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अनसुनी की गुहार, चांदपुर के अस्तित्व पर संकट

Fri, 24 Aug 2018 12:13 AM IST
basti
basti Updated Fri, 24 Aug 2018 12:13 AM IST
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administration not lestened
बाढ़ के डर से गांव छोड़ते लोग। - फोटो : amar ujala
बस्ती। वीडी बांध के कटरिया-चांदपुर के तटवर्ती गांवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नदी खतरे के निशान 92.730 मीटर से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार को करीब 50 मीटर कटान पर नियंत्रण पाने में बाढ़ खंड और प्रशासन को पसीना छूट गया। जबकि दो किलोमीटर तक तटबंध अतिसंवेदनशील बना है। जिसकी बोल्डर से मरम्मतकी मांग के लिए गांव वालों ने धरना-प्रदर्शन तक किया था। लेकिन उनकी गुहार अनसुनी कर दी गई। 
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विक्रमजोत-धुसवा बांध का कटरिया-चांदपुर तटबंध अतिसंवेदनशील है। सरयू नदी की धारा तटबंध से टकरा रही है। यहां पिछले वर्ष भी कटान लगी थी। चांदपुर गांव की 400 की आबादी लगातार बाढ़ खंड और जिला प्रशासन से बोल्डर लगाकर बांध को सुरक्षित करने की मांग करता रहा है। जून में भी धरना-प्रदर्शन किया। लेेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। पिछला भुगतान नहीं होने  से बाढ़ खंड के ठेकेदार भी काम ठप कर दिए थे। डीएम डॉ. राजशेखर के हस्तक्षेप पर इस वर्ष मरम्मत का कार्य शुरू हुआ लेकिन बोल्डर नहीं ईंट रोड़े और मिट्टी भरी बोरियों से। जिसका परिणाम है कि बृहस्पतिवार सुबह बंधे की चौड़ाई का करीब 70 फीसदी हिस्सा 50 मीटर की लंबाई में नदी में समा गया। हो-हल्ला होने पर बाढ़ खंड ने बोल्डर डालकर किसी तरह कटान को नियंत्रित किया लेकिन खतरा अभी बरकरार है। क्योंकि कटरिया-चांदपुर तटबंध दो किलोमीटर तक जर्जर है। 
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प्रभावितोें को सुरक्षित जगह भेजा जा रहा है 
चांदपुर गांव नदी तटबंध के बाहर बांध से सटा है। इससे करीब 100 मीटर पर रामजानकी मार्ग है। गांव की आबादी 400 है। इनका अस्तित्व तटबंध पर निर्भर है। डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि जो गांव बांध के अंदर आते हैं उन्हीं को दूसरी जगह बसाया जा सकता है। फिलहाल, चांदपुर गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा है। भोजन, दवाएं, पानी, बिजली समेत सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। 
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मांगा था पांच करोड़, मिले सिर्फ 70 लाख 
दो किलोमीटर कटरिया-चांदपुर तटबंध अतिसंवेदनशील है। तटबंध का बेस सुरक्षित करने के लिए ईंट रोड़े बोरियों में भरकर और बोरियों को कैरट में डाला गया है। जबकि गांव के लोग बोल्डर से तटबंध को सुरक्षित करने के लिए धरना-प्रदर्शन करते रहे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह बजट का मामला है। मरम्मत के लिए पांच करोड़ रुपये की मांग की गई थी लेकिन सिर्फ 70 लाख ही मिले। इस संबंध में पूछे जाना पर डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि जिला प्रशासन के दिशा निर्देशन में बाढ़ खंड ने बोल्डर मंगाकर पिछले एक महीने से अलग-अलग स्थान पर बांध बचाने की कोशिश की है। बोल्डर के लिए बड़ी रकम चाहिए। मैंने इसे सरकार के संज्ञान में लाते हुए अनुरोध भी किया है। उम्मीद है कि अगले दो तीन दिनों में 40 से 50 लाख रुपये मिल जाएंगे।
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