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फुटहिया में बार-बार फेल हुई इंजीनियरिंग
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Wed, 15 Aug 2018 12:20 AM IST
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इस फ्लाईओवर पर की खुदकुशी
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर अमहट पुल से संसारपुर-फुटहिया के बीच सबसे बड़ा डेंजर जोन बन चुका है। लगातार हादसों और उनमें मौतों का सिलसिला तेज होने पर भूतल परिवहन मंत्रालय में खलबली तो मची, लेकिन घटनाएं रोकने की पहल के बजाय जिम्मेदार टालते रहे।
जानकारों का कहना है कि फुटहिया में फोरलेन की इंजीनियरिंग बार-बार फेल हुई। कभी रोड की गलत डिजाइन बनाकर इंजीनियरों ने फजीहत कराई तो कभी घटिया कार्य कराने वाले ठेकेदारों ने चपत लगाई। रही सही कसर 11 अगस्त को निर्माणाधीन फ्लाईओवर ढहने से पूरी हो गई। हाईवे अथॉरिटी की इंजीनियरिंग फुटहिया के पास फेल न होती तो बार-बार रोड की डिजाइन में फेरबदल न करनी पड़ती।
सड़क का नक्शा बनाने में हुई चूक लगातार हादसों के बाद समझ में आई। फुटहिया से अमहट पुल के बीच कई वर्षों तक जिले के दक्षिण भाग के लोगों को उल्टी लेन से होकर आना पड़ता था। जिसके कारण रोज सड़क हादसे होने लगे। तब राहगीरों के लिए बिना फोरलेन पर चढ़े बगल से गुजरने के लिए पीडब्लूडी ने अपनी सड़क बनाई। मगर एक ही वर्ष के भीतर प्लान बदल गया और सवा करोड़ की लागत से बनी सड़क ध्वस्त करनी पड़ी।
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शुरुआत में वहां कंक्रीट की दो किलोमीटर सड़क बनाई गई थी। इसे ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के दबाव में इसलिए तोड़ना पड़ा, क्योंकि ट्रक व बस मालिक आरसीसी रोड पर ज्यादा टायर घिसने की दलील देने लगे थे। तब आरसीसी तोड़कर डामर रोड बनी। उसके तैयार होते ही फ्लाईओवर का काम शुरू हो गया, जिसके कारण पूरा क्षेत्र 2015 से अस्त-व्यस्त है। एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के परियोजना प्रबंधक एके कुशवाहा का कहना है कि अथॉरिटी सड़क सुरक्षा को लेकर कई उपाय कर रही है, जिससे यात्रा सुरक्षित और सुगम हो, हादसों में कमी आए। आसपास के नागरिकों के मुताबिक ऐसा कोई दिन ही नहीं गुजरता, जब वहां जाम न लगता हो। डिवाइडर के दोनों तरफ जाली और बीच में हरियाली के लिए पौधे लगाने थे। लेकिन अब उधर से गुजरने वाले हाईवे के मुसाफिर प्राधिकरण को कोसते हुए आगे बढ़ जाते हैं।
फोरलेन सुरक्षा के मानक
- डिवाइडर पर दोनों तरफ जाली बीच में हरियाली हो।
- फोरलेन के दोनों तरफ क्रैश बैरियर लगाए जाएं।
- सड़क का चिह्नांकन-स्ट्रिप मार्किंग होनी चाहिए।
- गति सीमा के साइन ग्लो बोर्ड लगे होने चाहिए।
- जंक्शन की उपयुक्त डिजाइन हो और कैट्स आई लगे।
- लेन स्पष्ट करने के लिए समानांतर रिफ्लेक्टर लगे।
- पर्याप्त रोशनी और तय दूरी पर टेलीफोन बूथ हो।
- टोल प्लाजा पर एंबुलेंस, क्रेन व हाईवे पेट्रोलिंग कार मौजूद रहे।
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जानकारों का कहना है कि फुटहिया में फोरलेन की इंजीनियरिंग बार-बार फेल हुई। कभी रोड की गलत डिजाइन बनाकर इंजीनियरों ने फजीहत कराई तो कभी घटिया कार्य कराने वाले ठेकेदारों ने चपत लगाई। रही सही कसर 11 अगस्त को निर्माणाधीन फ्लाईओवर ढहने से पूरी हो गई। हाईवे अथॉरिटी की इंजीनियरिंग फुटहिया के पास फेल न होती तो बार-बार रोड की डिजाइन में फेरबदल न करनी पड़ती।
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सड़क का नक्शा बनाने में हुई चूक लगातार हादसों के बाद समझ में आई। फुटहिया से अमहट पुल के बीच कई वर्षों तक जिले के दक्षिण भाग के लोगों को उल्टी लेन से होकर आना पड़ता था। जिसके कारण रोज सड़क हादसे होने लगे। तब राहगीरों के लिए बिना फोरलेन पर चढ़े बगल से गुजरने के लिए पीडब्लूडी ने अपनी सड़क बनाई। मगर एक ही वर्ष के भीतर प्लान बदल गया और सवा करोड़ की लागत से बनी सड़क ध्वस्त करनी पड़ी।
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शुरुआत में वहां कंक्रीट की दो किलोमीटर सड़क बनाई गई थी। इसे ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के दबाव में इसलिए तोड़ना पड़ा, क्योंकि ट्रक व बस मालिक आरसीसी रोड पर ज्यादा टायर घिसने की दलील देने लगे थे। तब आरसीसी तोड़कर डामर रोड बनी। उसके तैयार होते ही फ्लाईओवर का काम शुरू हो गया, जिसके कारण पूरा क्षेत्र 2015 से अस्त-व्यस्त है। एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के परियोजना प्रबंधक एके कुशवाहा का कहना है कि अथॉरिटी सड़क सुरक्षा को लेकर कई उपाय कर रही है, जिससे यात्रा सुरक्षित और सुगम हो, हादसों में कमी आए। आसपास के नागरिकों के मुताबिक ऐसा कोई दिन ही नहीं गुजरता, जब वहां जाम न लगता हो। डिवाइडर के दोनों तरफ जाली और बीच में हरियाली के लिए पौधे लगाने थे। लेकिन अब उधर से गुजरने वाले हाईवे के मुसाफिर प्राधिकरण को कोसते हुए आगे बढ़ जाते हैं।
फोरलेन सुरक्षा के मानक
- डिवाइडर पर दोनों तरफ जाली बीच में हरियाली हो।
- फोरलेन के दोनों तरफ क्रैश बैरियर लगाए जाएं।
- सड़क का चिह्नांकन-स्ट्रिप मार्किंग होनी चाहिए।
- गति सीमा के साइन ग्लो बोर्ड लगे होने चाहिए।
- जंक्शन की उपयुक्त डिजाइन हो और कैट्स आई लगे।
- लेन स्पष्ट करने के लिए समानांतर रिफ्लेक्टर लगे।
- पर्याप्त रोशनी और तय दूरी पर टेलीफोन बूथ हो।
- टोल प्लाजा पर एंबुलेंस, क्रेन व हाईवे पेट्रोलिंग कार मौजूद रहे।