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प्रदेश की अव्वल आईटीआई बदहाली का शिकार
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:27 PM IST
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प्रदेश की अव्वल आईटीआई बदहाली का शिकार
बस्ती।
प्रदेश का अव्वल और वेस्ट प्रधानाचार्य का खिताब दिलाने वाले राजकीय आईटीआई का बुरा हाल है। यहां प्रशिक्षण लेने वालों और अनुदेशकों में अनुशासन का अभाव है। कोई क्लास में मोबाइल चला रहा तो मैदान में लड़के और लड़कियां आपस में बातचीत कर रहते हैं। पढ़ाई से अधिक मोबाइल और गप्प लगने में समय व्यतीत कर रहे हैं।
पिकनिक का अड्डा बन गए आईटीआई में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। पूरे परिसर में गंदगी का अंबार है। अधिकतर मशीनें खराब पड़ी हैं। कई क्लास में तो पंखें ही नहीं हैं। एलईडी के स्थान पर दो सौ वॉट के बल्ब का इस्तेमाल हो रहा। सबसे खराब स्थिति 10 साल पहले जर्जर हो चुके भवन का है, जिसमें 300 लड़के और लड़कियां प्रशिक्षण ले रहे हैं। वायरमैन ट्रेड में बच्चे मिले मगर अनुदेशक नहीं मिले। फीटर ट्रेड के बच्चे घुटने तक पानी में प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं। खेल का मैदान शौचालय बन गया है। पांच साल से अनुदेशक और फोरमैन सहित कुल 18 पद खाली हैं।
लगभग 51 साल पहले बना जिला का पहला आईटीआई लगभग 16 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मशीनें रखरखाव के अभाव में खराब होती जा रही है। कई तो सालों से चली ही नहीं है, जिसके चलते मशीनों पर जाले लग गए हैं। फीटर ट्रेड के लड़के और लड़कियां कुर्सी के स्थान पर मेज को गिराकर उस पर बैठकर प्रशिक्षण ले रही हैं। यहां की ड्रिल मशीन पिछले दो माह से खराब है।
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पिकनिक सेंटर बना आईटीआई
आईटीआई परिसर लड़के और लड़कियों का पिकनिक स्थल सा बन गया है। परिसर में घुसते ही कई प्रशिक्षणार्थी जोड़ों में बात करते मिल जाएंगे। पूछने पर बताया कि अनुदेशक के न रहने पर चले आए।
क्लास में मोबाइल का इस्तेमाल
लड़के और लड़कियां क्लास के बाहर ही नहीं क्लास में ही मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं। इस तरह की लगभग छह लड़कियों को अनावश्यक रूप में बात करती मिलीं। अनुदेशक भी बात करते मिले।
पेयजल का अभाव
परिसर में पेयजल का अभाव है, जो है भी वह काफी दिनों से खराब है, अधिकांश लड़कियों को बोतल में दूर से पेयजल लाते देखा गया। बताया कि हैंडपंप खराब होने से दूर से पेयजल लाने जाना पड़ता है।
गंदगी का अंबार
पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लगता ही नहीं इस आईटीआई को प्रदेश का बेहतर आईटीआई का पुरस्कार मिला हो। परिसर के चारों ओर बड़े-बड़े झाड़ हुए हैं। मानों वर्षों से सफाई नहीं हुई है। यहां पर मोदी और योगी के स्वच्छता अभियान का कोई मतलब नहीं।
गर्मी में प्रशिक्षण ले रहे
सिलाई और कटिंग ट्रेड में बिजली का कनेक्शन तो है, मगर पंखें नहीं लगाए गए, जबकि अनुदेशक के बैठने वाले स्थान पंखा लगा हुआ था, लड़कियों ने बताया कि मजबूरी में इस गर्मी में बिना पंखे की ट्रेनिंग ले रही हैं।
बिजली का हो रहा दुरुपयोग
आईटीआई में बिजली का खूब दुरुपयोग हो रहा है। जहां पर एलईडी का बल्ब लगना चाहिए वहां पर सौ और दो सौ वॉट बल्ब का इस्तेमाल हो रहा है। इससे सरकार के बिजली बचाने की मंशा को धक्का तो लग ही रहा है, साथ ही राजस्व हानि भी हो रही है।
घोषित जर्जर भवन में हो रही पढ़ाई
इस आईटीआई परिसर में संतकबीरनगर के हैंसर आईटीआई का भी संचालन होता है। इस भवन को सात साल पहले ही जर्जर होने के कारण खतरनाक भवन घोषित हो चुका है। बावजूद इस भवन में तीन को ट्रेनिंग दिया जा रहा है, वह भी बरामदे में।
छात्रावास बना ट्रेनिंग सेंटर
