है। सेंटर पर संबंधित चिकित्सक का नाम भी प्रदर्शित होना चाहिए। यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ

बस अड्डा हमीरपुर में खराब पड़ी व्हीलचेयर। संवाद

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