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आईआरसीटीसी का नकली सॉफ्टवेयर बेचने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
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बस्ती : आईआरसीटीसी का नकी साॅफ्टवेयर बेचने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस, आरपीएफ और सीबीआई की ?
- फोटो : BASTI
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आईआरसीटीसी का नकली सॉफ्टवेयर बेचने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
- गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के सरगना हामिद अशरफ के पिता और भदोही का एक शख्स
- आरपीएफ की मदद से हर्रैया पुलिस ने पकड़ा, 12 करोड़ की कीमत के जमीन के
दस्तावेज और 90 लाख के बांड बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ई टिकट बनाने के लिए आईआरसीटीसी का नकली सॉफ्टवेयर बेचने वाले गिरोह के हामिद गिरोह दो सदस्यों को पुलिस, आरपीएफ और सीबीआई की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों को मंगलवार सुबह हर्रैया के मुरादीपुर चौराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। इसमें एक हामिद अशरफ का पिता है और दूसरा भदोही जिले का निवासी है।
पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एसपी हेमराज मीणा ने गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गिरोह के तीन सदस्यों को आठ दिसंबर 2019 को पकड़ा गया था। उनसे पूछताछ के आधार पर दो अन्य लोग पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ में दो नए नाम आए। इसमें एक सरगना हामिद अशरफ का पिता जमीरुल हसन उर्फ लल्ला निवासी रमवापुर कप्तानगंज और दूसरा गुर्गा भदोही जनपद के सुरियांव थानाक्षेत्र निवासी योगेंद्र विश्वकर्मा है। दोनों को मंगलवार सुबह पकड़ लिया गया। योगेंद्र सॉफ्टवेयर बेचकर मिली रकम लाकर हामिद के पिता लल्ला को नकद सौंप देता था। रकम से लल्ला जमीनें, मकान आदि खरीदकर निवेश करता था। कई रिश्तेदारों के नाम उसने जायदाद खरीद रखी है। मुंबई और दुबई में भी फ्लैट होने की जानकारी मिली है।
हामिद के घर-प्रतिष्ठानों पर दबिश
गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने हामिद के घर और प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। पुलिस को 12 करोड़ कीमत की रजिस्ट्रीशुदा जमीन के दस्तावेज, बैंक खातों में 90 लाख रुपये के बांड मिले हैं। 30 लाख रुपये बैक खाते में मिले। खाते को फ्रीज कर दिया गया। एसपी ने बताया कि संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अलावा बिना नंबर की कार, छह मोबाइल, डेबिट कार्ड, आधार कार्ड आदि भी बरामद किए गए हैं। एसपी ने बताया कि गैंगस्टर के तहत सभी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। एसपी ने वर्कआउट करने वाली टीम को 25 हजार रुपये पुरस्कार देने का ऐलान भी किया।
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काली कमाई खपाने को खोली थी कंपनी
ई-टिकट का फर्जी सॉफ्टवेयर बेचकर की गई काली कमाई को सफेद बनाने के लिए योगेंद्र विश्वकर्मा ने केवाईआर नाम से ब्राडबैंड कंपनी खोल रखी है। वह हामिद के रेड मिर्ची और एएनएमएस सॉफ्टवेयर को पूरे भारत में बेचकर जुटाई रकम कंपनी में डालता था। इसके साथ ही गोल्ड मीडिया नाम की कंपनी बनाकर अवैध रकम वैध करने में जुटा था।
इन्हें मिली कामयाबी
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम में काइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कपिल मुनि सिंह, सीबीआई गोरखपुर के निरीक्षक दशरथ प्रसाद, आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेंद्र यादव के अलावा एसओ हर्रैया सर्वेश राय, एसओ कप्तानगंज राज कुमार पांडेय, एसआई जितेंद्र सिंह और आरपीएफ के एएसआई रवींद्र सिंह शामिल रहे।
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- गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के सरगना हामिद अशरफ के पिता और भदोही का एक शख्स
- आरपीएफ की मदद से हर्रैया पुलिस ने पकड़ा, 12 करोड़ की कीमत के जमीन के
दस्तावेज और 90 लाख के बांड बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ई टिकट बनाने के लिए आईआरसीटीसी का नकली सॉफ्टवेयर बेचने वाले गिरोह के हामिद गिरोह दो सदस्यों को पुलिस, आरपीएफ और सीबीआई की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों को मंगलवार सुबह हर्रैया के मुरादीपुर चौराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। इसमें एक हामिद अशरफ का पिता है और दूसरा भदोही जिले का निवासी है।
पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एसपी हेमराज मीणा ने गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गिरोह के तीन सदस्यों को आठ दिसंबर 2019 को पकड़ा गया था। उनसे पूछताछ के आधार पर दो अन्य लोग पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ में दो नए नाम आए। इसमें एक सरगना हामिद अशरफ का पिता जमीरुल हसन उर्फ लल्ला निवासी रमवापुर कप्तानगंज और दूसरा गुर्गा भदोही जनपद के सुरियांव थानाक्षेत्र निवासी योगेंद्र विश्वकर्मा है। दोनों को मंगलवार सुबह पकड़ लिया गया। योगेंद्र सॉफ्टवेयर बेचकर मिली रकम लाकर हामिद के पिता लल्ला को नकद सौंप देता था। रकम से लल्ला जमीनें, मकान आदि खरीदकर निवेश करता था। कई रिश्तेदारों के नाम उसने जायदाद खरीद रखी है। मुंबई और दुबई में भी फ्लैट होने की जानकारी मिली है।
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हामिद के घर-प्रतिष्ठानों पर दबिश
गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने हामिद के घर और प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। पुलिस को 12 करोड़ कीमत की रजिस्ट्रीशुदा जमीन के दस्तावेज, बैंक खातों में 90 लाख रुपये के बांड मिले हैं। 30 लाख रुपये बैक खाते में मिले। खाते को फ्रीज कर दिया गया। एसपी ने बताया कि संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अलावा बिना नंबर की कार, छह मोबाइल, डेबिट कार्ड, आधार कार्ड आदि भी बरामद किए गए हैं। एसपी ने बताया कि गैंगस्टर के तहत सभी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। एसपी ने वर्कआउट करने वाली टीम को 25 हजार रुपये पुरस्कार देने का ऐलान भी किया।
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काली कमाई खपाने को खोली थी कंपनी
ई-टिकट का फर्जी सॉफ्टवेयर बेचकर की गई काली कमाई को सफेद बनाने के लिए योगेंद्र विश्वकर्मा ने केवाईआर नाम से ब्राडबैंड कंपनी खोल रखी है। वह हामिद के रेड मिर्ची और एएनएमएस सॉफ्टवेयर को पूरे भारत में बेचकर जुटाई रकम कंपनी में डालता था। इसके साथ ही गोल्ड मीडिया नाम की कंपनी बनाकर अवैध रकम वैध करने में जुटा था।
इन्हें मिली कामयाबी
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम में काइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कपिल मुनि सिंह, सीबीआई गोरखपुर के निरीक्षक दशरथ प्रसाद, आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेंद्र यादव के अलावा एसओ हर्रैया सर्वेश राय, एसओ कप्तानगंज राज कुमार पांडेय, एसआई जितेंद्र सिंह और आरपीएफ के एएसआई रवींद्र सिंह शामिल रहे।