जर्जर हो चुके पुराने छात्रावास को जबरिया ट्रेनिंग सेंटर बना दिया गया। यहां पर तीन सौ लड़के और लड़कियों को जान की परवाह किए बिना प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जगह-जगह भवन की दीवारें टूट चुकी ह्रैं। छत लटक चुकी है, कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
अधिकतर मशीनें खराब
फीटर, टर्नर और मशीनिस्ट ट्रेड में लगी कीमती मशीनें खराब हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश मशीनें वर्षों से खराब हैं। ट्रेनिंग करने में दिक्कतें हो रही है। कई मशीनें तो लाइन से खराब पड़ी हुई है। जंग खा चुकी हैं। जाले पड़ गए हैं।
वर्षों से अनुदेशक और फोरमैन का अभाव
आईटीआई में ड्राइंग, मैथ, इलेक्ट्रीशियन और फीटर के 14 अनुदेशकों की तैनाती पांच साल से नहीं हुए, जिसके चलते ट्रेनिंग अधूरी रह जा रही हैं। दो फोरमैन का भी अभाव है।
बेहतर बनाने का प्रयास
सरकारी कार्य से बाहर रहे प्रधानाचार्य बीबी सिंह ने बताया कि इस आईटीआई को प्रदेश का अव्वल आईटीआई का दर्जा मिल चुका है। बताया कि जर्जर हो चुके भवन में संचालित हो रहे हैंसर बाजार के आईटीआई के बारे हैंसर के प्रधानाचार्य, वहां के डीएम और विभाग के अधिकारियों को लिखा जा चुका है, जबकि हैंसर में आईटीआई का नया भवन बन चुका है। बावजूद नये भवन में नहीं ले जाया जा रहा है।
झाड़ियों में छिप गई अस्पताल की सड़क
भानपुर।
बस्ती-डुमरियागंज मार्ग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर जाने वाली एक किलोमीटर तक की सड़क झाड़ियों में छिप गई है। अस्पताल आने जाने वाले मरीजों और राहगीरों के लिए दुर्घटना के रूप में नई मुसीबत खड़ी हो सकती है।
अस्पताल के समीप और भी स्थिति खराब है। झाड़ियों के बीच सड़क का आखिरी हिस्सा दिखाई ही नहीं देता है। इससे वाहनों के सड़क किनारे बने गड्ढे में गिरने का खतरा बना रहता है। सड़क की बदहाली पर रामसरन, गौकरन प्रसाद, राजू, संजय, अशोक कुमार, हरिप्रकाश, राजाराम शर्मा, विजय कुमार, अमर नाथ ने सड़क की साफ-सफाई कराने की मांग की है।
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प्रदेश की अव्वल आईटीआई बदहाली का शिकार
बस्ती।
प्रदेश का अव्वल और वेस्ट प्रधानाचार्य का खिताब दिलाने वाले राजकीय आईटीआई का बुरा हाल है। यहां प्रशिक्षण लेने वालों और अनुदेशकों में अनुशासन का अभाव है। कोई क्लास में मोबाइल चला रहा तो मैदान में लड़के और लड़कियां आपस में बातचीत कर रहते हैं। पढ़ाई से अधिक मोबाइल और गप्प लगने में समय व्यतीत कर रहे हैं।
पिकनिक का अड्डा बन गए आईटीआई में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। पूरे परिसर में गंदगी का अंबार है। अधिकतर मशीनें खराब पड़ी हैं। कई क्लास में तो पंखें ही नहीं हैं। एलईडी के स्थान पर दो सौ वॉट के बल्ब का इस्तेमाल हो रहा। सबसे खराब स्थिति 10 साल पहले जर्जर हो चुके भवन का है, जिसमें 300 लड़के और लड़कियां प्रशिक्षण ले रहे हैं। वायरमैन ट्रेड में बच्चे मिले मगर अनुदेशक नहीं मिले। फीटर ट्रेड के बच्चे घुटने तक पानी में प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं। खेल का मैदान शौचालय बन गया है। पांच साल से अनुदेशक और फोरमैन सहित कुल 18 पद खाली हैं।
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लगभग 51 साल पहले बना जिला का पहला आईटीआई लगभग 16 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मशीनें रखरखाव के अभाव में खराब होती जा रही है। कई तो सालों से चली ही नहीं है, जिसके चलते मशीनों पर जाले लग गए हैं। फीटर ट्रेड के लड़के और लड़कियां कुर्सी के स्थान पर मेज को गिराकर उस पर बैठकर प्रशिक्षण ले रही हैं। यहां की ड्रिल मशीन पिछले दो माह से खराब है।
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पिकनिक सेंटर बना आईटीआई
आईटीआई परिसर लड़के और लड़कियों का पिकनिक स्थल सा बन गया है। परिसर में घुसते ही कई प्रशिक्षणार्थी जोड़ों में बात करते मिल जाएंगे। पूछने पर बताया कि अनुदेशक के न रहने पर चले आए।
