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नगर पालिका के करोड़ों की जमीन का कौड़ियों में सौदा
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:44 PM IST
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बस्ती। यकीन नहीं होगा, मगर यह बिल्कुल सही है कि नगर पालिका परिषद के करोड़ों की जमीन को कौड़ियों में गुपचुप ढंग से बेच दिया गया है। जमीन के इस धंधे में भू-माफिया ने नगर पालिका के जिम्मेदारों से साठगांठ कर बेशकीमती जमीन को दूसरों को कब्जा दिला दिया है। इसकी भी पूरी रणनीति बनाकर नगर पालिका के रिकॉर्ड ही गायब करा दिए हैं। इसका पर्दाफाश तब हुआ जब शहर में स्थित पुराने चुंगी घर को न्यायालय में चैलेंज दिया गया और पालिका के अभिलेख तलब किए गए। पता चला कि उस चुंगी घर का पालिका में कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसकी भनक लगते ही जिम्मेदारों को सांप सूंघ गया है।
शहर में पालिका के जमीन की लंबी फेहरस्ति है। वर्ष नब्बे से पहले यहां नगर पालिका ने अपनी जमीन में अमहट, कटरा, रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा, बांसी रोड पांडेय बाजार, मेहदावल रोड व डुमरियागंज रोड पर चुंगी घर बनवाए थे। इन चुंगीघरों पर अब किसी और का कब्जा है। अस्पताल चौराहे पर स्थित चुंगीघर पर कब्जा करने वाले ने इसे अपना बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद पालिका के जिम्मेदारों की नींद टूटी, जब इस चुंगी घर के बारे में अभिलेख तलाशे जाने लगे तो वे रिकॉर्ड में नहीं मिले। इन रिकॉर्डों को किसने गायब कर दिया अब इसकी जांच होने लगी है। इसी प्रकार पुरानी बस्ती स्थित कांजी हाउस व सब्जी मंडी, तुरकहिया व त्रिपाठी गली की जमीन, भैंसाखाना की जमीन सहित कई बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है। इसे खाली करवाना नगर पालिका के लिए मुश्किल है।
पालिका के सूत्र बताते हैं कि चुंगीघरों के निर्माण के रिकॉर्ड आखिर गायब कैसे हो गए, क्योंकि जब इसका निर्माण हुआ होगा उस समय शासन से भवन की स्वीकृति ली गई होगी, धन भी तय हुआ होगा। इसके बाद नक्शा बना कर इसका निर्माण कराया गया होगा। इन सवालों का जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि चुंगीघर के रिकॉर्ड के लिए मुकदमा देख रहे संबंधित कर्मी ने यह संज्ञान में दिया है कि कोर्ट ने अभिलेख तलब किए हैं, मगर यहां पालिका में कोई अभिलेख नहीं है। अब पालिका के सभी जमीनों का अभिलेखों की जांच कराई जाएगी। यदि इन रिकॉर्डों को गायब करने में किसी की भी भूमिका पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रशासन व शासन को भी लिखा जाएगा।
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शहर में पालिका के जमीन की लंबी फेहरस्ति है। वर्ष नब्बे से पहले यहां नगर पालिका ने अपनी जमीन में अमहट, कटरा, रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा, बांसी रोड पांडेय बाजार, मेहदावल रोड व डुमरियागंज रोड पर चुंगी घर बनवाए थे। इन चुंगीघरों पर अब किसी और का कब्जा है। अस्पताल चौराहे पर स्थित चुंगीघर पर कब्जा करने वाले ने इसे अपना बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद पालिका के जिम्मेदारों की नींद टूटी, जब इस चुंगी घर के बारे में अभिलेख तलाशे जाने लगे तो वे रिकॉर्ड में नहीं मिले। इन रिकॉर्डों को किसने गायब कर दिया अब इसकी जांच होने लगी है। इसी प्रकार पुरानी बस्ती स्थित कांजी हाउस व सब्जी मंडी, तुरकहिया व त्रिपाठी गली की जमीन, भैंसाखाना की जमीन सहित कई बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है। इसे खाली करवाना नगर पालिका के लिए मुश्किल है।
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पालिका के सूत्र बताते हैं कि चुंगीघरों के निर्माण के रिकॉर्ड आखिर गायब कैसे हो गए, क्योंकि जब इसका निर्माण हुआ होगा उस समय शासन से भवन की स्वीकृति ली गई होगी, धन भी तय हुआ होगा। इसके बाद नक्शा बना कर इसका निर्माण कराया गया होगा। इन सवालों का जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि चुंगीघर के रिकॉर्ड के लिए मुकदमा देख रहे संबंधित कर्मी ने यह संज्ञान में दिया है कि कोर्ट ने अभिलेख तलब किए हैं, मगर यहां पालिका में कोई अभिलेख नहीं है। अब पालिका के सभी जमीनों का अभिलेखों की जांच कराई जाएगी। यदि इन रिकॉर्डों को गायब करने में किसी की भी भूमिका पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रशासन व शासन को भी लिखा जाएगा।
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