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सरकारें बदलीं पर नहीं बदली कछार की तस्वीर

Wed, 22 Aug 2018 11:49 PM IST
Updated Wed, 22 Aug 2018 11:49 PM IST
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सरकारें बदलीं पर नहीं बदली कछार की तस्वीर
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एडीएम के आश्वासन पर माने बाढ़ प्रभावित
रिंगबांध बचाने का चल रहा था धरना
आश्वासन पर माने, स्थगित किया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। किशुनपुर-मोजपुर रिंगबांध बचाने के लिए मंगलवार सुबह से शुरू हुआ धरना बुधवार सुबह तक जारी रहा। धरने पर ग्रामीणों के साथ सपा नेता सिद्धार्थ सिंह बैठे रहे।
किशुनपुर, मोजपुर, उमरिया, रेवटिया, नाऊ का पुरवा, कर्मी गोसाईं आदि गांव के लोग रिगंबांध को बचाने के लिए शासन-प्रशासन से गुहार कर रहे हैं। धरने में शामिल विवेक यादव, प्रमुख के प्रतिनिधि राजेश यादव, अजय, आज्ञाराम, सुनील यादव, प्रधान के प्रतिनिधि कलैन्द्र यादव, सर्वदेव, रमेश यादव, अत्री दुबे, अभिषेक यादव, श्रवण उपाध्याय, झिन्ने लाल, रमेश चौबे, सुनील यादव, कन्हैया, प्रदीप आदि ने कहा कि तटबंध बचेगा तभी गांव बचेगा। धरने में दोपहर में एडीएम रमेश चंद, एसडीएम एसपी शुक्ल, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड डीके त्रिपाठी, बीडीओ दुबौलिया महेंद्र पाण्डेय, सीओ कलवारी अरविंद वर्मा व थाना प्रभारी पंकज गुप्ता पहुंचे। टकटकवा व दिलासपुरा गांव का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि दिलासपुरा गांववालों को जल्द ही सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर दिया जाएगा। गांव के छह परिवारों के पास तटबंध के पास जमीन है। वहीं, एक परिवार के लिए जमीन की तलाश जल्द की जाएगी। टकटकवा रिंग बांध को मजबूत किया जाएगा।
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बाढ़ खंड का नहीं है रिंगबांध: अधिशासी अभियंता
प्रशासनिक अमले ने किशुनपुर मोजपुर रिंग बाध का निरीक्षण किया। गांव वालों से बातचीत में कहा कि यह सिंचाई विभाग का बांध नही है। धरने में सम्मिलित लोग मयूस दिखे। सिद्धार्थ सिंह ने एडीएम से मांग की कि रिंग बांध पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया जाए। एडीएम ने तत्काल बीडीओ महेंद्र कुमार पाण्डेय कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड डीके त्रिपाठी ने बताया कि विभाग का बंधा नही हैं। सिर्फ टेक्निकल सुझाव दे सकता हूं। ऐसे में 12 गांवों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। सरयू रिंग बाध को अपनी धारा में समाहित करने को आतुर है।धरने की अगुवाई कर रहे सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि इस धरने को सिर्फ स्थगित किया गया है।
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घटने लगी सरयू, खतरा बरकरार
खतरे निशान से अभी भी 51 सेंटीमीटर ऊपर है नदी
तटबंध भी सामान्य, कटान का सिलसिला जारी
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर घटने लगा है। बुधवार को सरयू खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर रही। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर हालात सामान्य रहे। लेकिन खेती योग्य भूमि कटने का सिलसिला अभी बरकरार है।
तटबंध और नदी के बीच बसे जलमग्न गांव सुविखा बाबू, टेड़वा, खजांची पुरवा के ग्रामीण अभी भी नाव से आ जा रहे हैं। विशुनदासपुर का पुरवा, अशोकपुर के तीन पुरवे बरदिया लोहार, पहियामाफी, पूरेमोतीराम से पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है। साथ ही टकटवा रिंगबांध पर भी पानी घटने से दबाव कम हो रहा है। जबकि दिलासपुरा गांव के पास धीमी गति से कटान अभी जारी है।