क्लास में मोबाइल का इस्तेमाल
लड़के और लड़कियां क्लास के बाहर ही नहीं क्लास में ही मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं। इस तरह की लगभग छह लड़कियों को अनावश्यक रूप में बात करती मिलीं। अनुदेशक भी बात करते मिले।
पेयजल का अभाव
परिसर में पेयजल का अभाव है, जो है भी वह काफी दिनों से खराब है, अधिकांश लड़कियों को बोतल में दूर से पेयजल लाते देखा गया। बताया कि हैंडपंप खराब होने से दूर से पेयजल लाने जाना पड़ता है।
गंदगी का अंबार
पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लगता ही नहीं इस आईटीआई को प्रदेश का बेहतर आईटीआई का पुरस्कार मिला हो। परिसर के चारों ओर बड़े-बड़े झाड़ हुए हैं। मानों वर्षों से सफाई नहीं हुई है। यहां पर मोदी और योगी के स्वच्छता अभियान का कोई मतलब नहीं।
गर्मी में प्रशिक्षण ले रहे
सिलाई और कटिंग ट्रेड में बिजली का कनेक्शन तो है, मगर पंखें नहीं लगाए गए, जबकि अनुदेशक के बैठने वाले स्थान पंखा लगा हुआ था, लड़कियों ने बताया कि मजबूरी में इस गर्मी में बिना पंखे की ट्रेनिंग ले रही हैं।
बिजली का हो रहा दुरुपयोग
आईटीआई में बिजली का खूब दुरुपयोग हो रहा है। जहां पर एलईडी का बल्ब लगना चाहिए वहां पर सौ और दो सौ वॉट बल्ब का इस्तेमाल हो रहा है। इससे सरकार के बिजली बचाने की मंशा को धक्का तो लग ही रहा है, साथ ही राजस्व हानि भी हो रही है।
घोषित जर्जर भवन में हो रही पढ़ाई
इस आईटीआई परिसर में संतकबीरनगर के हैंसर आईटीआई का भी संचालन होता है। इस भवन को सात साल पहले ही जर्जर होने के कारण खतरनाक भवन घोषित हो चुका है। बावजूद इस भवन में तीन को ट्रेनिंग दिया जा रहा है, वह भी बरामदे में।
छात्रावास बना ट्रेनिंग सेंटर
जर्जर हो चुके पुराने छात्रावास को जबरिया ट्रेनिंग सेंटर बना दिया गया। यहां पर तीन सौ लड़के और लड़कियों को जान की परवाह किए बिना प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जगह-जगह भवन की दीवारें टूट चुकी ह्रैं। छत लटक चुकी है, कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
अधिकतर मशीनें खराब
फीटर, टर्नर और मशीनिस्ट ट्रेड में लगी कीमती मशीनें खराब हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश मशीनें वर्षों से खराब हैं। ट्रेनिंग करने में दिक्कतें हो रही है। कई मशीनें तो लाइन से खराब पड़ी हुई है। जंग खा चुकी हैं। जाले पड़ गए हैं।
वर्षों से अनुदेशक और फोरमैन का अभाव
आईटीआई में ड्राइंग, मैथ, इलेक्ट्रीशियन और फीटर के 14 अनुदेशकों की तैनाती पांच साल से नहीं हुए, जिसके चलते ट्रेनिंग अधूरी रह जा रही हैं। दो फोरमैन का भी अभाव है।
बेहतर बनाने का प्रयास
सरकारी कार्य से बाहर रहे प्रधानाचार्य बीबी सिंह ने बताया कि इस आईटीआई को प्रदेश का अव्वल आईटीआई का दर्जा मिल चुका है। बताया कि जर्जर हो चुके भवन में संचालित हो रहे हैंसर बाजार के आईटीआई के बारे हैंसर के प्रधानाचार्य, वहां के डीएम और विभाग के अधिकारियों को लिखा जा चुका है, जबकि हैंसर में आईटीआई का नया भवन बन चुका है। बावजूद नये भवन में नहीं ले जाया जा रहा है।
झाड़ियों में छिप गई अस्पताल की सड़क
भानपुर।
बस्ती-डुमरियागंज मार्ग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर जाने वाली एक किलोमीटर तक की सड़क झाड़ियों में छिप गई है। अस्पताल आने जाने वाले मरीजों और राहगीरों के लिए दुर्घटना के रूप में नई मुसीबत खड़ी हो सकती है।
अस्पताल के समीप और भी स्थिति खराब है। झाड़ियों के बीच सड़क का आखिरी हिस्सा दिखाई ही नहीं देता है। इससे वाहनों के सड़क किनारे बने गड्ढे में गिरने का खतरा बना रहता है। सड़क की बदहाली पर रामसरन, गौकरन प्रसाद, राजू, संजय, अशोक कुमार, हरिप्रकाश, राजाराम शर्मा, विजय कुमार, अमर नाथ ने सड़क की साफ-सफाई कराने की मांग की है।