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गेहूं के भंडारण में होगी परेशानी
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गेहूं के भंडारण में होगी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अभी चावल के भंडारण के लिए परेशान अधिकारियों को गेहूं खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। क्योंकि यहां 20 वर्ष में एक भी नया अनाज गोदाम नहीं तैयार हो पाया है। एफसीआई व सीडब्ल्यूसी के पास जो 3.50 लाख क्विंटल क्षमता का गोदाम है वह भरा हुआ है।अब गेहूं खरीद में जो अनाज आएगा, उसे कहां रखा जाएगा, इसकी तैयारी में जिम्मेदार जुटे हुए हैं।
गेहूं खरीद की तैयारी शुरू हो गई है, मगर इसे भंडारित करने की व्यवस्था के लिए जिम्मेदार परेशान हैं। जिले में एफसीआई के गोदाम की क्षमता 50 हजार क्विंटल व सीडब्ल्यूसी के गोदाम की क्षमता तीन लाख क्विंटल है। पिछले खरीद सीजन में खाद्य एवं रसद विभाग के प्रयास से मंडी के अलावा पैड़ा, बस्ती चीनी मिल व धुरियापार चीनी मिल गोदाम को किराए पर लिया गया था, तब गेहूं भंडारित हो पाया था। इस बार नई व्यवस्था के तहत चार हजार एमटी का पैड़ा गोदाम पीसीएफ को खाद के लिए आवंटित कर दिया गया है, जबकि मंडी के एक हजार एमटी क्षमता वाले गोदाम को किराए पर दिया जा चुका है। ऐसे में बस्ती चीनी मिल के सात हजार एमटी वाले गोदाम में भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाएगी। केंद्रीय पूल के दोनो गोदामों में पीडीएस का चावल व गेहूं भरा पड़ा है। धान खरीद के बाद मिल संचालकों ने अपना चावल यही भंडारित कराया है। ऐसे में गेहूं इन गोदामों में रखने की जगह नहीं है।
जिला विपणन अधिकारी गोरखनाथ त्रिपाठी ने गोदाम में जगह न होने की पुष्टि करते हुए कहा कि भंडारण की जिम्मेदारी एफसीआई व सीडब्ल्यूसी की है। गेहूं के लिए इनके चिह्नित निजी गोदामों को प्रशासन के सहयोग से लिया जाएगा। सरकारी अनाज को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अभी चावल के भंडारण के लिए परेशान अधिकारियों को गेहूं खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। क्योंकि यहां 20 वर्ष में एक भी नया अनाज गोदाम नहीं तैयार हो पाया है। एफसीआई व सीडब्ल्यूसी के पास जो 3.50 लाख क्विंटल क्षमता का गोदाम है वह भरा हुआ है।अब गेहूं खरीद में जो अनाज आएगा, उसे कहां रखा जाएगा, इसकी तैयारी में जिम्मेदार जुटे हुए हैं।
गेहूं खरीद की तैयारी शुरू हो गई है, मगर इसे भंडारित करने की व्यवस्था के लिए जिम्मेदार परेशान हैं। जिले में एफसीआई के गोदाम की क्षमता 50 हजार क्विंटल व सीडब्ल्यूसी के गोदाम की क्षमता तीन लाख क्विंटल है। पिछले खरीद सीजन में खाद्य एवं रसद विभाग के प्रयास से मंडी के अलावा पैड़ा, बस्ती चीनी मिल व धुरियापार चीनी मिल गोदाम को किराए पर लिया गया था, तब गेहूं भंडारित हो पाया था। इस बार नई व्यवस्था के तहत चार हजार एमटी का पैड़ा गोदाम पीसीएफ को खाद के लिए आवंटित कर दिया गया है, जबकि मंडी के एक हजार एमटी क्षमता वाले गोदाम को किराए पर दिया जा चुका है। ऐसे में बस्ती चीनी मिल के सात हजार एमटी वाले गोदाम में भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाएगी। केंद्रीय पूल के दोनो गोदामों में पीडीएस का चावल व गेहूं भरा पड़ा है। धान खरीद के बाद मिल संचालकों ने अपना चावल यही भंडारित कराया है। ऐसे में गेहूं इन गोदामों में रखने की जगह नहीं है।
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जिला विपणन अधिकारी गोरखनाथ त्रिपाठी ने गोदाम में जगह न होने की पुष्टि करते हुए कहा कि भंडारण की जिम्मेदारी एफसीआई व सीडब्ल्यूसी की है। गेहूं के लिए इनके चिह्नित निजी गोदामों को प्रशासन के सहयोग से लिया जाएगा। सरकारी अनाज को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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