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सरकारें बदलीं पर नहीं बदली कछार की तस्वीर
हर वर्ष सरयू नदी यहां मचाती है तबाही
खानाबदोश जिंदगी जीना बनी मजबूरी
अमर उजाला ब्यूरो
छावनी। आजादी के बाद से कई सरकारें आईं और चली गईं। तमाम विकास योजनाएं शुरू हुईं और समाप्त हो गईं। समय बदला, मौसम बदला, लेकिन विक्रमजोत ब्लॉक के वीडी बांध के दक्षिणांचल में सरयू के कछार में बसे ग्रामीणों की तस्वीर एवं तकदीर नहीं बदली।
ग्रामीणों के अनुसार प्रकृति हर वर्ष इस इलाके को तबाह कर देती है। बाढ़ के चार माह तक लोग खानाबदोश की जिंदगी जीते हैं। सरयू नदी की उफनती धारा जहां धान, दलहन, मक्का की फसलों को अपने आगोश में लेकर तबाह कर देती है, वहीं खेत का सीमांकन भी गड़बड़ा जाता है। हालांकि, बदतर जिंदगी जी रहे यहां के ग्रामीण शासन प्रशासन ज्यादा इसके लिए अपने किस्मत को दोषी ठहराते हैं, जो कि इस कछार में जन्म हुआ। माझा वासियों ने अपनी समस्या को कुछ यूं बयां की।
दुधौरा गांव के सुमिरन, विनोद सिंह कुकरहा गांव के शत्रुघ्न, खेलावन मड़ना माझा के पंकज सिंह, रामप्रसाद सहजौरा के गुलप्रकाश, संतराम भगलाजोत के पतिराम, रामशंकर पूरे रामसिंह के सरजू सिंह, जगेश्ववर आदि गावों के ग्रामीणों की समस्या एक जैसी है। इन लोगों के अनुसार साल की आठ माह तक जीतोड़ मेहनत से की गई कमाई बरसात के चार माह गुजारने के लिए कम पड़ जाती है। हर वर्ष बरसात शुरू होते बाढ़ की तबाही धान, मक्का, दलहन, गन्ना की फसलों को चौपट कर देती है। इसकी भरपाई करने में प्रशासन कतराता है। लोगों के अनुसार प्रशासन की नजर में यह मौसम बरसात का रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ हटने के बाद खेतों को खोजने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है, क्योंकि अधिकांश भू-भाग नदी में चला जाता है तथा नदी के कुछ भाग में रेत छूट जाता है। इससे खेतों के स्वरूप में तब्दीली हो जाती है। माझावासी बताते हैं कि बहुत बड़ी समस्या जंगली जानवरों से है। अब गाय, बछड़े, नीलगाय एवं बड़ेला सुअर झुंड के रूप में रह रहे हैं, जो तैयार फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं। पशुपालन, कसेरी ( कास) की कटाई कर उसे बेचने तथा गेहूं की खेती ही आय का मुख्य स्रोत है। यहां के लोग धान, दलहन एवं मक्का आदि की खेती करने की साहस नहीं जुटा पाते हैं। यहां आवास, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीण इन समस्याओं की भी मुख्य वजह प्राकृतिक आपदा को ही मान रहे हैं।


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उतरने लगा बाढ़ का पानी, कटान जारी
दलदली जमीन होने से नदी तेेजी से कर रही कटान
गांव वालों की मुश्किलें कम हुईं, बीमारियों का भय
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर बुधवार से कम होने लगा। पानी कम होने से नदी के किनारे के गांवों में दुश्वारियां भी धीरे धीरे कम होने लगी है लेकिन बीमारी का खतरा बढ़ गया है।

सरयू नदी के बाढ़ का पानी एक हफ्ते से सड़क पर भरे होने से कल्यानपुर गांव का रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया। दूसरे गांवों के रास्ते में कीचड़ फैल गया। लेकिन दलदली जमीन होने से कटान का खतरा बढ़ गया है। केशवपुर से लेकर संदलपुर गांव तक करीब आधा दर्जन गांव कटान के मुहाने पर हैं। जिनमें केशवपुर, भरथापुर, कल्यानपुर और सहजौरा पाठक गांवों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। जहां केशवपुर में नदी कटान कर रही नदी हाईवे व गांव की ओर बढ़ रही है, वहीं, भरथापुर में बाघानाला के पास कटान तेज चल रही है। मंदिर का अवशेष भी नदी में विलीन हो रहा है। भरथापुर गांव की ओर से नदी बाघानाला की ओर से कटान कर रही है। 15 परिवारों के इस गांव पर संकट गहराता जा रहा है। वहीं, कल्यानपुर में नदी स्कूल के पास पहुंच गई है। पड़ाव और सहजौरा के पास नदी की धारा सीधे टकरा रही है। गांव के संजय यादव प्रधान, ननकू सिंह, केशवचन्द पाण्डेय, जग्गीलाल, शीतल, राम चन्दर, मंगल प्रसाद, सुशील कुमार, उमेश पाण्डेय सहित तमाम ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाढ़ व कटान होती है तब तक ही तटबंध व ठोकर या फिर विस्थापन की बात होती है।
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