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दो और स्परों को खतरा बढ़ा
अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 24 Jul 2016 11:17 PM IST
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खतरा बढ़ा।
- फोटो : अमर उजाला
घाघरा के जलस्तर में पिछले दो दिन से कमी हो रही है। रविवार को केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के मुताबिक शाम पांच बजे नदी खतरे के निशान 92.73 मीटर से 92.74 पर बह रही थी। नदी का जलस्तर स्थिर हो चुका है। इसके पहले नदी खतरे के निशान से 32 सेमी. ऊपर बह रही थी।
घाघरा के स्पॉट बदलने से कटान का खतरा बढ़ गया है। हर्रैया और सदर तहसील के कई इलाकों में बाढ़ का पानी हालांकि वापस लौट रहा है लेकिन गौरियानैन के पास ठोकर नं. 11 और 12 पर कटान का खतरा बढ़ गया था। प्रशासन ने राहत चौकियां प्रभावी कर दी थीं। बंधे पर लगातार निगरानी की जा रही थी। जलस्तर में कमी होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।लोलपुर- विक्रमजोत बंधे के पास के गांवों के खेतों से पानी वापस हो रहा है। इस क्षेत्र में फसलों को कोई विशेष क्षति नहीं पहुंची है। लेकिन विक्रमजोत-धुसवा(वीडी बांध) संवेदनशील बना हुआ है। इससे नदी किनारे कृषि योग्य जमीन में कटान से धारा में विलीन हो रही है। कारण नदी की धारा वीडी बांध के करीब पहुंचने का है। तटबंध के गांव टकटकवा, पहड़वापुर, गौरा, विशुनदासपुर, पारा और धरमूपुर एहतमाली के पास जबरदस्त कटान है। पारा गांव के मुकेश सिंह, विजई, रामशब्द, वृजेश सिंह के बताया की बाढ़ से अरहर व परवर की फसल नष्ट हो गई। किसानों का आर्थिक नुकसान हुआ।
नहीं मिली सहायता
अशोकपुर माझा के सुबिका बाबू, भुअरिया, सतहा, बलुईया गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिरे हैं। लोग आने जाने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। गांव के भीम सेन, लालचंद, राम बचन, तौलू, राजाराम ने बताया कि बाढ़ के पानी से अरहर व धान की फसल बर्वाद हो गई। लेखपाल दीनदयाल ने हर्रैया तहसील पर नुकसान की रिपार्ट भेज दिया। मगर अभी तक कोई सहायता नहीं मिला। बाढ़ से प्रभावित लोगों के रोजी, रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए गांव में दवा का छिड़काव नहीं किया गया।
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घाघरा के स्पॉट बदलने से कटान का खतरा बढ़ गया है। हर्रैया और सदर तहसील के कई इलाकों में बाढ़ का पानी हालांकि वापस लौट रहा है लेकिन गौरियानैन के पास ठोकर नं. 11 और 12 पर कटान का खतरा बढ़ गया था। प्रशासन ने राहत चौकियां प्रभावी कर दी थीं। बंधे पर लगातार निगरानी की जा रही थी। जलस्तर में कमी होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।लोलपुर- विक्रमजोत बंधे के पास के गांवों के खेतों से पानी वापस हो रहा है। इस क्षेत्र में फसलों को कोई विशेष क्षति नहीं पहुंची है। लेकिन विक्रमजोत-धुसवा(वीडी बांध) संवेदनशील बना हुआ है। इससे नदी किनारे कृषि योग्य जमीन में कटान से धारा में विलीन हो रही है। कारण नदी की धारा वीडी बांध के करीब पहुंचने का है। तटबंध के गांव टकटकवा, पहड़वापुर, गौरा, विशुनदासपुर, पारा और धरमूपुर एहतमाली के पास जबरदस्त कटान है। पारा गांव के मुकेश सिंह, विजई, रामशब्द, वृजेश सिंह के बताया की बाढ़ से अरहर व परवर की फसल नष्ट हो गई। किसानों का आर्थिक नुकसान हुआ।
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नहीं मिली सहायता
अशोकपुर माझा के सुबिका बाबू, भुअरिया, सतहा, बलुईया गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिरे हैं। लोग आने जाने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। गांव के भीम सेन, लालचंद, राम बचन, तौलू, राजाराम ने बताया कि बाढ़ के पानी से अरहर व धान की फसल बर्वाद हो गई। लेखपाल दीनदयाल ने हर्रैया तहसील पर नुकसान की रिपार्ट भेज दिया। मगर अभी तक कोई सहायता नहीं मिला। बाढ़ से प्रभावित लोगों के रोजी, रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए गांव में दवा का छिड़काव नहीं किया गया।
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