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सहखातेदारों का नाम अंकित करने की योजना पर लगा ग्रहण
Updated Wed, 28 Jun 2017 05:39 PM IST
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खतौनी में सहखातेदारों के जमीनों का अंश अंकित करने वाली योजना फेल होती नजर आ रही है। राजस्व परिषद ने अभी तक जिले को आकार-पत्र ही उपलब्ध नहीं कराया, जिसके चलते अंकित होने का काम अधर में लटका हुआ है। कुल 598 खतौनियों को आनलाइन करना है। डीएम की ओर से आकार पत्र उपलब्ध कराने के लिए राजस्व परिषद को लिखा गया है।
राजस्व परिषद की इस महत्वपूर्ण योजना को परवान चढ़ने में राजस्व परिषद ही बाधक बना हुआ है। जो आकार-पत्र एक माह पहले जिले को उपलब्ध करा देना चाहिए उसे अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके चलते खतौनियों में सहखातेदारों का नाम उनका अंश अंकित करने का कार्य शुरू नहीं हो सका। जिले में इस योजना के तहत 598 खतौनियों में लगभग पांच लाख सहखातेदारों का अंश अंकन होना है। इनमें हर्रैया तहसील के 266, बस्ती सदर तहसील के 171, रूधौली के 88 और भानपुर तहसील के 73 खतौनियों में सहखातेदारों के जमीनों का अंश आनलाइन होना है। इस योजना के पूरी तरह लागू हो जाने से राजस्व वाद में भारी कमी आएगी। आपसी घरेलू विवाद समाप्त होंगे। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है कि अब सहखातेदारों को पता होगा कि उसके हिस्से में कितनी जमीन है, और कहां पर है।
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राजस्व परिषद की इस महत्वपूर्ण योजना को परवान चढ़ने में राजस्व परिषद ही बाधक बना हुआ है। जो आकार-पत्र एक माह पहले जिले को उपलब्ध करा देना चाहिए उसे अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके चलते खतौनियों में सहखातेदारों का नाम उनका अंश अंकित करने का कार्य शुरू नहीं हो सका। जिले में इस योजना के तहत 598 खतौनियों में लगभग पांच लाख सहखातेदारों का अंश अंकन होना है। इनमें हर्रैया तहसील के 266, बस्ती सदर तहसील के 171, रूधौली के 88 और भानपुर तहसील के 73 खतौनियों में सहखातेदारों के जमीनों का अंश आनलाइन होना है। इस योजना के पूरी तरह लागू हो जाने से राजस्व वाद में भारी कमी आएगी। आपसी घरेलू विवाद समाप्त होंगे। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है कि अब सहखातेदारों को पता होगा कि उसके हिस्से में कितनी जमीन है, और कहां पर है।
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